Indore Property Verification 2026: हर संपत्ति की होगी तीन स्तर पर जांच, GIS सर्वे से खुलेगा टैक्स चोरी का सच
नगर निगम ने शुरू की सख्ती, जनगणना और बिजली कंपनी के डेटा से होगा मिलान; अगस्त से पूरे शहर में GIS सर्वे शुरू
इंदौर। संपत्तिकर व्यवस्था को मजबूत करने और टैक्स चोरी रोकने के लिए इंदौर नगर निगम ने बड़ा कदम उठाया है। अब शहर की हर संपत्ति की तीन स्तर पर जांच की जाएगी। इसके लिए नगर निगम जनगणना में हुई मकान गणना, बिजली कंपनी के रिकॉर्ड और GIS आधारित सर्वे का सहारा लेगा।
नगर निगम का उद्देश्य है कि जिन संपत्तियों से अभी तक संपत्तिकर नहीं मिल रहा है, उन्हें टैक्स के दायरे में लाया जाए और राजस्व में बढ़ोतरी की जाए।
तीन स्तर पर होगी संपत्तियों की जांच
नगर निगम ने संपत्तियों की जांच के लिए तीन अलग-अलग स्तर तय किए हैं।
1. जनगणना के मकान गणना आंकड़ों से जांच
नगर निगम सबसे पहले जनगणना के दौरान हुई मकान गणना के आंकड़ों का इस्तेमाल कर रहा है। इसके माध्यम से यह पता लगाया जा रहा है कि शहर में कितने मकान मौजूद हैं और उनका उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है।
इस जांच में यह जानकारी सामने आएगी कि:
- कौन सा मकान आवासीय है।
- कौन सी संपत्ति व्यावसायिक उपयोग में ली जा रही है।
- किन संपत्तियों से अभी तक टैक्स नहीं लिया जा रहा है।
नगर निगम इसी आधार पर टैक्स से बाहर रह गई संपत्तियों को चिन्हित कर रहा है।
बिजली कंपनी के रिकॉर्ड से होगा सत्यापन
संपत्तियों की पहचान के लिए नगर निगम को मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी से भी जानकारी प्राप्त हुई है।
बिजली कंपनी ने निगम को उन उपभोक्ताओं की सूची उपलब्ध कराई है, जिनके यहां:
- घरेलू बिजली कनेक्शन हैं।
- व्यावसायिक बिजली कनेक्शन हैं।
नगर निगम अब बिजली कनेक्शन की जानकारी का मिलान संपत्तिकर रिकॉर्ड से करेगा। इससे यह पता लगाया जाएगा कि कहीं कोई व्यावसायिक संपत्ति आवासीय श्रेणी में दर्ज कर कम टैक्स तो नहीं दे रही है।
अगस्त से शुरू होगा GIS आधारित सर्वे
नगर निगम ने पूरे शहर में GIS (Geographic Information System) आधारित संपत्ति सर्वे के लिए निजी कंपनी का चयन किया है।
चयनित कंपनी अगस्त 2026 से सर्वे का काम शुरू करेगी। यह सर्वे लगभग एक साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
GIS सर्वे के दौरान:
- हर संपत्ति की लोकेशन दर्ज की जाएगी।
- भवन का क्षेत्रफल और उपयोग की जानकारी जुटाई जाएगी।
- संपत्तिकर रिकॉर्ड से मिलान किया जाएगा।
- टैक्स में अंतर मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
निजी कंपनी को टैक्स बढ़ोतरी का 7 प्रतिशत मिलेगा
नगर निगम ने GIS सर्वे के लिए चुनी गई कंपनी के साथ करार किया है। टेंडर की शर्तों के अनुसार, सर्वे के बाद संपत्तिकर में जितनी बढ़ोतरी होगी, उसका 7 प्रतिशत हिस्सा कंपनी को भुगतान किया जाएगा।
कंपनी ने सर्वे के लिए करीब 10 टीमें तैयार की हैं, जो पूरे शहर में जाकर संपत्तियों की जांच करेंगी।
नगर निगम का लक्ष्य दोगुना से ज्यादा राजस्व बढ़ाना
नगर निगम संपत्तिकर से मिलने वाले राजस्व को बढ़ाने पर जोर दे रहा है। निगम का लक्ष्य है कि वर्तमान संपत्तिकर आय को दोगुने से अधिक स्तर तक बढ़ाया जाए।
अधिकारियों का मानना है कि बड़ी संख्या में ऐसी संपत्तियां हैं जो या तो टैक्स के दायरे से बाहर हैं या फिर गलत श्रेणी में दर्ज हैं। इन संपत्तियों की पहचान होने के बाद निगम की आय में बड़ा इजाफा हो सकता है।
टैक्स चोरी रोकने में मिलेगी मदद
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, तीन स्तर की जांच व्यवस्था से संपत्तिकर चोरी रोकने में मदद मिलेगी।
नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने कहा कि अलग-अलग स्रोतों से जानकारी जुटाकर संपत्तियों का सत्यापन किया जा रहा है। इससे टैक्स व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी और निगम को सही राजस्व प्राप्त हो सकेगा।
निगम की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की तैयारी
नगर निगम का कहना है कि संपत्तिकर से मिलने वाली आय शहर के विकास कार्यों के लिए महत्वपूर्ण होती है। राजस्व बढ़ने से:
- सड़क निर्माण,
- सफाई व्यवस्था,
- जल आपूर्ति,
- अन्य नागरिक सुविधाओं
को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
तीन स्तर की जांच और GIS सर्वे के बाद इंदौर में संपत्तिकर व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और डिजिटल बनाने की तैयारी है। निगम को उम्मीद है कि इस प्रक्रिया से टैक्स चोरी पर रोक लगेगी और शहर की आर्थिक व्यवस्था मजबूत होगी।
