साढ़े तीन करोड़ की आरओ मशीनें कहां गईं? हाई कोर्ट ने स्मार्ट सिटी कंपनी से मांगा जवाब
जनहित याचिका पर कोर्ट ने जारी किया दोबारा नोटिस
Indore स्मार्ट सिटी योजना के तहत खरीदी गईं साढ़े तीन करोड़ रुपये से अधिक की आरओ मशीनों के गायब होने का मामला अब हाई कोर्ट पहुंच गया है। मामले में चल रही जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई करते हुए कोर्ट ने स्मार्ट सिटी कंपनी को दोबारा नोटिस जारी किया है।
कोर्ट ने कंपनी से एक सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इस बार याचिकाकर्ता स्वयं कंपनी के अधिकारियों को नोटिस तामील करवाएंगे।
महेश गर्ग ने दायर की जनहित याचिका
याचिकाकर्ता महेश गर्ग ने एडवोकेट मनीष यादव के माध्यम से हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। याचिका में बताया गया कि स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत पूरे शहर में आधुनिक प्याऊ स्थापित किए गए थे।
इन प्याऊ में आरओ मशीनों के साथ वाटर कूलर की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई थी। इन मशीनों की खरीद और स्थापना पर साढ़े तीन करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की गई थी।
दस साल तक रखरखाव की थी जिम्मेदारी
याचिका के अनुसार, स्मार्ट सिटी कंपनी को इन आरओ मशीनों का दस साल तक रखरखाव भी करना था। शुरुआत में कुछ समय तक मशीनें लोगों को पानी उपलब्ध कराती रहीं, लेकिन बाद में धीरे-धीरे मशीनें बंद होने लगीं।
इसके बाद स्थिति यह हो गई कि शहर के प्रमुख चौराहों और मार्गों पर लगाई गईं कई आरओ मशीनें पूरी तरह गायब हो गईं। अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि करोड़ों रुपये खर्च कर खरीदी गईं ये मशीनें आखिर कहां चली गईं।
राहगीरों के लिए पेयजल व्यवस्था प्रभावित
याचिकाकर्ता का कहना है कि वर्तमान समय में शहर के कई हिस्सों में राहगीरों के लिए पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। स्मार्ट सिटी योजना के तहत लगाई गईं आरओ मशीनों का उद्देश्य आम नागरिकों को विशेष रूप से गर्मी के मौसम में स्वच्छ और ठंडा पेयजल उपलब्ध कराना था, लेकिन अब इनमें से अधिकांश मशीनें दिखाई नहीं दे रही हैं।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि करोड़ों रुपये खर्च कर स्थापित की गईं इन सुविधाओं का लाभ जनता तक नहीं पहुंच पा रहा है। याचिकाकर्ता के अनुसार, इन आरओ मशीनों की खरीद में जनता से प्राप्त टैक्स की राशि का उपयोग किया गया था। इसलिए सार्वजनिक धन से तैयार की गई सुविधा के गायब होने और उसके रखरखाव में हुई लापरवाही की जिम्मेदारी तय करना आवश्यक है।
याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की है कि मामले की जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि मशीनों की वर्तमान स्थिति क्या है। साथ ही दोषी पाए जाने वाले जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में सार्वजनिक सुविधाओं की अनदेखी न हो।
नोटिस के बावजूद कंपनी नहीं हुई उपस्थित
एडवोकेट मनीष यादव ने हाई कोर्ट को अवगत कराया कि पहले जारी किए गए नोटिस के बावजूद स्मार्ट सिटी कंपनी की ओर से कोई अधिकारी या प्रतिनिधि न्यायालय में उपस्थित नहीं हुआ। इस स्थिति को देखते हुए कोर्ट ने मामले में हमदस्त नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
अब नोटिस तामील होने के बाद स्मार्ट सिटी कंपनी को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना जवाब न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। कंपनी को अपने जवाब में यह स्पष्ट करना होगा कि स्मार्ट सिटी योजना के तहत स्थापित की गई आरओ मशीनों की वर्तमान स्थिति क्या है और उनके रखरखाव को लेकर क्या कदम उठाए गए।
इसके अलावा कंपनी को यह भी बताना होगा कि करोड़ों रुपये खर्च कर लगाई गईं मशीनें बंद होने के बाद गायब कैसे हो गईं और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी है। मामले में कंपनी के जवाब के बाद ही आगे की कानूनी प्रक्रिया और कार्रवाई की दिशा तय होगी।
जवाब के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई
हाई कोर्ट के निर्देश के बाद अब सभी की नजरें स्मार्ट सिटी कंपनी के जवाब पर टिकी हुई हैं। कंपनी को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना पक्ष कोर्ट के सामने रखना होगा। कंपनी के जवाब में यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि साढ़े तीन करोड़ रुपये से अधिक की लागत से खरीदी गई आरओ मशीनों की वर्तमान स्थिति क्या है और उनके रखरखाव को लेकर क्या कदम उठाए गए।
मामले में स्मार्ट सिटी कंपनी का पक्ष सामने आने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की दिशा तय होगी। कोर्ट में प्रस्तुत जवाब के आधार पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि मशीनें बंद क्यों हुईं और उनके गायब होने के लिए कौन जिम्मेदार है।
जनहित याचिका के माध्यम से उठाए गए इस मुद्दे ने शहर में सार्वजनिक सुविधाओं की स्थिति और सरकारी धन के उपयोग को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों की मांग है कि सार्वजनिक पैसों से तैयार की गई सुविधाओं का सही उपयोग सुनिश्चित किया जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए।
