MGM मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग लापरवाही डेढ़ माह के मासूम का अंगूठा कट गया नर्स सस्पेंड
इंदौर: शहर के MGM मेडिकल कॉलेज के न्यू चेस्ट वार्ड में एक बेहद गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है, जिसमें डेढ़ माह के एक मासूम बच्चे का अंगूठा लापरवाही से कैंची लगने से कटकर अलग हो गया। घटना ने अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य कर्मियों की कार्य‑पद्धति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह हादसा बुधवार दोपहर करीब 2 बजे के आसपास हुआ।
बच्चा निमोनिया की गंभीर हालत में न्यू चेस्ट वार्ड में भर्ती था और उसका इलाज चल रहा था। अस्पताल में इंट्राकेथ (Intracath) बदलने का काम किया जा रहा था, जिसमें नर्सिंग टीम की पद्धति बेहद निगरानी और सावधानी की मांग करती है। लेकिन खबरों के मुताबिक इंट्राकेथ बदलते समय नर्सिंग ऑफिसर ने जल्दबाजी और असावधानी से कैंची का इस्तेमाल किया, जिससे बच्चे के हाथ के अंगूठे पर कट लग गया और अंगूठा अलग होकर नीचे गिर गया।
क्या हुआ था हादसे के समय?
मासूम बच्चे को 24 दिसंबर को निमोनिया के इलाज के लिए भर्ती किया गया था। बुधवार को जब नर्सिंग टीम द्वारा इंट्राकेथ बदलने का काम किया जा रहा था, तो नर्सिंग ऑफिसर आरती श्रोत्रिय ने इंजेक्शन की टेप हटाने के लिए कैंची चलाई, जो गलती से बच्चे के अंगूठे पर चली गई। इससे बच्चे का अंगूठा कटकर जमीन पर गिर गया। अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक, घटना के तुरंत बाद अस्पताल स्टाफ और डॉक्टरों में हड़कंप मच गया।
इस दौरान बच्चे के परिजन ने आरोप लगाया कि वार्ड में कई बार नर्सें मोबाइल फोन में व्यस्त रहती थीं और इलाज के दौरान उचित ध्यान नहीं दिया गया। सूत्रों में यह भी बताया गया कि जब नर्स को बच्चे के हाथ में सूजन की शिकायत हुई, परिजन दो बार नर्स को बुला चुके थे, लेकिन जब वह तीसरी बार आईं, तब यह दर्दनाक हादसा हो गया।
तुरंत सर्जरी और इलाज
हादसे के तुरंत बाद बच्चे को सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने सर्जरी कर कटा हुआ अंगूठा वापस जोड़ने की कोशिश की। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, सर्जरी सफल रही और बच्चे की स्थिति फिलहाल स्थिर बनी हुई है। हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि भविष्य में अंगूठा पहले जैसा सामान्य रूप से काम करेगा या नहीं।
मामले को गंभीरता से लेते हुए अस्पताल प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की है। नर्सिंग ऑफिसर आरती श्रोत्रिय को सस्पेंड कर दिया गया है। साथ ही, वार्ड में निगरानी में चूक के लिए तीन नर्सिंग इंचार्ज का एक‑एक माह का वेतन रोक दिया गया है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि यह कदम भविष्य में ऐसी लापरवाही को रोकने और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
अधिकारियों का बयान और जांच
MGM मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने कहा है कि घटना की गंभीरता को देखते हुए 24 घंटे के भीतर सख्त कार्रवाई की गयी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्पताल प्रशासन मरीज की सुरक्षा को सर्वोपरि मानता है और इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जांच जारी है तथा एक उच्च‑स्तरीय जांच समिति का गठन भी किया गया है।
जिला स्वास्थ्य अधिकारियों ने भी इस मामले की समीक्षा शुरु कर दी है और विभागीय जांच रिपोर्ट को देखने के बाद आवश्यक आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए मेडिकल कर्मचारियों की प्रशिक्षण प्रक्रिया, निगरानी प्रणाली और वार्ड प्रोटोकॉल की समीक्षा की जा रही है।

परिवार की प्रतिक्रिया
मासूम बच्चे की मां अंजु (बेटमा के बजरंगपुरा गांव की निवासी) ने बताया कि पहले अस्पताल स्टाफ को सूजन के बारे में दो बार सूचित किया गया था, लेकिन घटना तब हुई जब नर्स इंट्राकेथ बदलने लगी। परिजन ने अस्पताल में लापरवाही का आरोप लगाया और कहा कि इस तरह की संवेदनहीनता मरीजों की जान को खतरे में डाल सकती है। उन्होंने न्याय और उचित मुआवजे की भी मांग की है।
स्वास्थ्य प्रणाली में सुरक्षा और निगरानी की आवश्यकता
इस हादसे ने एक बार फिर से सरकारी अस्पतालों में मरीज सुरक्षा, निगरानी और कर्मचारी अनुशासन की कमी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में कर्मचारियों को पर्याप्त प्रशिक्षण, सतर्कता, और इलाज के दौरान पूरी सावधानी बरतनी चाहिए, खासकर नवजात और छोटे बच्चों के साथ काम करते समय। इंट्राकेथ जैसे प्रक्रियाएँ बेहद संवेदनशील होती हैं और उनमें कम‑से‑कम गलती भी भारी परिणाम दे सकती है।
स्वास्थ्य संगठनों द्वारा नियमित रूप से वार्ड स्टाफ की मानक प्रक्रियाओं और सुरक्षा प्रोटोकॉल की जांच और प्रशिक्षण पर बल दिया जाता है। ऐसे मामलों से बचने के लिए लगातार निगरानी, नियमित ड्यूटी रिव्यू, और मरीजों के राइट्स से जुड़ी जागरूकता जरूरी मानी जाती है।
निष्कर्ष
इंदौर के MGM मेडिकल कॉलेज के न्यू चेस्ट वार्ड में नर्सिंग लापरवाही के कारण डेढ़ माह के एक मासूम का अंगूठा कट जाना एक बेहद गंभीर घटना है। अस्पताल प्रशासन ने तत्काल सस्पेंशन और वेतन रोकने जैसी कार्रवाई कर स्थिति पर नियंत्रण रखा है। लेकिन यह घटना स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की निगरानी और कर्मचारियों की सतर्कता पर एक बड़ा सवाल भी उठाती है। भविष्य में इस तरह की घटना को रोकने के लिए और अधिक समय‑समय पर प्रशिक्षण, कर्मचारियों की निगरानी और सुरक्षा मानकों पर कड़ाई से पालन करने की आवश्यकता जताई जा रही है।
