Indore MD Drugs Case: 16 महीने पुराने मामले में बड़ा खुलासा, जब्त पदार्थ यूरिया निकला;
मामले की पृष्ठभूमि
Indore MD Drugs Case :मध्यप्रदेश के Indore में 16 महीने पहले दर्ज हुए कथित एमडी ड्रग्स (म्येफेड्रोन) मामले में अब अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए तीनों आरोपियों को बरी कर दिया है। इस केस में एक पुलिसकर्मी भी आरोपी था, जिसे बाद में विभाग ने नौकरी से बर्खास्त कर दिया था।
यह मामला तब सामने आया था जब पुलिस ने दावा किया था कि आरोपियों के पास से 198 ग्राम एमडी ड्रग्स बरामद किया गया है। लेकिन जांच के बाद पूरा मामला पलट गया और जिस पदार्थ को ड्रग्स बताया गया था, वह साधारण यूरिया निकला।
शुरुआती गिरफ्तारी और पुलिस का दावा
करीब 16 महीने पहले पुलिस ने विजय पाटीदार और शहनवाज शेख को गिरफ्तार किया था। पुलिस का दावा था कि उनके पास से भारी मात्रा में एमडी ड्रग्स (म्येफेड्रोन) बरामद हुआ है, जो एक प्रतिबंधित और खतरनाक नशीला पदार्थ माना जाता है।
जांच के दौरान दोनों आरोपियों ने कॉन्स्टेबल लखन गुप्ता का नाम लिया, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद लखन गुप्ता को सेवा से निलंबित कर बाद में बर्खास्त कर दिया गया।
इस पूरे मामले ने उस समय काफी सुर्खियां बटोरी थीं और इसे एक बड़ी ड्रग्स बरामदगी के रूप में पेश किया गया था।
फॉरेंसिक जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब जब्त किए गए पदार्थ के नमूने फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए। सबसे पहले इन्हें भोपाल स्थित राज्य फॉरेंसिक लैब में जांचा गया।
Bhopal की लैब रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया कि यह कोई नशीला पदार्थ नहीं है, बल्कि सामान्य रासायनिक पदार्थ यूरिया है।
इसके बाद इसी पदार्थ को दोबारा पुष्टि के लिए हैदराबाद स्थित सेंट्रल लैब में भेजा गया। वहां भी जांच रिपोर्ट में यही निष्कर्ष सामने आया कि यह किसी भी प्रकार का ड्रग नहीं, बल्कि यूरिया ही है।
दोनों रिपोर्टों में एक समान निष्कर्ष आने के बाद पुलिस के दावों पर गंभीर सवाल उठने लगे।
कोर्ट का फैसला: सभी आरोपी बरी
फॉरेंसिक रिपोर्टों को निर्णायक साक्ष्य मानते हुए विशेष अदालत ने लखन गुप्ता सहित तीनों आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि जब्त किया गया पदार्थ ही ड्रग्स साबित नहीं हुआ, इसलिए आरोप टिक नहीं सकते।
इस फैसले के बाद लगभग 16 महीने से चल रहा यह मामला समाप्त हो गया और आरोपियों को बड़ी राहत मिली।
नौकरी से बर्खास्त कॉन्स्टेबल का आरोप
बरी होने के बाद पूर्व कॉन्स्टेबल लखन गुप्ता ने अदालत में गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें एक सुनियोजित साजिश के तहत झूठे ड्रग्स केस में फंसाया गया।
उन्होंने अपने आवेदन में दो आईपीएस अधिकारियों समेत 19 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि पूरी कार्रवाई मनगढ़ंत थी और उन्हें जानबूझकर इस मामले में आरोपी बनाया गया।
कैसे जोड़ा गया नाम, क्या है आरोप
लखन गुप्ता का आरोप है कि पुलिस ने मुखबिर तंत्र के जरिए आरोपियों से उनका नाम कहलवाया, जिसके आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया। बाद में उन्हें थाने ले जाकर पूछताछ की गई और जेल भेज दिया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि गिरफ्तारी के बाद उन्हें नौकरी से भी बर्खास्त कर दिया गया, जिससे उनका जीवन और करियर दोनों प्रभावित हुए।
अदालत में आगे की प्रक्रिया
वकील नितिन पाराशर के अनुसार, विशेष अदालत में इस मामले की अगली सुनवाई तय की गई है। अदालत अब यह तय करेगी कि मामले में आगे जांच होनी चाहिए या नहीं, एफआईआर दर्ज की जाए या अन्य कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता है।
पुलिस जांच पर गंभीर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने Indore पुलिस की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस पदार्थ को पहले करोड़ों की एमडी ड्रग्स बताया गया था, वह दोनों सरकारी लैब—भोपाल और हैदराबाद—की जांच में यूरिया साबित हुआ।
इस खुलासे ने न केवल जांच की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि गलत फॉरेंसिक या प्रारंभिक निष्कर्ष किसी भी व्यक्ति के जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं।
निष्कर्ष
इंदौर का यह बहुचर्चित एमडी ड्रग्स मामला अब पूरी तरह बदल चुका है। जहां शुरुआत में इसे बड़ी ड्रग्स बरामदगी माना गया था, वहीं अब यह साधारण यूरिया साबित हुआ है।
कोर्ट के फैसले ने तीनों आरोपियों को राहत दी है, लेकिन साथ ही यह मामला जांच एजेंसियों की जवाबदेही, साक्ष्य की पुष्टि और न्यायिक प्रक्रिया की सटीकता पर भी महत्वपूर्ण सवाल छोड़ गया है।
