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Indore में विदेशी युवती ने रिटायर्ड ऑफिसर से ठगी कर 10 लाख रुपये उड़ा लिए

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Published On: 4 April 2026
indore
— इंदौर में विदेशी युवती ने फेसबुक पर दोस्ती कर रिटायर्ड अधिकारी से 10 लाख रुपये ठग लिए

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Indore में विदेशी युवती ने रिटायर्ड ऑफिसर से ठगी कर 10 लाख रुपये उड़ा लिए

Indore में सोशल मीडिया के माध्यम से बुजुर्ग नागरिकों को निशाना बनाने वाली धोखाधड़ी का एक नया मामला सामने आया है। इसमें 67 वर्षीय रिटायर्ड जल संसाधन विभाग के अधिकारी ने फेसबुक पर दोस्ती के झांसे में आकर 10 लाख 42 हजार रुपये गंवा दिए। आरोपी विदेशी युवती ने बुजुर्ग को महंगे उपहार भेजने का लालच देकर लगातार रुपये की मांग की और उनके साथ साइबर फ्रॉड की योजना बनाई।

यह मामला साइबर अपराध की गंभीरता और बुजुर्गों की डिजिटल जागरूकता की कमी को उजागर करता है।

कैसे हुआ फ्रॉड: दोस्ती से धोखाधड़ी तक का सफर

जानकारी के अनुसार, रिटायर्ड अधिकारी, जो ओम विहार कॉलोनी के निवासी हैं, 15 जनवरी 2026 को फेसबुक पर डॉ. लिसा डेविस नाम की युवती से जुड़े। लिसा ने खुद को स्कॉटलैंड में रहने वाला बताया और दोनों ने तुरंत चैटिंग शुरू कर दी। बातचीत में उन्होंने फोन नंबर शेयर किया और लगातार संवाद बनाए रखा।

लिसा ने अधिकारी को यह झांसा दिया कि वह भारत आकर उनसे मिलना चाहती है। इसके बाद उसने महंगे उपहार भेजने के बहाने रुपये मांगने शुरू किए। अधिकारी ने पहले भानजे से राय लेकर छोटे-छोटे रकमें भेजनी शुरू कीं। इसके बाद लिसा ने और भी जटिल तरीकों से धोखाधड़ी करना शुरू किया।

महंगे उपहार और विदेशी मुद्रा का झांसा

लिसा ने अधिकारी को कहा कि उनके लिए दो पार्सल भेजे गए हैं, जिनकी डिलीवरी के लिए 15,500 रुपये का भुगतान करना होगा। अधिकारी ने पैसे ट्रांसफर करवा दिए। इसके बाद धोखेबाज ने उन्हें धमकी दी कि यह एक मनी लांड्रिंग केस है और अगर अधिकारी सहयोग नहीं करेंगे तो कानूनी कार्रवाई होगी।

इस तरह अधिकारी से क्रमशः 85,000 रुपये और फिर 7 लाख रुपये और 1,92,000 रुपये की राशि और ले ली गई। इस प्रकार कुल 10,42,000 रुपये की ठगी हुई।

धोखाधड़ी के दौरान लिसा ने अधिकारी को विदेशी मुद्रा को भारतीय रुपये में बदलने का झांसा देकर लगातार पैसे लेते रहे। दोबारा रुपये मांगने पर अधिकारी को शक हुआ और उन्होंने तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करवाई।

पुलिस और साइबर सेल की कार्रवाई

शिकायत मिलने के बाद एरोड्रम पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ धोखाधड़ी की धारा में केस दर्ज किया। एसीपी विवेक चौहान ने बताया कि पुलिस मामले की जांच कर रही है और डिजिटल सबूत इकट्ठा कर रही है।

साइबर क्राइम एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह मामला दिखाता है कि कैसे बुजुर्ग सोशल मीडिया और ऑनलाइन चैटिंग के माध्यम से आसानी से धोखाधड़ी का शिकार बन सकते हैं।

पुलिस ने नागरिकों को चेतावनी दी है कि अजनबियों से ऑनलाइन दोस्ती और पैसों के लेन-देन में सतर्क रहें। अगर किसी को संदिग्ध संदेश या कॉल आती है, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन या स्थानीय पुलिस को सूचित करें।

बुजुर्गों के लिए डिजिटल जागरूकता की जरूरत

इस मामले में सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि 67 वर्षीय अधिकारी भी सोशल मीडिया के जाल में फंस गए। विशेषज्ञ मानते हैं कि बुजुर्ग वर्ग को डिजिटल धोखाधड़ी और साइबर फ्रॉड के खतरों के प्रति और जागरूक करने की जरूरत है।

साइबर सेल के अधिकारी बताते हैं कि ठग अक्सर विदेशी नाम, प्रोफेशन और आकर्षक कहानियों का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा, महंगे उपहार या धन लाभ का लालच देकर लगातार पैसे निकालते हैं। ऐसे मामलों में ज्यादातर पीड़ित तुरंत पहचान नहीं पाते।

सोशल मीडिया फ्रॉड: वैश्विक समस्या

यह मामला केवल इंदौर तक सीमित नहीं है। वैश्विक स्तर पर सोशल मीडिया फ्रॉड और ऑनलाइन स्कैम लगातार बढ़ रहे हैं। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप जैसे प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे कई ठग सक्रिय हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि बुजुर्ग और तकनीकी रूप से कम जानकार लोग सबसे अधिक जोखिम में हैं। उन्हें प्रशिक्षित किया जाना चाहिए कि कभी भी अजनबियों को पैसों का लेन-देन न करें और संदिग्ध व्यवहार पर तुरंत रिपोर्ट करें।

प्रशासनिक कदम और भविष्य की रोकथाम

Indore पुलिस ने न केवल इस केस में मामला दर्ज किया है, बल्कि शहर में साइबर अपराध के प्रति जागरूकता अभियान भी शुरू किया है। स्कूल, कॉलेज और वरिष्ठ नागरिकों को डिजिटल फ्रॉड और ऑनलाइन सुरक्षा पर ट्रेनिंग दी जा रही है।

इसके अलावा, पुलिस ने सभी नागरिकों को चेताया है कि अंतरराष्ट्रीय पैसों या उपहारों के बहाने पैसों की मांग करने वाले लोगों से सावधान रहें। साइबर सेल लगातार ऑनलाइन गतिविधियों पर निगरानी रख रही है।

निष्कर्ष

Indore का यह मामला हमें याद दिलाता है कि सोशल मीडिया पर सावधानी बरतना अब कोई विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्य है। बुजुर्ग नागरिकों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति सचेत रहना चाहिए।

पारंपरिक दोस्ती और भरोसे की दुनिया अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स में बदल चुकी है। इसके साथ ही प्रशासन और पुलिस की सक्रियता, साइबर जागरूकता और व्यक्तिगत सतर्कता ही ऐसे ठगी के मामलों को रोक सकती है।

यह घटना एक चेतावनी है कि सोशल मीडिया पर दोस्ती में हमेशा सतर्क रहें, विशेषकर जब पैसों और महंगे उपहारों की बात आती है।

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