इंदौर राऊ फ्लायओवर का डामर उखड़ा: 47 करोड़ के प्रोजेक्ट की खुली पोल, अब बनेगी सीमेंट कांक्रीट रोड
नेशनल हाईवे ने ठेकेदार से ही शुरू करवाया काम, 6 माह में ही उजागर हुई घटिया निर्माण की सच्चाई
इंदौर। मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर एक बार फिर लापरवाह निर्माण कार्यों और अधूरी गुणवत्ता के कारण चर्चा में है। 47 करोड़ रुपए की लागत से बने राऊ फ्लायओवर (Rau Flyover) का डामर पहली ही बारिश में उखड़ जाने से नेशनल हाईवे (NH) विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब हालात इतने बिगड़ गए हैं कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने ठेकेदार फर्म से ही पूरी डामर सड़क उखड़वाकर सीमेंट कांक्रीट (Cement Concrete Road) बनाने का निर्णय लिया है।
यह फ्लायओवर दिसंबर 2024 में उद्घाटन के बाद से ही विवादों में रहा है। 1.2 किलोमीटर लंबा यह फोरलेन ब्रिज राऊ सर्कल को इंदौर बायपास, पीथमपुर और महू—मुंबई हाईवे से जोड़ता है। रोजाना 70 हजार से अधिक वाहन यहां से गुजरते हैं, ऐसे में इस पुल की सड़क का इतनी जल्दी खराब हो जाना न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि यात्रियों की जान को भी जोखिम में डालता है।
पहली बारिश में उखड़ा डामर, सड़क पर बने गड्ढों ने बढ़ाई मुसीबत
ब्रिज का डामर इतना घटिया निकला कि बारिश के साथ ही बड़े-बड़े गड्ढे बन गए। इन गड्ढों की वजह से कई बार वाहन फंस गए और आकस्मिक दुर्घटनाएं भी हुईं। कुछ महीने पहले इस ब्रिज पर हुए एक हादसे में एक युवक की मौत भी हो चुकी है।
नेशनल हाईवे विभाग ने शुरुआत में जल्दबाजी में पेंचवर्क (patch work) करवाया, लेकिन वह भी ज्यादा दिन नहीं चल पाया। इसके बाद गड्ढे भरने के लिए पेवर ब्लॉक लगा दिए गए, जिससे सड़क और अधिक ऊबड़-खाबड़ हो गई और दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ गया।
शिकायतें पहुंचीं दिल्ली—अब ठेकेदार को ही बनानी पड़ रही नई सड़क
लगातार शिकायतों और मीडिया रिपोर्ट्स के वायरल होने के बाद मामला दिल्ली तक पहुंचा।
कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अमित चौरसिया ने केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर ब्रिज की बदहाली और ठेकेदार कंपनी मेसर्स विंध्या कंस्ट्रक्शन के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।
टेंडर शर्तों के अनुसार ब्रिज का 5 साल का रख-रखाव ठेकेदार की जिम्मेदारी है। लेकिन छह माह के भीतर ही सड़क के उखड़ जाने से स्पष्ट है कि निर्माण के दौरान गुणवत्ता से समझौता किया गया।
नेशनल हाईवे अधिकारी बोले—बार-बार मरम्मत से बेहतर है नई CC रोड
नेशनल हाईवे के अधिकारी प्रवीण यादव के अनुसार:
“डामर की सड़क बार-बार खराब हो रही थी। हर बारिश के बाद मरम्मत करनी पड़ रही थी। इसलिए अब ठेकेदार से ही पूरी डामर परत हटवाकर उसकी जगह सीमेंट कांक्रीट रोड (CC Road) का निर्माण करवाया जा रहा है।”
इस समय एक तरफ का डामर हटाकर खोदाई की जा चुकी है, ताकि दूसरी लेन पर यातायात चलता रहे। दोनों तरफ एक साथ काम करने पर ब्रिज बंद करना पड़ता, जो संभव नहीं है क्योंकि रोज हजारों वाहन यहां से गुजरते हैं।
घटिया गुणवत्ता के कारण बढ़ा खतरा—दुर्घटनाओं में वृद्धि
पिछले कई महीनों में इस ब्रिज पर कई हादसे हो चुके हैं। बारिश के समय तो स्थिति और भी खराब हो जाती थी।
- बड़े गड्ढों में पानी भर जाता
- दोपहिया वाहन फिसल जाते
- कारें और भारी वाहन झटके खाते
- रात में गड्ढे दिखाई नहीं देते
स्थानीय निवासी और यात्री लंबे समय से इसकी शिकायत कर रहे थे।
विधायक और सांसद ने भी उठाई आवाज़
राऊ क्षेत्र के विधायक मधु वर्मा ने भी नेशनल हाईवे अधिकारियों को लिखकर ठेकेदार कंपनी से ही सड़क सुधार करवाने की मांग की थी।
इंदौर के सांसद ने भी केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी से आग्रह किया था कि रख-रखाव टेंडर शर्तों के अनुरूप ही हो और घटिया निर्माण की जांच की जाए।
47 करोड़ का प्रोजेक्ट—6 महीने में ही उखड़ गई सड़क
यह फ्लायओवर दिसंबर 2024 में करोड़ों की लागत से तैयार हुआ था। उद्घाटन के समय इसे इंदौर और पीथमपुर के लिए स्मार्ट ट्रैफिक कनेक्टिविटी का मॉडल प्रोजेक्ट बताया गया था।
परंतु:
- केवल छह महीनों में ही सड़क उखड़ गई
- गड्ढों से भरा मार्ग दुर्घटनाओं का कारण बना
- पेंचवर्क और पेवर ब्लॉक भी फेल हो गए
- शिकायतों के बाद अब डामर हटाकर CC रोड बनाने की नौबत आ गई
यह पूरे प्रोजेक्ट की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है।
सीमेंट कांक्रीट रोड बनने के बाद क्या सुधरेगी स्थिति?
CC Road डामर की तुलना में ज्यादा टिकाऊ होती है और भारी वाहनों के दबाव में जल्दी खराब नहीं होती। पीथमपुर इंडस्ट्रियल एरिया की ओर जाने वाले ट्रकों का भारी लोड भी यहां से गुजरता है, इसलिए यह बदलाव जरूरी माना जा रहा है।
नई सड़क बनने के बाद:
- ब्रिज पर गड्ढों की समस्या खत्म होगी
- दुर्घटनाओं का खतरा कम होगा
- वर्षा में सड़क टूटने की संभावना घटेगी
- रख-रखाव खर्च कम होगा
हालांकि काम में समय लग सकता है और इस दौरान यातायात को सावधानी से नियंत्रित करना होगा।
निष्कर्ष—लापरवाही की कीमत जनता चुकाए, यह स्वीकार नहीं
इंदौर जैसे विकसित शहर में करोड़ों रुपए का फ्लायओवर छः महीनों में ही खराब हो जाए, यह प्रशासनिक संवेदनहीनता और ठेकेदार की लापरवाही का बड़ा प्रमाण है।
अब जबकि सीमेंट कांक्रीट सड़क बनने का काम शुरू हो चुका है, जनता को उम्मीद है कि यह सुधार टिकाऊ साबित होगा और भविष्य में ऐसे प्रोजेक्ट्स में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

