—Advertisement—

इंदौर में दूध का खरीदी मूल्य 65 रुपये करने की मांग, लागत बढ़ने से दूध उत्पादक किसानों ने खोला मोर्चा

Author Picture
Published On: 26 August 2026
fgfgfsd

—Advertisement—

इंदौर में दूध का खरीदी मूल्य 65 रुपये करने की मांग, लागत बढ़ने से दूध उत्पादक किसानों ने खोला मोर्चा

इंदौर। जिले में दूध की नई खरीदी दर तय होने से पहले दूध उत्पादक किसानों ने अपनी मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। किसानों ने दूध का खरीदी मूल्य 65 रुपये प्रति लीटर किए जाने की मांग उठाई है। किसान शोषण विरोधी मंच के नेतृत्व में बड़ी संख्या में दूध उत्पादक किसान कलेक्टर और संभागायुक्त कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर दूध उत्पादन की बढ़ती लागत को देखते हुए उचित मूल्य निर्धारित करने की मांग की।

किसानों का कहना है कि पशुपालन और दूध उत्पादन अब पहले की तुलना में काफी महंगा हो गया है। पशुओं की खरीद से लेकर खली, भूसा, हरा चारा, दवाइयां और मजदूरी तक का खर्च लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में मौजूदा खरीदी दर पर दूध बेचना उनके लिए आर्थिक रूप से मुश्किल होता जा रहा है। किसानों ने मांग की है कि एक सितंबर से लागू होने वाली नई खरीदी दर तय करते समय उनकी वास्तविक उत्पादन लागत को ध्यान में रखा जाए।

65 रुपये प्रति लीटर खरीदी मूल्य की मांग

दूध उत्पादक किसानों ने स्पष्ट किया कि उनकी प्रमुख मांग दूध का खरीदी मूल्य 65 रुपये प्रति लीटर निर्धारित करने की है। किसानों के अनुसार वर्तमान परिस्थितियों में पशुपालन का खर्च तेजी से बढ़ा है, जबकि उन्हें दूध के बदले मिलने वाली राशि उसी अनुपात में नहीं बढ़ी है।

किसानों का कहना है कि दूध उत्पादन केवल पशु पालने तक सीमित नहीं है। पशुओं के लिए पौष्टिक आहार, चारा, पानी, चिकित्सा, टीकाकरण, देखभाल और मजदूरी सहित कई प्रकार के खर्च वहन करने पड़ते हैं। इन सभी खर्चों को जोड़ने के बाद दूध की वर्तमान खरीदी कीमत पर्याप्त नहीं रह जाती।

खली, भूसा और चारे की बढ़ती कीमतों से किसान परेशान

किसानों ने अपने ज्ञापन में दूध उत्पादन की लागत बढ़ने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उनका कहना है कि पिछले कुछ समय में पशु आहार से जुड़ी वस्तुओं के दाम बढ़े हैं। खली, भूसा और हरे चारे की कीमत बढ़ने से प्रत्येक पशु पर होने वाला दैनिक खर्च भी बढ़ गया है।

इसके अलावा पशुओं के उपचार और दवाइयों पर होने वाला खर्च भी किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालता है। दूध उत्पादन से जुड़े परिवारों को पशुओं की नियमित देखभाल के लिए मजदूर भी रखने पड़ते हैं। किसानों के मुताबिक इन परिस्थितियों में यदि दूध का उचित खरीदी मूल्य नहीं मिलता है तो छोटे और मध्यम पशुपालकों के लिए व्यवसाय को जारी रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

गांव और शहर के दूध के भाव में अंतर का उठाया मुद्दा

किसानों ने दूध की ग्रामीण खरीदी दर और शहर में उपभोक्ताओं को मिलने वाले दूध की कीमत के बीच अंतर का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि गांवों में उत्पादकों से दूध करीब 52 से 55 रुपये प्रति लीटर के भाव से खरीदा जाता है, जबकि शहर में वही दूध 65 से 70 रुपये प्रति लीटर तक उपभोक्ताओं को बेचा जाता है।

दूध उत्पादकों का तर्क है कि इस व्यवस्था में वास्तविक उत्पादन करने वाले किसान को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। किसानों की मांग है कि मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया ऐसी हो, जिसमें उत्पादक को उसकी लागत के साथ उचित लाभ भी मिल सके।

एक सितंबर से पहले नई दर को लेकर बढ़ी हलचल

इंदौर जिले में एक सितंबर से दूध की नई खरीदी दर निर्धारित किए जाने की प्रक्रिया को देखते हुए किसानों की मांग महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दूध कारोबार से जुड़े विभिन्न पक्षों के बीच बाजार की स्थिति और उत्पादन लागत के आधार पर नई दर निर्धारित किए जाने की बात सामने आई है।

इसी बीच दूध उत्पादक किसान चाहते हैं कि नई दर घोषित करने से पहले उनकी समस्याओं और खर्चों का भी आकलन किया जाए। किसानों का कहना है कि दूध की कीमत तय करने में केवल बाजार की बिक्री दर को आधार नहीं बनाया जाना चाहिए, बल्कि पशुपालक द्वारा दूध तैयार करने में किए जाने वाले वास्तविक खर्च को भी शामिल किया जाना जरूरी है।

कलेक्टर और संभागायुक्त कार्यालय पहुंचकर सौंपा ज्ञापन

किसान शोषण विरोधी मंच के नेतृत्व में दूध उत्पादक किसानों ने अपनी मांग प्रशासन के सामने रखी। बड़ी संख्या में किसान कलेक्टर कार्यालय और संभागायुक्त कार्यालय पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन के माध्यम से किसानों ने सरकार से मांग की कि दूध उत्पादकों के हितों को ध्यान में रखते हुए खरीदी मूल्य में वृद्धि की जाए। किसानों का कहना है कि यदि दूध उत्पादन को लाभकारी बनाए रखना है तो पशुपालकों को उनकी मेहनत और लागत के अनुरूप कीमत मिलना आवश्यक है।

दूध उत्पादन से हजारों ग्रामीण परिवारों की आजीविका जुड़ी

इंदौर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवार पशुपालन और दूध उत्पादन से जुड़े हैं। कई किसानों के लिए खेती के साथ दुग्ध उत्पादन आय का महत्वपूर्ण साधन है। प्रतिदिन दूध की बिक्री से मिलने वाली राशि परिवार के नियमित खर्चों को पूरा करने में मदद करती है।

ऐसे में दूध की खरीदी कीमत में होने वाला बदलाव सीधे तौर पर इन परिवारों की आय को प्रभावित करता है। किसानों का कहना है कि यदि उत्पादन लागत बढ़ती रही और खरीदी मूल्य में पर्याप्त बढ़ोतरी नहीं हुई तो पशुपालन व्यवसाय पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

नई खरीदी दर पर अब सभी की नजर

दूध उत्पादक किसानों के प्रदर्शन और ज्ञापन के बाद अब नजर इस बात पर है कि एक सितंबर से दूध की नई खरीदी दर क्या तय की जाती है। किसान 65 रुपये प्रति लीटर की मांग पर जोर दे रहे हैं, जबकि दूध कारोबार से जुड़े पक्ष बाजार और लागत के आधार पर मूल्य निर्धारण की बात कर रहे हैं।

किसानों को उम्मीद है कि प्रशासन और सरकार उनकी मांगों पर विचार करेंगे। उनका कहना है कि दूध उत्पादकों को उचित मूल्य मिलने से न केवल पशुपालकों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि दुग्ध उत्पादन को भी प्रोत्साहन मिलेगा। फिलहाल नई दर घोषित होने से पहले किसानों की इस मांग ने इंदौर में दूध के भाव को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp