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Indore नगर निगम में नामांतरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव, फर्जीवाड़ा रोकने के लिए नई सख्त प्रक्रिया लागू

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Published On: 18 June 2026
Indore

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Indore नगर निगम में नामांतरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव, फर्जीवाड़ा रोकने के लिए नई सख्त प्रक्रिया लागू

संपत्ति नामांतरण प्रक्रिया को लेकर प्रशासन का बड़ा निर्णय

Indore शहर में संपत्ति से जुड़े मामलों में बढ़ते विवादों और फर्जीवाड़े की शिकायतों के बाद नगर निगम ने नामांतरण (mutation) प्रक्रिया में व्यापक और कड़े बदलाव लागू किए हैं। अब संपत्ति के नामांतरण की प्रक्रिया केवल कागजी जांच तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें जमीनी स्तर पर सत्यापन और बहुस्तरीय जांच प्रणाली को शामिल किया गया है।

नगर निगम प्रशासन का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में संपत्ति विवादों और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नामांतरण के कई मामले सामने आए हैं, जिनसे न केवल प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हुई बल्कि आम नागरिकों का भरोसा भी कमजोर हुआ है। इसी को देखते हुए यह नई प्रणाली लागू की गई है।

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना, धोखाधड़ी रोकना और वास्तविक संपत्ति स्वामियों के अधिकारों की रक्षा करना है।

मौके पर भौतिक सत्यापन अनिवार्य किया गया

नई व्यवस्था के तहत अब किसी भी संपत्ति के नामांतरण से पहले उसका मौके पर भौतिक सत्यापन (on-site verification) किया जाएगा। यह कार्य नगर निगम के बिल कलेक्टर और संबंधित राजस्व अधिकारियों द्वारा किया जाएगा।

इस दौरान अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि—

  • संपत्ति वास्तव में आवेदक के कब्जे में है या नहीं
  • संपत्ति का उपयोग किस उद्देश्य से हो रहा है
  • संपत्ति पर कोई विवाद या कानूनी रोक तो नहीं है

नगर निगम का मानना है कि इस कदम से उन मामलों पर रोक लगेगी जिनमें बिना वास्तविक कब्जे के संपत्ति हस्तांतरण कर दिया जाता था।

अधिकारियों के अनुसार, कई बार फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नामांतरण करवा लिया जाता था, जबकि वास्तविक मालिक को इसकी जानकारी तक नहीं होती थी। इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए यह कदम बेहद जरूरी माना जा रहा है।

सभी संबंधित पक्षों को नोटिस देना अनिवार्य

नामांतरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए अब सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया जाएगा। इसमें न केवल खरीदार और विक्रेता शामिल होंगे, बल्कि संपत्ति से जुड़े सभी संभावित दावेदारों को भी सूचना दी जाएगी।

इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि—

  • किसी भी पक्ष को बिना सूचना के नामांतरण न हो
  • सभी को अपनी आपत्ति दर्ज करने का अवसर मिले
  • विवादित मामलों का समय रहते समाधान हो सके

नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया अब अनिवार्य रूप से हर मामले में लागू की जाएगी।

रजिस्ट्री और दस्तावेजों की सख्त जांच

नई व्यवस्था के तहत अब संपत्ति नामांतरण के लिए रजिस्ट्री की प्रमाणित प्रति अनिवार्य कर दी गई है। इसके साथ ही आवेदन के समय निम्न दस्तावेज भी जरूरी होंगे—

  • खरीदार और विक्रेता दोनों के आधार कार्ड
  • संपत्ति रजिस्ट्री की सर्टिफाइड कॉपी
  • आवश्यक शपथ पत्र
  • जाहिर सूचना (public notice) से संबंधित दस्तावेज

नगर निगम का कहना है कि इन दस्तावेजों के बिना किसी भी आवेदन पर आगे की कार्रवाई नहीं की जाएगी।

इससे पहले कई मामलों में साधारण फोटोकॉपी या अपूर्ण दस्तावेजों के आधार पर नामांतरण हो जाता था, जिससे बाद में विवाद उत्पन्न होते थे।

फर्जीवाड़े पर अब होगी आपराधिक कार्रवाई

नगर निगम के राजस्व विभाग ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी भी मामले में फर्जी दस्तावेज, कूटरचित कागजात या गलत जानकारी पाई जाती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों ने बताया कि हाल ही में महालक्ष्मी नगर क्षेत्र में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नामांतरण का मामला सामने आया था, जिसके बाद दो नगर निगम कर्मचारियों को निलंबित भी किया गया।

इस घटना के बाद प्रशासन ने यह महसूस किया कि केवल प्रशासनिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि कानूनी स्तर पर सख्ती जरूरी है।

अब ऐसे मामलों में सीधे एफआईआर दर्ज कर कठोर धाराओं में कार्रवाई की जाएगी।

वकालतनामा के बिना आवेदन स्वीकार नहीं

नई व्यवस्था में यह भी तय किया गया है कि नामांतरण के लिए आवेदन केवल दो ही स्थितियों में स्वीकार किया जाएगा—

  1. संपत्ति का वास्तविक दावेदार स्वयं आवेदन करे
  2. अधिकृत वकील द्वारा वकालतनामा के साथ आवेदन प्रस्तुत किया जाए

इस नियम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी अनधिकृत व्यक्ति किसी और की संपत्ति से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप न कर सके।

नगर निगम का मानना है कि इससे फर्जी प्रतिनिधित्व और धोखाधड़ी की घटनाओं में काफी कमी आएगी।

वारिसी मामलों में भी सख्त नियम लागू

संपत्ति के वारिसी (inheritance) मामलों में भी अब समान सख्त प्रक्रिया लागू होगी। इसमें निम्न दस्तावेज अनिवार्य होंगे—

  • मृत्यु प्रमाण पत्र की मूल प्रति
  • शपथ पत्र
  • वारिसों का स्पष्ट विवरण
  • सार्वजनिक सूचना (public notice)

इसके अलावा इन मामलों में भी सभी संबंधित पक्षों को नोटिस भेजा जाएगा, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।

नगर निगम का कहना है कि वारिसी मामलों में अक्सर परिवारों के बीच विवाद होते हैं, जिन्हें पारदर्शी प्रक्रिया से ही नियंत्रित किया जा सकता है।

मौके पर जांच अब हर मामले में अनिवार्य

नई व्यवस्था के तहत अब बिल कलेक्टर द्वारा मौके पर जांच करना हर नामांतरण आवेदन में अनिवार्य होगा। यह जांच रिपोर्ट तैयार किए बिना कोई भी फाइल आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।

जांच में यह देखा जाएगा—

  • संपत्ति का वास्तविक उपयोग
  • कब्जे की स्थिति
  • आस-पास के लोगों से जानकारी
  • संपत्ति पर किसी विवाद की स्थिति

नगर निगम का मानना है कि यह कदम पूरी प्रक्रिया को अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनाएगा।

पारदर्शिता और नागरिक विश्वास बढ़ाने का प्रयास

नगर निगम अधिकारियों ने कहा कि इन सभी बदलावों का मुख्य उद्देश्य शहर की संपत्ति व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना है।

अधिकारियों के अनुसार, जब तक प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं होगी, तब तक फर्जीवाड़े और विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हो सकते। इसलिए अब हर स्तर पर जांच और सत्यापन को अनिवार्य किया गया है।

पहले से लागू जाहिर सूचना (public notice) प्रणाली को भी जारी रखा गया है, ताकि हर नागरिक को समय पर जानकारी मिलती रहे।

विशेषज्ञों की राय और प्रभाव

शहर के प्रशासनिक और कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव लंबे समय में बेहद सकारात्मक साबित होगा। इससे न केवल फर्जी दस्तावेजों पर रोक लगेगी बल्कि संपत्ति विवादों में भी भारी कमी आएगी।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस व्यवस्था से—

  • संपत्ति लेन-देन अधिक सुरक्षित होगा
  • विवादों की संख्या घटेगी
  • नागरिकों का प्रशासन पर भरोसा बढ़ेगा

निष्कर्ष

इंदौर नगर निगम द्वारा लागू की गई यह नई नामांतरण व्यवस्था शहर में संपत्ति प्रशासन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सुधार मानी जा रही है। यदि इसे सही तरीके से लागू किया गया तो यह न केवल फर्जीवाड़े को रोकने में मदद करेगी बल्कि नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगी।

यह कदम इंदौर को एक अधिक पारदर्शी और आधुनिक शहरी प्रशासन प्रणाली की ओर ले जाने वाला माना जा रहा है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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