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इंदौर मेट्रो के प्रस्तावित अंडरग्राउंड रूट पर रहवासियों का विरोध, आंदोलन की दी चेतावनी

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Published On: 8 September 2026
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इंदौर मेट्रो के प्रस्तावित अंडरग्राउंड रूट पर रहवासियों का विरोध, आंदोलन की दी चेतावनी

गोयल नगर, महावीर नगर, साईंनाथ कॉलोनी और तिलक नगर सहित आसपास की बस्तियों के नीचे से टनल निकालने पर आपत्ति; रहवासियों ने मांगी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और सुरक्षा की लिखित गारंटी

इंदौर। शहर में मेट्रो रेल सेवा के विस्तार को लेकर एक ओर लोगों में उत्साह दिखाई दे रहा है, वहीं पूर्वी क्षेत्र के कई इलाकों में प्रस्तावित भूमिगत मेट्रो मार्ग का विरोध शुरू हो गया है। गोयल नगर, महावीर नगर, साईंनाथ कॉलोनी, तिलक नगर और आसपास की कॉलोनियों के रहवासियों ने घनी आबादी तथा मकानों के नीचे से मेट्रो टनल निकाले जाने की प्रस्तावित योजना पर चिंता जताई है।

रहवासियों का कहना है कि वे मेट्रो परियोजना अथवा शहर के विकास के विरोध में नहीं हैं, लेकिन आवासीय क्षेत्रों के नीचे से टनल बनाने से पहले सुरक्षा, तकनीकी सर्वेक्षण और मकानों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। लोगों ने चेतावनी दी है कि उनकी आपत्तियों का समाधान नहीं किया गया तो वे संगठित आंदोलन शुरू करेंगे।

इन कॉलोनियों के नीचे से प्रस्तावित है टनल

जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित भूमिगत मेट्रो मार्ग पूर्वी इंदौर के गोयल नगर, महावीर नगर, साईंनाथ कॉलोनी, वंदना नगर, तिलक नगर और आसपास के घनी आबादी वाले क्षेत्रों से होकर गुजर सकता है। संभावित अलाइनमेंट की जानकारी सामने आने के बाद इन कॉलोनियों के रहवासी सक्रिय हो गए हैं।

लोगों का कहना है कि संबंधित क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पुराने और बहुमंजिला मकान बने हुए हैं। कई स्थानों पर सड़कों की चौड़ाई भी कम है। ऐसे में भूमिगत सुरंग का निर्माण शुरू होने पर कंपन, जमीन धंसने, मकानों में दरार आने और भविष्य में संपत्ति की सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।

मेट्रो का विरोध नहीं, रूट पर आपत्ति

रहवासियों ने स्पष्ट किया है कि उनका विरोध मेट्रो जैसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक परिवहन परियोजना से नहीं है। उनका कहना है कि मेट्रो से शहर की यातायात व्यवस्था बेहतर होगी और लोगों को सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध होगा, लेकिन परियोजना का मार्ग तय करते समय स्थानीय आबादी की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

स्थानीय लोगों की मांग है कि टनल को घनी आबादी के नीचे से निकालने के बजाय मुख्य सड़कों अथवा ऐसे वैकल्पिक मार्ग से ले जाया जाए, जहां आवासीय भवनों पर खतरा न्यूनतम हो। यदि वर्तमान अलाइनमेंट को ही आवश्यक बताया जाता है तो मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन को इसके तकनीकी और सुरक्षा संबंधी कारण सार्वजनिक करने चाहिए।

रहवासियों ने मांगी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट

प्रभावित कॉलोनियों के निवासियों ने भूमिगत मार्ग की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, रूट का नक्शा, टनल की गहराई और निर्माण में इस्तेमाल होने वाली तकनीक की जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि लोगों को अभी तक आधिकारिक रूप से यह नहीं बताया गया कि टनल किस मकान अथवा भूखंड के नीचे से गुजरेगी।

रहवासियों के मुताबिक केवल मौखिक आश्वासन पर्याप्त नहीं है। मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन को प्रत्येक प्रभावित कॉलोनी में सार्वजनिक बैठक आयोजित कर विशेषज्ञों के माध्यम से लोगों के प्रश्नों का उत्तर देना चाहिए। साथ ही निर्माण से पहले प्रत्येक मकान और भवन का संरचनात्मक सर्वेक्षण कराया जाना चाहिए।

मकानों में दरार और जमीन धंसने की आशंका

भूमिगत टनल को लेकर लोगों की सबसे बड़ी चिंता मकानों की मजबूती से संबंधित है। निवासियों का कहना है कि टनल निर्माण के दौरान होने वाले कंपन का पुराने भवनों की नींव पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसकी जानकारी उन्हें नहीं दी गई है।

लोगों ने सवाल उठाया कि निर्माण के दौरान अथवा भविष्य में किसी मकान में दरार आती है या जमीन धंसने जैसी स्थिति बनती है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। नुकसान का आकलन किस आधार पर किया जाएगा और प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की प्रक्रिया क्या होगी, यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।

संपत्तियों के भविष्य को लेकर भी चिंता

रहवासियों को आशंका है कि घरों के नीचे से मेट्रो टनल गुजरने पर भविष्य में मकानों की खरीद-बिक्री, पुनर्निर्माण और बैंक ऋण जैसी प्रक्रियाएं प्रभावित हो सकती हैं। वे यह जानना चाहते हैं कि टनल के ऊपर स्थित संपत्ति के मालिकों पर भविष्य में निर्माण संबंधी कोई प्रतिबंध लगाया जाएगा या नहीं।

लोगों ने यह भी पूछा है कि क्या प्रस्तावित मार्ग में निजी जमीन के भूमिगत हिस्से का उपयोग किया जाएगा। यदि ऐसा है तो जमीन के मालिकों की सहमति, कानूनी अधिकार और मुआवजे की व्यवस्था के बारे में स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

सुरक्षा की लिखित गारंटी देने की मांग

स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि मेट्रो परियोजना से मकानों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होने की लिखित गारंटी दी जाए। निर्माण शुरू होने से पहले सभी भवनों की वर्तमान स्थिति का फोटो और वीडियो रिकॉर्ड तैयार कराया जाए, ताकि बाद में किसी क्षति की स्थिति में जिम्मेदारी तय की जा सके।

रहवासियों ने स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञों से पूरे प्रस्तावित मार्ग की जांच कराने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के अधिकारियों के साथ भूवैज्ञानिकों, संरचना विशेषज्ञों और नगर नियोजन से जुड़े विशेषज्ञों को भी लोगों के सामने तकनीकी स्थिति समझानी चाहिए।

मांगें नहीं मानीं तो होगा आंदोलन

अलग-अलग कॉलोनियों के रहवासियों ने बैठकों के माध्यम से आगे की रणनीति बनाना शुरू कर दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन और मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने उनकी आपत्तियां नहीं सुनीं तो वे धरना, प्रदर्शन और हस्ताक्षर अभियान शुरू कर सकते हैं।

निवासी संयुक्त संघर्ष समिति का गठन कर प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और मेट्रो अधिकारियों को ज्ञापन देने की तैयारी भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रभावित परिवारों को विश्वास में लिए बिना परियोजना का काम आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।

पहले भी भूमिगत रूट पर हुआ था विरोध

इंदौर में भूमिगत मेट्रो मार्ग को लेकर इससे पहले भी अलग-अलग क्षेत्रों में विरोध सामने आ चुका है। मल्हारगंज क्षेत्र के रहवासियों और व्यापारियों ने प्रस्तावित स्टेशन तथा प्रवेश-निकास के लिए जमीन के उपयोग को लेकर आपत्ति जताई थी। उस दौरान सरकार की ओर से दावा किया गया था कि आधुनिक तकनीक से करीब 20 मीटर नीचे टनल बनाई जाएगी और मकानों-दुकानों को नुकसान नहीं होगा।

अब पूर्वी क्षेत्र के रहवासी भी ऐसा ही स्पष्ट और लिखित आश्वासन मांग रहे हैं। उनका कहना है कि परियोजना के प्रत्येक चरण की जानकारी पारदर्शी तरीके से साझा किए जाने पर ही लोगों का भरोसा मजबूत होगा।

संवाद से निकल सकता है समाधान

इंदौर मेट्रो शहर के भविष्य और यातायात व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण परियोजना है। इसके माध्यम से प्रमुख व्यावसायिक, आवासीय और परिवहन क्षेत्रों को जोड़ने की योजना है। हाल में मेट्रो नेटवर्क का विस्तार होने से शहर की कनेक्टिविटी भी बढ़ी है।

इसके बावजूद बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट में प्रभावित लोगों की सुरक्षा और उनकी शंकाओं का समाधान आवश्यक है। अब रहवासियों की निगाहें प्रशासन और मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यदि अधिकारियों द्वारा रूट का विस्तृत नक्शा, तकनीकी रिपोर्ट और सुरक्षा उपाय सार्वजनिक कर संवाद किया जाता है तो विवाद का समाधान निकल सकता है। अन्यथा प्रस्तावित अंडरग्राउंड रूट को लेकर विरोध और तेज होने की संभावना है।

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