इंदौर नगर निगम फर्जी बिल घोटाला: ED ने पूर्व इंजीनियर समेत 3 को किया गिरफ्तार,
इंदौर में बड़ा घोटाला उजागर, ED की कार्रवाई से मचा हड़कंप
मध्यप्रदेश के Indore नगर निगम में फर्जी बिल घोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व असिस्टेंट इंजीनियर समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में पूर्व असिस्टेंट इंजीनियर अभय सिंह राठौर, ठेकेदार मोहम्मद जाकिर और राहुल बडेरा शामिल हैं। तीनों को विशेष PMLA कोर्ट, इंदौर में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें 5 जून तक ED की रिमांड पर भेज दिया है।
इस कार्रवाई के बाद नगर निगम में वर्षों से चल रहे कथित फर्जी बिल और जाली दस्तावेजों के जरिए करोड़ों रुपये की हेराफेरी के मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है।
फर्जी बिल और जाली दस्तावेजों से निकाले गए करोड़ों रुपये
जांच एजेंसियों के अनुसार यह पूरा मामला इंदौर नगर निगम के खजाने से फर्जी बिलों, नकली वर्क ऑर्डर और जाली दस्तावेजों के माध्यम से करोड़ों रुपये निकालने से जुड़ा है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कई ऐसे कार्यों के नाम पर बिल लगाए गए, जो वास्तव में जमीन पर कभी किए ही नहीं गए।
मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज कई FIR और चार्जशीट के आधार पर ED ने इस मामले की विस्तृत जांच शुरू की थी। जांच में धीरे-धीरे इस पूरे घोटाले की परतें खुलती गईं और बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ।
2018 से 2023 के बीच 119.53 करोड़ के फर्जी बिल
ED की जांच रिपोर्ट में यह सामने आया है कि वर्ष 2018 से 2023 के बीच इंदौर नगर निगम में लगभग 119.53 करोड़ रुपये के फर्जी और संदिग्ध बिल प्रस्तुत किए गए। इन बिलों को विभिन्न विकास कार्यों के नाम पर दिखाया गया, जबकि वास्तविकता में ये कार्य अस्तित्व में ही नहीं थे।
इन फर्जी बिलों के आधार पर नगर निगम के खजाने से लगभग 86.54 करोड़ रुपये का भुगतान भी कर दिया गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह राशि सुनियोजित तरीके से निकाली गई और इसे अलग-अलग माध्यमों से घुमाया गया।
कुल घोटाले की रकम 92.76 करोड़ रुपये आंकी गई
ED की जांच में यह भी सामने आया कि 2018 से पहले भी इसी तरह की प्रक्रिया के जरिए लगभग 6.22 करोड़ रुपये की सरकारी धनराशि की हेराफेरी की गई थी। इन सभी लेन-देन को जोड़कर कुल घोटाले की रकम लगभग 92.76 करोड़ रुपये आंकी गई है।
प्रवर्तन निदेशालय ने इस पूरी राशि को अपराध से अर्जित संपत्ति (Proceeds of Crime) माना है और इसकी विस्तृत ट्रेल की जांच की जा रही है कि यह पैसा किन-किन माध्यमों से आगे ट्रांसफर किया गया।
पूर्व असिस्टेंट इंजीनियर अभय सिंह राठौर मुख्य साजिशकर्ता
ED के अनुसार, उस समय नगर निगम में सहायक अभियंता के पद पर कार्यरत अभय सिंह राठौर इस पूरे घोटाले के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक है। आरोप है कि उसने फर्जी वर्क ऑर्डर तैयार कराने, उन्हें मंजूरी दिलाने और भुगतान प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
जांच में यह भी सामने आया है कि राठौर की भूमिका के कारण कागजों पर कई ऐसे विकास कार्य दर्शाए गए जो वास्तव में कभी किए ही नहीं गए। इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया और सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया।
ठेकेदारों की फर्मों को हुआ भारी भुगतान
ED की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि ठेकेदार मोहम्मद जाकिर और राहुल बडेरा की फर्मों को नगर निगम के खजाने से लगभग 71.78 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। यह भुगतान उन्हीं फर्जी और जाली बिलों के आधार पर किया गया, जो इस पूरे घोटाले का हिस्सा बताए जा रहे हैं।
एजेंसी का आरोप है कि दोनों ठेकेदारों ने न केवल फर्जी बिल तैयार करने और जमा करने में सक्रिय भूमिका निभाई, बल्कि इस अवैध धन को आगे अन्य लोगों तक पहुंचाने में भी मदद की।
पुलिस FIR से शुरू हुई ED की जांच
इस पूरे मामले की शुरुआत मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज की गई कई FIR से हुई थी। पुलिस जांच में पहली बार यह संकेत मिले थे कि नगर निगम के विकास कार्यों के नाम पर भारी वित्तीय अनियमितताएं हो रही हैं।
इसके बाद ED ने PMLA (Prevention of Money Laundering Act) के तहत जांच शुरू की और बैंक ट्रांजैक्शन, वर्क ऑर्डर, बिलिंग सिस्टम और भुगतान प्रक्रिया की गहराई से जांच की गई।
नगर निगम की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस घोटाले के उजागर होने के बाद इंदौर नगर निगम की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर फर्जी बिलों का भुगतान होना प्रशासनिक निगरानी में बड़ी चूक को दर्शाता है।
मामले ने यह भी सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वर्षों तक चल रही इस अनियमितता को रोकने के लिए कोई प्रभावी ऑडिट सिस्टम मौजूद नहीं था।
आगे की जांच जारी
ED अब इस पूरे घोटाले में शामिल अन्य लोगों, फर्मों और वित्तीय लेन-देन की श्रृंखला की जांच कर रही है। एजेंसी का मानना है कि इस मामले में अभी और भी कई नाम सामने आ सकते हैं।
साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि घोटाले की रकम किन-किन संपत्तियों, खातों और निवेशों में लगाई गई है।
