Jain साध्वियों की मौत पर आक्रोश: इंदौर-रतलाम सहित पूरे MP में मौन रैली, हत्या का केस दर्ज करने की मांग तेज
रीवा में दो Jain साध्वियों की सड़क हादसे में हुई मौत के बाद मध्यप्रदेश में व्यापक आक्रोश देखने को मिल रहा है। सोमवार को इंदौर, रतलाम, धार, खंडवा, खरगोन, शाजापुर और शुजालपुर सहित कई जिलों में जैन समाज ने मौन रैली निकालकर विरोध दर्ज कराया। समाजजनों ने दोषियों पर हत्या का मामला दर्ज करने, घटना की उच्च स्तरीय जांच कराने और संतों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रोटोकॉल लागू करने की मांग की।
प्रदेशभर में निकली मौन रैलियां
विभिन्न शहरों में समाज के लोग हाथों में तख्तियां लेकर और काली पट्टी बांधकर सड़कों पर उतरे। मौन जुलूस के दौरान राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे गए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह केवल एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि संत समाज की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है, जिसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
इंदौर में राजवाड़ा से कलेक्टर कार्यालय तक जुलूस
इंदौर में दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के आह्वान पर राजवाड़ा से कलेक्टर कार्यालय तक मौन जुलूस निकाला गया। इस रैली में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे शामिल हुए। समाज ने मांग की कि संतों पर होने वाले अपराधों को विशेष संवेदनशील श्रेणी में रखा जाए और उनकी सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर नीति बनाई जाए।
समाजजनों ने यह भी मांग की कि “संत सुरक्षा समन्वय सेल” (Security Coordination Cell) का गठन किया जाए ताकि विहार के दौरान साधु-संतों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
रतलाम, खंडवा और अन्य जिलों में भी प्रदर्शन
रतलाम में समग्र Jain समाज ने एडीएम को ज्ञापन सौंपकर मांग की कि मामले में हत्या का केस दर्ज किया जाए और संतों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। वहीं खंडवा में समाजजनों ने कलेक्टर को ज्ञापन देकर एसआईटी या न्यायिक जांच की मांग उठाई।
धार जिले की विभिन्न तहसीलों में भी मौन रैलियां निकाली गईं। खरगोन में समाजजन एसडीएम कार्यालय पहुंचे और ज्ञापन सौंपा। शाजापुर और शुजालपुर में भी बड़ी संख्या में लोगों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया।
Jain समाज की प्रमुख मांगें
समाज ने अपनी प्रमुख मांगों में शामिल किया है—
- दोषियों पर हत्या का मामला दर्ज किया जाए
- घटना की उच्च स्तरीय जांच या SIT गठित की जाए
- संत सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किया जाए
- राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति बनाई जाए
- विहाररत साधु-संतों की सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था की जाए
समाज का कहना है कि संत समाज देश की आध्यात्मिक धरोहर है और उनकी सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है।
रीवा सड़क हादसा कैसे हुआ?
यह घटना 20 मई को रीवा कलेक्ट्रेट के सामने हुई थी, जब तीन जैन साध्वियां सड़क किनारे पैदल विहार कर रही थीं। इसी दौरान तेज रफ्तार कार ने उन्हें टक्कर मार दी।
इस हादसे में आर्यिका श्रुतमति माताजी और आर्यिका उपशममति माताजी का निधन हो गया, जबकि एक अन्य साध्वी गंभीर रूप से घायल हो गईं।
घटना के बाद कार चालक मौके से फरार हो गया था, जिसे बाद में पुलिस ने जबलपुर के पास गिरफ्तार कर लिया।
वीडियो फुटेज के बाद बढ़ा आक्रोश
सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद समाज में आक्रोश और बढ़ गया है। कई संगठनों ने इसे सामान्य हादसा नहीं बल्कि संदिग्ध घटना बताते हुए साजिश की आशंका जताई है। इसी आधार पर समाज ने निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है।
निष्कर्ष
रीवा हादसे के बाद Jain समाज का विरोध अब पूरे मध्यप्रदेश में फैल गया है। मौन रैलियों और ज्ञापनों के जरिए समाज ने सरकार से सख्त कार्रवाई और संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। अब सभी की नजर प्रशासन और जांच प्रक्रिया पर टिकी हुई है कि इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
