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Indore नगर निगम बजट सत्र हंगामे में बदल गया, वंदे मातरम न गाने पर कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख का निष्कासन

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Published On: 8 April 2026
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इंदौर नगर निगम बजट सत्र में हंगामा: वंदे मातरम विवाद और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप

Indore नगर निगम का बजट सत्र इस बार राजनीतिक विवादों और हंगामे के कारण अत्यधिक तनावपूर्ण बना हुआ है। 8,455 करोड़ रुपये के बजट पर चर्चा के दौरान कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम ने ‘वंदे मातरम’ गाने से इनकार कर दिया। इस घटना ने भाजपा पार्षदों में आक्रोश और नाराजगी पैदा कर दी, जिससे सदन में जोरदार नारेबाजी और हंगामा शुरू हो गया। बजट चर्चा के दौरान कार्यवाही कई बार बाधित हुई और शहर के विकास मुद्दों पर फोकस कुछ समय के लिए पीछे चला गया।

वंदे मातरम विवाद और निष्कासन

प्रश्नोत्तर काल के दौरान राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ गाया जा रहा था, लेकिन फौजिया शेख ने इसमें भाग नहीं लिया। भाजपा पार्षदों के विरोध और जोरदार आवाजाही के बाद सभापति मुन्नालाल यादव ने उन्हें सदन से बाहर जाने का आदेश दिया। फौजिया ने इसका विरोध करते हुए कहा कि उनकी धार्मिक आस्था इस गान की अनुमति नहीं देती और यह व्यक्तिगत विश्वास का मामला है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके धर्म के अनुसार यह निर्णय लिया गया है। इस मामले पर कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे ने कहा कि व्यक्तिगत दृष्टिकोण अलग हो सकता है, लेकिन पार्टी राष्ट्रगीत के प्रति समर्पित है और उन्होंने इसे प्रदेश अध्यक्ष को भी सूचित किया है।

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पर तीखी टिप्पणी

वंदे मातरम विवाद के बाद सत्र में नया विवाद तब पैदा हुआ जब कांग्रेस पार्षद राजू भदौरिया ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ ‘गद्दार’ शब्द का प्रयोग किया। इस पर भाजपा पार्षद आक्रोशित हो गए और सदन में जोरदार शोर-शराबा शुरू हो गया। बढ़ते विरोध को देखते हुए राजू भदौरिया को अपने शब्दों के लिए माफी मांगनी पड़ी। इसके बाद कार्यवाही को आंशिक रूप से नियंत्रित किया गया और बजट चर्चा फिर से शुरू हुई। इस विवाद ने स्पष्ट कर दिया कि पारदर्शिता और राजनीतिक समझौता बजट सत्र की कार्यवाही में कितना महत्वपूर्ण है।

Indore निगम की संपत्तियों और प्रशासन पर सवाल

विवाद के दौरान राजू भदौरिया ने निगम की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी निगम की संपत्तियों के बारे में जानकारी देने की बजाय एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टालते हैं। इस पर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने हस्तक्षेप करते हुए आश्वासन दिया कि सात दिनों के भीतर सभी सवालों के लिखित जवाब उपलब्ध कराए जाएंगे। इस कदम से यह संदेश गया कि प्रशासन जनता के सवालों और पारदर्शिता को गंभीरता से ले रहा है।

बजट चर्चा पर राजनीतिक विवादों का प्रभाव

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और व्यक्तिगत विवादों के कारण बजट चर्चा प्रभावित हुई। भाजपा और कांग्रेस पार्षदों के बीच लगातार बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप जारी रहे। वित्तीय मामलों और शहर के विकास पर चर्चा धीमी गति से हुई। इसके बावजूद अधिकारियों ने यह सुनिश्चित किया कि शहर के विकास कार्यों और वित्तीय योजनाओं की प्राथमिकताओं पर चर्चा जारी रहे। बजट सत्र में शहर के आगामी वित्तीय वर्ष के लिए 8,455 करोड़ रुपये के बजट का निर्धारण होना था, लेकिन राजनीतिक विवादों ने चर्चा की गति को बाधित किया।

प्रशासन की सक्रिय भूमिका और संतुलन बनाए रखना

नगर निगम प्रशासन ने बजट सत्र के दौरान संतुलन बनाए रखने की पूरी कोशिश की। अधिकारियों ने सुनिश्चित किया कि हंगामा और राजनीतिक विवादों के बावजूद वित्तीय और विकासात्मक मुद्दों पर चर्चा जारी रहे। प्रशासन की सक्रिय भूमिका ने यह सुनिश्चित किया कि कार्यवाही पूर्ण रूप से बाधित न हो और बजट चर्चा अपने निर्धारित ढांचे के अनुसार आगे बढ़े। अधिकारी सदन में शांति बनाए रखने के लिए लगातार प्रयासरत रहे, ताकि शहर के विकास और बजट कार्यवाही प्रभावित न हों।

आम जनता और शहर पर प्रभाव

हंगामे और विवादों के कारण शहरवासियों की नजरें नगर निगम की कार्यप्रणाली और पार्षदों के व्यवहार पर टिक गईं। राजनीतिक मतभेदों और व्यक्तिगत विवादों ने यह स्पष्ट कर दिया कि बजट सत्र में पारदर्शिता बनाए रखना कितना चुनौतीपूर्ण है। प्रशासन की सक्रिय भूमिका और पार्षदों के सहयोग के बावजूद हंगामा शहर के बजट और विकास कार्यों की प्राथमिकताओं पर असर डालता नजर आया।

भविष्य की योजना और निष्कर्ष

नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि राजनीतिक मतभेदों और व्यक्तिगत विवादों के बावजूद बजट और विकास कार्यों पर निगरानी जारी रहेगी। यह सत्र दर्शाता है कि प्रशासन और पार्षदों को विकास और वित्तीय योजनाओं पर ध्यान बनाए रखना आवश्यक है। प्रशासन ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में बजट सत्रों में हंगामा कम करने के लिए कड़े नियम लागू किए जा सकते हैं।

इंदौर नगर निगम का यह बजट सत्र इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि इसमें शहर के विकास और वित्तीय योजनाओं के लिए बड़ा बजट तय होना था। राजनीतिक विवाद, वंदे मातरम विवाद, केंद्रीय मंत्री पर टिप्पणी और पार्षदों के आपसी आरोप-प्रत्यारोपों ने कार्यवाही को चुनौतीपूर्ण बना दिया। इसके बावजूद प्रशासन ने संतुलन बनाए रखने की पूरी कोशिश की। यह सत्र दर्शाता है कि राजनीतिक मतभेदों और व्यक्तिगत दृष्टिकोणों के बावजूद शहर के विकास और वित्तीय योजनाओं पर चर्चा जारी रखना आवश्यक है।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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