Indore में सरकारी जमीन के कब्जाधारियों का खुलेगा संपत्तिकर खाता? प्रस्ताव पर विवाद के आसार
Indore नगर निगम की आय बढ़ाने के लिए तैयार किए गए एक नए प्रस्ताव को लेकर इंदौर में विवाद खड़ा हो सकता है। प्रस्ताव के तहत सरकारी, नगर निगम की जमीन और अवैध कॉलोनियों में कब्जे वाली संपत्तियों पर संपत्तिकर खाते खोलकर टैक्स वसूलने की योजना बनाई गई है। नगर निगम के राजस्व विभाग ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर उसे मेयर-इन-काउंसिल (MIC) की बैठक में मंजूरी के लिए शामिल किया है।
हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं। आशंका जताई जा रही है कि यदि सरकारी या निगम की जमीन पर कब्जा करने वालों के नाम से संपत्तिकर खाते खोल दिए गए, तो भविष्य में वे इसे जमीन पर अपने कब्जे के समर्थन में एक दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। इसी वजह से MIC के कुछ सदस्यों के प्रस्ताव का विरोध करने की संभावना है।
आय बढ़ाने के लिए तैयार किया गया प्रस्ताव
Indore नगर निगम के राजस्व विभाग का उद्देश्य संपत्तिकर के दायरे को बढ़ाकर निगम की आय में इजाफा करना बताया जा रहा है। प्रस्ताव में कहा गया है कि कुछ ऐसी संपत्तियां हैं, जिन पर लोग लंबे समय से काबिज हैं, लेकिन उनके पास संपत्ति के पूर्ण स्वामित्व से जुड़े वैध दस्तावेज नहीं हैं।
ऐसे मामलों में केवल कराधान के उद्देश्य से संपत्तिकर खाते खोलकर उनसे टैक्स वसूलने की व्यवस्था किए जाने का प्रस्ताव है। इसमें अवैध कॉलोनियों के साथ-साथ सरकारी और नगर निगम के स्वामित्व वाली जमीन पर मौजूद अतिक्रमण भी शामिल बताए गए हैं।
विभाग का तर्क है कि संपत्तिकर की वसूली से निगम को अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है। लेकिन इस व्यवस्था को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि टैक्स वसूली की प्रक्रिया कहीं अनजाने में कब्जाधारियों को कानूनी लाभ तो नहीं पहुंचा देगी।
क्या संपत्तिकर खाता बन सकता है कब्जे का आधार?
इस प्रस्ताव को लेकर सबसे बड़ा सवाल संपत्तिकर खाते की कानूनी स्थिति को लेकर है। यदि किसी सरकारी या निगम की जमीन पर कब्जा करने वाले व्यक्ति के नाम से संपत्तिकर खाता खुलता है और वह नियमित रूप से टैक्स जमा करता है, तो भविष्य में वह इन दस्तावेजों का इस्तेमाल अपने कब्जे को साबित करने के लिए कर सकता है।
हालांकि, संपत्तिकर खाता अपने आप में जमीन के स्वामित्व का प्रमाण नहीं माना जाता, लेकिन विवाद की स्थिति में ऐसे दस्तावेजों को कब्जे या लंबे समय से उपयोग के समर्थन में पेश किए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
यही वजह है कि प्रस्ताव को लेकर निगम के भीतर भी चर्चा शुरू हो गई है। सवाल यह है कि निगम को मामूली या अतिरिक्त टैक्स आय के लिए ऐसी व्यवस्था लागू करनी चाहिए या नहीं, जिससे भविष्य में सरकारी जमीन से जुड़े विवाद और जटिल हो सकते हैं।
कब्जा हटाने के बजाय टैक्स वसूली पर सवाल
प्रस्ताव की आलोचना करने वालों का कहना है कि सरकारी या निगम की जमीन पर अतिक्रमण की स्थिति में प्राथमिक जिम्मेदारी कब्जा हटाने और जमीन को सुरक्षित रखने की होनी चाहिए। इसके बजाय यदि उसी जमीन पर संपत्तिकर वसूल किया जाता है, तो इससे अतिक्रमण को अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकार करने का संदेश जा सकता है।
Indore में सरकारी और सार्वजनिक उपयोग की जमीन पर अतिक्रमण लंबे समय से प्रशासन के लिए चुनौती रहा है। ऐसे में संपत्तिकर खाता खोलने की प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता और स्पष्ट नियम बेहद जरूरी होंगे।
MIC बैठक में हो सकता है विरोध
राजस्व विभाग द्वारा तैयार प्रस्ताव को आगामी MIC बैठक में रखा जाना है। बैठक में महापौर पुष्यमित्र भार्गव की मौजूदगी में इस मुद्दे पर चर्चा होने की संभावना है।
बताया जा रहा है कि कुछ MIC सदस्य पहले ही इस प्रस्ताव के संभावित प्रभावों को लेकर चिंतित हैं। उनका मानना है कि सरकारी या निगम की जमीन से जुड़े मामलों में ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए, जिससे भविष्य में कब्जाधारियों को अप्रत्यक्ष लाभ मिल सके।
यदि प्रस्ताव बैठक में आता है तो इस पर विस्तृत चर्चा और विरोध की स्थिति बन सकती है। सदस्यों की ओर से यह सवाल उठाया जा सकता है कि संपत्तिकर वसूली से निगम को होने वाली आय और सरकारी जमीन की सुरक्षा में से प्राथमिकता किसे दी जानी चाहिए।
नामांतरण से जुड़ा दूसरा प्रस्ताव भी एजेंडे में
MIC बैठक में केवल संपत्तिकर से जुड़ा प्रस्ताव ही नहीं, बल्कि स्वत्व नामांतरण प्रकरणों के निराकरण से संबंधित एक अन्य प्रस्ताव भी रखा जाना है। इसमें देरी से प्राप्त होने वाले नामांतरण आवेदनों पर अतिरिक्त प्रोसेसिंग शुल्क लगाने और इसके लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) को मंजूरी देने की बात है।
इस प्रस्ताव का उद्देश्य नामांतरण प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित करना और देरी से आने वाले आवेदनों के लिए अतिरिक्त शुल्क की व्यवस्था तय करना बताया जा रहा है।
फैसले पर टिकी निगाहें
सरकारी और निगम की जमीन पर कब्जे से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की कर व्यवस्था लागू करने से पहले उसके कानूनी और प्रशासनिक प्रभावों को स्पष्ट करना जरूरी होगा। नगर निगम के सामने एक ओर अपनी आय बढ़ाने की चुनौती है, तो दूसरी ओर सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी है।
अब निगाह MIC की बैठक पर है कि संपत्तिकर खाते खोलने के इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, इसमें संशोधन किया जाता है या फिर सदस्यों के विरोध के बाद इसे वापस लिया जाता है। यदि प्रस्ताव मंजूर होता है, तो इसके नियम, पात्रता और यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि संपत्तिकर भुगतान को किसी भी स्थिति में जमीन के स्वामित्व या वैध कब्जे का प्रमाण नहीं माना जाएगा।
