इंदौर में तीन साल बाद बड़ी राहत, नगर निगम अब बाहरी क्षेत्रों के भी पास करेगा नक्शे; 5000 वर्गफीट तक मिलेगी मंजूरी
Indore Municipal Corporation: नगरीय प्रशासन विभाग ने नियमों में किया बदलाव, टीएंडसीपी की अनुमति की बाध्यता खत्म; छावनी, परदेशीपुरा और कुलकर्णी नगर सहित दर्जनों कॉलोनियों के रहवासियों को मिलेगा फायदा
इंदौर। शहर के पुराने और पूर्व विकसित बाहरी क्षेत्रों में मकान बनाने या पुराने भवन का पुनर्निर्माण करने की योजना बना रहे हजारों लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। करीब तीन साल से भवन निर्माण अनुमति को लेकर चली आ रही परेशानी का रास्ता साफ हो गया है। अब इंदौर नगर निगम इन क्षेत्रों में 5000 वर्गफीट तक के भूखंडों के भवन नक्शे मंजूर कर सकेगा।
नई व्यवस्था के तहत ऐसे मामलों में नगर तथा ग्राम निवेश विभाग यानी टीएंडसीपी से अलग से अनुमति लेने की बाध्यता समाप्त कर दी गई है। इससे छावनी, परदेशीपुरा, कुलकर्णी नगर सहित शहर की कई पुरानी और विकसित कॉलोनियों के रहवासियों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।
नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा नियमों में संशोधन किए जाने के बाद नगर निगम के स्तर पर भवन निर्माण और पुनर्निर्माण के नक्शों की मंजूरी का रास्ता खुला है।
तीन साल से अटकी थी भवन अनुमति
वर्ष 2023 से पहले शहर के इन क्षेत्रों में भवन निर्माण के नक्शों को मंजूरी देने के लिए डाटा फार्म आधारित व्यवस्था प्रचलित थी। इस प्रक्रिया के माध्यम से रहवासी अपने भवनों के निर्माण या पुनर्निर्माण की अनुमति प्राप्त कर लेते थे।
बाद में यह व्यवस्था बंद हो गई। इसके बाद कई क्षेत्रों में नक्शा मंजूरी की प्रक्रिया प्रभावित हो गई और लोगों को अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने पड़े।
करीब तीन वर्षों तक स्पष्ट व्यवस्था नहीं होने के कारण कई लोग अपने मकान का निर्माण, विस्तार या पुनर्निर्माण नहीं करा पा रहे थे।
अब नियमों में संशोधन के बाद ऐसे संपत्ति मालिकों के लिए नगर निगम से अनुमति लेने का रास्ता खुल गया है।
5000 वर्गफीट तक के भूखंडों के नक्शे होंगे मंजूर
नई व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इंदौर नगर निगम 5000 वर्गफीट तक के भूखंडों के भवन नक्शों को मंजूरी दे सकेगा।
इससे छोटे और मध्यम आकार के आवासीय भूखंड रखने वाले बड़ी संख्या में लोगों को फायदा मिल सकता है। पहले अनुमति प्रक्रिया में आ रही तकनीकी और विभागीय बाधाओं के कारण कई आवेदन आगे नहीं बढ़ पा रहे थे।
अब निर्धारित नियमों और भवन निर्माण संबंधी मानकों को पूरा करने वाले आवेदनों पर नगर निगम के स्तर से कार्रवाई संभव होगी।
टीएंडसीपी की अनुमति की बाध्यता खत्म
भवन नक्शों को लेकर सबसे बड़ी समस्या नगर तथा ग्राम निवेश विभाग यानी Town and Country Planning (TNCP) की अनुमति से जुड़ी थी।
नई व्यवस्था के बाद संबंधित श्रेणी के भूखंडों पर भवन निर्माण या पुनर्निर्माण के लिए टीएंडसीपी से अलग अनुमति लेने की बाध्यता समाप्त होने से प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है।
इस बदलाव से आवेदकों का समय बच सकता है और अलग-अलग कार्यालयों में अनुमति के लिए जाने की जरूरत भी कम हो सकती है।
हालांकि भवन निर्माण के लिए नगर निगम के अन्य लागू नियम, बिल्डिंग बायलॉज और सुरक्षा संबंधी मानकों का पालन करना आवश्यक रहेगा।
छावनी, परदेशीपुरा और कुलकर्णी नगर को फायदा
इस फैसले का फायदा शहर के उन इलाकों को मिलेगा जो पहले बाहरी क्षेत्र माने जाते थे, लेकिन समय के साथ शहर के विकसित और घनी आबादी वाले हिस्सों में शामिल हो चुके हैं।
इनमें छावनी, परदेशीपुरा और कुलकर्णी नगर जैसे इलाके शामिल बताए गए हैं। इनके अलावा ऐसी कई अन्य कॉलोनियां और क्षेत्र हैं जहां भवन अनुमति से संबंधित समस्या लंबे समय से बनी हुई थी।
इंदौर के तेजी से हुए विस्तार के कारण पुराने बाहरी इलाके अब शहर के प्रमुख आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों में बदल चुके हैं। इसके बावजूद पुरानी प्लानिंग और अनुमति व्यवस्था से जुड़े तकनीकी मुद्दों के कारण संपत्ति मालिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
मकान के पुनर्निर्माण का रास्ता भी होगा आसान
नई व्यवस्था केवल नए भवन निर्माण के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि पुराने मकानों के पुनर्निर्माण की योजना बना रहे लोगों को भी इससे राहत मिल सकती है।
शहर के कई पुराने क्षेत्रों में मकान दशकों पहले बनाए गए थे। समय के साथ इन भवनों की स्थिति खराब होने के कारण मालिक इन्हें तोड़कर नए सिरे से निर्माण करना चाहते हैं।
लेकिन नक्शा मंजूरी नहीं मिलने के कारण पुनर्निर्माण की प्रक्रिया अटक रही थी। अब पात्र भूखंडों के नक्शे नगर निगम स्तर पर मंजूर होने से ऐसे मामलों में प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
हजारों संपत्ति मालिकों को मिल सकती है राहत
तीन वर्षों से भवन अनुमति की प्रक्रिया प्रभावित होने का असर केवल व्यक्तिगत मकान मालिकों तक सीमित नहीं था। इससे निर्माण गतिविधियों पर भी असर पड़ा।
नक्शे मंजूर होने की प्रक्रिया दोबारा सुचारू होने से भवन निर्माण से जुड़े आर्किटेक्ट, इंजीनियर, ठेकेदार, मजदूर और निर्माण सामग्री के कारोबार को भी फायदा मिल सकता है।
शहर में लंबित निर्माण परियोजनाओं को अनुमति मिलने पर स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ सकती हैं।
अवैध निर्माण पर भी लग सकती है रोक
भवन नक्शा मंजूरी की प्रक्रिया सरल और स्पष्ट होना शहरी नियोजन के लिए भी महत्वपूर्ण है। जब वैध अनुमति प्राप्त करने में अत्यधिक समय लगता है तो कई बार बिना अनुमति निर्माण की प्रवृत्ति बढ़ने का खतरा रहता है।
यदि नगर निगम के स्तर पर नक्शे समय पर मंजूर होते हैं तो लोग निर्धारित नियमों के तहत निर्माण करा सकेंगे। इससे अवैध निर्माण पर नियंत्रण और भवन नियमों का पालन सुनिश्चित करने में भी मदद मिल सकती है।
नगर निगम की बढ़ेगी जिम्मेदारी
नियमों में बदलाव के बाद जहां रहवासियों को राहत मिलेगी, वहीं इंदौर नगर निगम की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी। बड़ी संख्या में लंबित आवेदन सामने आने पर उनकी जांच और समय पर निपटारा महत्वपूर्ण होगा।
नगर निगम को यह सुनिश्चित करना होगा कि भवन नक्शे तय नियमों, सड़क की चौड़ाई, सेटबैक, पार्किंग, ऊंचाई और अन्य लागू मानकों के अनुसार ही मंजूर किए जाएं।
आवेदन प्रक्रिया जितनी पारदर्शी और ऑनलाइन होगी, लोगों के लिए अनुमति लेना उतना ही आसान हो सकता है।
तीन साल बाद खुला निर्माण का रास्ता
करीब तीन वर्षों से भवन निर्माण या पुनर्निर्माण की अनुमति का इंतजार कर रहे लोगों के लिए नियमों में हुआ यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सबसे बड़ा फायदा उन पुराने क्षेत्रों को होगा जहां मकानों के पुनर्निर्माण की जरूरत बढ़ती जा रही है, लेकिन तकनीकी कारणों से नक्शे मंजूर नहीं हो पा रहे थे।
अब 5000 वर्गफीट तक के पात्र भूखंडों के नक्शे नगर निगम से मंजूर होने का रास्ता खुलने से लोगों को अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने से राहत मिलने की उम्मीद है। आने वाले दिनों में नगर निगम द्वारा आवेदन और मंजूरी प्रक्रिया को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी।
