Indore News: डब्बा ट्रेडिंग और सट्टेबाजी नेटवर्क का पर्दाफाश, 404 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग उजागर
इंदौर में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़े अवैध डब्बा ट्रेडिंग और ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क का खुलासा किया है। एजेंसी ने इस नेटवर्क के मुख्य संचालक के रूप में कांग्रेस के पूर्व कार्यकारी शहर अध्यक्ष और पूर्व पार्षद विशाल उर्फ गोलू अग्निहोत्री को चिन्हित किया है। ED ने धन शोधन रोकथाम कानून (PMLA) के तहत इंदौर की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल करते हुए कहा कि यह नेटवर्क केवल भारत तक सीमित नहीं था, बल्कि यह दुबई और अन्य देशों तक फैला हुआ था। इसके माध्यम से बड़ी मात्रा में अंतरराष्ट्रीय मनी लॉन्ड्रिंग की गई।
मुंबई की FIR से शुरू हुई जांच
ईडी की जांच की शुरुआत 2021 में मुंबई में दर्ज अवैध सट्टेबाजी से जुड़ी एफआईआर के बाद हुई। इस FIR में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और अवैध कमोडिटी ट्रेडिंग की जानकारी सामने आई। इसके बाद 2024 में ED ने विशाल अग्निहोत्री से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की। जांच के दौरान मुंबई, अहमदाबाद और चेन्नई समेत कई शहरों में कार्रवाई की गई। जांच में यह भी सामने आया कि इस नेटवर्क का सीधा संबंध दुबई से था, जहां से अवैध धन का प्रवाह नियंत्रित किया जाता था।
404.46 करोड़ की अवैध कमाई का खुलासा
चार्जशीट में कहा गया है कि अवैध कमोडिटी एक्सचेंज, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और फर्जी वेबसाइटों के जरिए कुल 404.46 करोड़ रुपये की कमाई की गई। जांच में यह भी सामने आया कि तरुण श्रीवास्तव और श्रीनिवास रामासामी इस नेटवर्क के महत्वपूर्ण सहयोगी थे। तरुण लेन-देन और वित्तीय गतिविधियों का संचालन करता था, जबकि श्रीनिवास तकनीकी पक्ष संभालता था और फर्जी ट्रेडिंग के लिए सर्वरों में हेरफेर करता था।
संपत्तियों की कुर्की और जब्ती
ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के सबूत मिलने के बाद अब तक 34.26 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। इसमें 28.60 करोड़ की अचल संपत्ति, 3.83 करोड़ की चल संपत्ति और 1.83 करोड़ रुपये बैंक खातों में शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, तलाशी के दौरान 5.21 करोड़ रुपये नकद, 59.9 किलो चांदी, सोना, महंगे गहने और क्रिप्टोकरेंसी भी जब्त की गई।
ईडी के अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले अवैध नेटवर्क पर एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके माध्यम से देश में ऑनलाइन सट्टेबाजी और डब्बा ट्रेडिंग के खिलाफ सख्त संदेश दिया गया है। यह कार्रवाई यह दिखाती है कि मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध वित्तीय लेन-देन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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जांच में हुई महत्वपूर्ण खुलासे
प्रवर्तन निदेशालय की जांच में कई अहम तथ्य सामने आए हैं। सबसे पहले यह पता चला कि इस अवैध नेटवर्क का संचालन केवल इंदौर या कुछ शहरों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका विस्तार दुबई और अन्य अंतरराष्ट्रीय हिस्सों तक फैला हुआ था। इसके माध्यम से अवैध कमोडिटी ट्रेडिंग और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए करोड़ों रुपये की कमाई की गई।
जांच में यह भी सामने आया कि तकनीकी हेरफेर और फर्जी सर्वरों के जरिए लेन-देन को छुपाया जाता था, ताकि वास्तविक धन का पता न चल सके। सहयोगियों के माध्यम से यह पैसा कई हिस्सों में विभाजित करके लॉन्ड्र किया जाता था, जिससे वित्तीय प्रवाह का ट्रैक रखना मुश्किल हो जाता था।
इसके अलावा, ED ने संपत्तियों की कुर्की कर वास्तविक धन और मूल्यवान वस्तुओं को जब्त किया। इसमें नकद, अचल और चल संपत्ति, सोना, चांदी, महंगे गहने और क्रिप्टोकरेंसी शामिल हैं। यह कार्रवाई यह दर्शाती है कि वित्तीय अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं और किसी को भी कानून से परे नहीं छोड़ा जाएगा।
आगे की कार्यवाही और कानूनी प्रक्रिया
चार्जशीट दाखिल होने के बाद विशेष अदालत में अब इस मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी। ED की जांच से यह स्पष्ट हुआ है कि देश में ऑनलाइन सट्टेबाजी और डब्बा ट्रेडिंग जैसी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। इस मामले में गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों और सहयोगियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष
इंदौर में ED की यह कार्रवाई न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी चेतावनी है। यह दिखाता है कि वित्तीय अपराध और अंतरराष्ट्रीय मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ कानून सख्ती से लागू किया जा रहा है। जांच में सामने आए नेटवर्क का फैलाव, धन की मात्रा और संपत्तियों की जब्ती इस बात को प्रमाणित करती है कि देश में वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
