इंदौर में 100 साल पुराने जर्जर भवन में पढ़ रहे 200 से अधिक बच्चे, बारिश में टपकती है छत
अहिल्या पलटन के सरकारी स्कूल की हालत खराब, 2018 में शुरू हुआ नया भवन आठ साल बाद भी नहीं हुआ शुरू
Indore। शहर के अहिल्या पलटन क्षेत्र स्थित शासकीय हिंदी माध्यमिक विद्यालय में 200 से अधिक विद्यार्थी ऐसे भवन में पढ़ाई करने को मजबूर हैं, जो करीब 100 साल पुराना और जर्जर हालत में है। बारिश के मौसम में स्कूल भवन की स्थिति और गंभीर हो जाती है। टीन की छत से पानी टपकता है, दीवारों में जगह-जगह दरारें हैं और कई हिस्सों में फर्श भी उखड़ चुका है। ऐसे में विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्कूल के गलियारों की टीन की छत भी क्षतिग्रस्त है। बारिश होने पर यहां पानी भर जाता है, जिससे विद्यार्थियों और शिक्षकों को आने-जाने में परेशानी होती है। भवन की कई दीवारों में सीलन और पानी का रिसाव दिखाई देता है। जर्जर हिस्सों में कई जगह पौधे तक उग आए हैं, जो लंबे समय से भवन के रखरखाव की स्थिति को दर्शाते हैं।
बारिश में बढ़ जाती है परेशानी
बारिश के दौरान स्कूल भवन की समस्याएं और बढ़ जाती हैं। छत से लगातार पानी टपकने के कारण कक्षाओं और गलियारों में पानी पहुंच जाता है। दीवारों में नमी और सीलन के साथ कई जगह पानी का रिसाव भी हो रहा है।
स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को ऐसी परिस्थितियों के बीच अपनी पढ़ाई जारी रखनी पड़ रही है। अभिभावकों का कहना है कि बारिश के मौसम में जर्जर भवन में बच्चों को भेजना उनके लिए चिंता का विषय बन गया है।
शौचालयों की स्थिति भी ठीक नहीं बताई जा रही है। स्कूल परिसर में मूलभूत सुविधाओं और भवन के रखरखाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
2018 में शुरू हुआ था नए भवन का निर्माण
विद्यार्थियों को जर्जर भवन से राहत दिलाने के उद्देश्य से अहिल्या पलटन क्षेत्र में दो मंजिला नए स्कूल भवन का निर्माण शुरू किया गया था। जानकारी के अनुसार वर्ष 2018 में निर्माण कार्य शुरू हुआ, लेकिन करीब आठ साल बीत जाने के बाद भी नए भवन में स्कूल का संचालन शुरू नहीं हो सका है।
बताया गया है कि नगर निगम की ओर से करीब 60 लाख रुपये की लागत से नई बिल्डिंग तैयार कराई गई है। इसके बावजूद विद्यार्थी अभी भी पुराने भवन में ही पढ़ाई कर रहे हैं।
एक ओर बच्चे पुराने और जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी ओर लाखों रुपये खर्च कर तैयार की गई नई बिल्डिंग का उपयोग नहीं हो पा रहा है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भी स्कूल को नए भवन में शिफ्ट नहीं किए जाने से विद्यार्थियों और शिक्षकों को पुराने भवन में ही काम चलाना पड़ रहा है।
नई बिल्डिंग तैयार, फिर भी पुराने भवन में पढ़ाई
स्कूल की मौजूदा स्थिति सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा करती है कि जब बच्चों के लिए नया भवन तैयार किया जा चुका है तो वहां स्कूल का संचालन अब तक क्यों शुरू नहीं हो पाया।
पुराने भवन की हालत को देखते हुए नए भवन में स्कूल को जल्द शिफ्ट करना विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बारिश के दौरान छत से पानी टपकने और दीवारों में नमी के कारण स्कूल प्रबंधन के सामने भी लगातार चुनौती बनी हुई है।
पालकों को बच्चों की सुरक्षा की चिंता
जर्जर भवन को लेकर पालकों में भी चिंता है। उनका कहना है कि बारिश के दौरान स्कूल की हालत देखकर बच्चों को वहां भेजना मुश्किल लगता है।
पालक कुसुम ने बताया कि उनका बेटा तन्मय कक्षा दूसरी में पढ़ता है। उन्होंने कहा कि स्कूल की मौजूदा स्थिति देखकर बच्चों की सुरक्षा को लेकर डर बना रहता है। उन्होंने मांग की कि बच्चों को जल्द से जल्द नए भवन में शिफ्ट किया जाना चाहिए, ताकि वे सुरक्षित वातावरण में पढ़ाई कर सकें।
पालकों का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई के साथ उनकी सुरक्षा भी प्राथमिकता होनी चाहिए। खासकर बारिश के मौसम में जर्जर भवन में विद्यार्थियों की मौजूदगी जोखिम बढ़ा सकती है।
डीपीसी बोले- दूसरी जगह शिफ्ट करेंगे
मामले को लेकर डीपीसी अजय कुमार मिश्रा ने कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में अब आया है। उन्होंने कहा कि यदि बच्चे जर्जर स्कूल भवन में पढ़ रहे हैं तो उन्हें दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा।
डीपीसी ने यह भी कहा कि नई बिल्डिंग में स्कूल का संचालन जल्द शुरू करवाने का प्रयास किया जाएगा। उनके इस बयान के बाद अब देखना होगा कि विद्यार्थियों को जर्जर भवन से कब राहत मिलती है और नए भवन में स्कूल का संचालन कब शुरू होता है।
आठ साल से अधूरे समाधान का इंतजार
अहिल्या पलटन के इस स्कूल की स्थिति में सबसे अहम पहलू यह है कि बच्चों के लिए नया भवन तैयार करने की प्रक्रिया वर्ष 2018 में शुरू हुई थी, लेकिन वर्षों बाद भी विद्यार्थी पुराने भवन में पढ़ रहे हैं।
बारिश के मौसम में जर्जर भवन की स्थिति और खराब होने से विद्यार्थियों की सुरक्षा का मुद्दा और गंभीर हो गया है। अब अभिभावकों और विद्यार्थियों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है। उम्मीद है कि बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए स्कूल को जल्द सुरक्षित स्थान या नए भवन में स्थानांतरित किया जाएगा।
