Indore News: बहुमंजिला भवनों के लिए नगर निगम सख्त, अब NOC और शुल्क जमा किए बिना नहीं मिलेगी निर्माण अनुमति
Indore मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में बहुमंजिला भवनों, अपार्टमेंट और ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट को लेकर नगर निगम ने नियमों को और सख्त कर दिया है। अब शहर की नई और पुरानी सभी विकसित कॉलोनियों में बनने वाले अपार्टमेंट, बहुमंजिला इमारतों और ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए जरूरी प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य होगा।
नगर निगम की बिल्डिंग परमिशन शाखा ने आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि अब किसी भी भवन का नक्शा मंजूर कराने से पहले कॉलोनी विकास अनुमति शुल्क और आश्रय निधि जमा करनी होगी। इसके साथ ही संबंधित आवश्यक अनुमतियां और एनओसी लेना भी जरूरी होगा।
नगर निगम के इस फैसले के बाद बिल्डरों और कॉलोनाइजरों के लिए निर्माण प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित और नियम आधारित हो जाएगी।
नक्शा मंजूरी से पहले जमा करना होगा शुल्क
Indore नगर निगम के नए आदेश के अनुसार, शहर की किसी भी विकसित कॉलोनी या योजना के प्लॉट पर यदि अपार्टमेंट, बहुमंजिला भवन या ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट बनाया जाता है तो भवन निर्माण का नक्शा मंजूर कराने से पहले विकास अनुमति शुल्क और आश्रय निधि की राशि जमा करनी होगी।
अब तक कई मामलों में बिल्डर और कॉलोनाइजर पहले भवन निर्माण की अनुमति प्राप्त कर लेते थे और बाद में अन्य औपचारिकताएं पूरी की जाती थीं। लेकिन नए नियमों के बाद इस प्रक्रिया में बदलाव किया गया है।
अब बिल्डिंग परमिशन शाखा तभी नक्शे को मंजूरी देगी, जब सभी आवश्यक शुल्क और दस्तावेज पूरे होंगे।
पहले सीधे मिल जाती थी निर्माण अनुमति
Indore नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, अब तक शहर की विकसित कॉलोनियों और योजनाओं के प्लॉटों पर आवासीय, गैर आवासीय या मिश्रित उपयोग के लिए अपार्टमेंट और बहुमंजिला भवन बनाने वाले बिल्डर सीधे भवन निर्माण शाखा से नक्शा स्वीकृत करा लेते थे।
नई व्यवस्था के तहत अब ऐसा नहीं होगा। निर्माण से पहले सभी जरूरी नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य रहेगा।
नगर निगम का मानना है कि इस कदम से शहर में होने वाले निर्माण कार्यों में पारदर्शिता आएगी और भविष्य में अनियमित निर्माण पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
एनओसी के बाद ही आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
नए आदेश के अनुसार, बहुमंजिला भवन या ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए संबंधित विभागों से आवश्यक एनओसी लेना भी जरूरी होगा। एनओसी मिलने के बाद ही भवन का नक्शा स्वीकृत किया जाएगा।
नगर निगम ने यह कदम शहर में बढ़ते शहरी विस्तार और लगातार हो रहे निर्माण कार्यों को देखते हुए उठाया है। इंदौर में तेजी से बढ़ती आबादी के कारण आवासीय परियोजनाओं की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।
ऐसे में नगर निगम यह सुनिश्चित करना चाहता है कि सभी निर्माण नियमों के अनुसार हों और शहर की आधारभूत सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।
हाईकोर्ट जाने की स्थिति में निगम ने दायर की केविएट
Indore नगर निगम ने अपने इस आदेश को लेकर संभावित कानूनी चुनौती को देखते हुए हाईकोर्ट में केविएट भी दायर कर दी है।
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति या संस्था इस आदेश के खिलाफ न्यायालय में जाती है तो बिना निगम का पक्ष सुने कोई एकतरफा फैसला न हो, इसके लिए पहले से कानूनी तैयारी की गई है।
केविएट दायर करने का उद्देश्य यही है कि न्यायालय में मामले की सुनवाई के दौरान निगम का पक्ष भी सुना जाए।
बिल्डरों पर बढ़ेगी जिम्मेदारी
नगर निगम के इस फैसले के बाद शहर में निर्माण करने वाले बिल्डरों और कॉलोनाइजरों की जिम्मेदारी बढ़ जाएगी। उन्हें अब परियोजना शुरू करने से पहले सभी नियमों और शुल्क संबंधी प्रक्रियाओं को पूरा करना होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस व्यवस्था से अवैध या नियमों के विपरीत होने वाले निर्माण पर नियंत्रण लगाया जा सकेगा।
साथ ही कॉलोनी विकास से जुड़े शुल्क जमा होने से शहर के विकास कार्यों को भी आर्थिक मदद मिल सकती है।
शहर के व्यवस्थित विकास की दिशा में कदम
Indore नगर निगम का कहना है कि इंदौर लगातार तेजी से विकसित हो रहा है। ऐसे में जरूरी है कि नए निर्माण कार्य तय मानकों और नियमों के अनुसार हों।
बहुमंजिला इमारतों में सुरक्षा, पार्किंग, सड़क व्यवस्था, जल निकासी और अन्य सुविधाओं को ध्यान में रखना जरूरी है। नए आदेश के जरिए नगर निगम निर्माण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और नियंत्रित बनाना चाहता है।
अब आने वाले समय में अपार्टमेंट, बहुमंजिला भवन और ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट शुरू करने वाले डेवलपर्स को नए नियमों के अनुसार ही काम करना होगा।
