Indore में जैनत्व बाल संस्कार शिविर का शुभारंभ, 550 से अधिक बच्चे शामिल
संस्कार, अनुशासन और आध्यात्मिक शिक्षा के माध्यम से बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण
Indore । इंदौर के साधना नगर स्थित पंचबालयति जिनालय परिसर में रविवार सुबह भक्ति, उत्साह और संस्कारों का अनुपम दृश्य देखने को मिला। प्रातः 6:30 बजे से ही बच्चों का आगमन प्रारंभ हो गया था और कुछ ही समय में पूरा परिसर बच्चों की उपस्थिति से खचाखच भर गया। सुबह 7:00 बजे तक सैकड़ों बच्चे अपने अभिभावकों के साथ शिविर स्थल पर पहुंच चुके थे। वातावरण में धार्मिक उल्लास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार था, वहीं बच्चों के चेहरों पर नई चीजें सीखने का उत्साह स्पष्ट रूप से झलक रहा था।
Indore धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने जानकारी देते हुए बताया कि 26वें जैनत्व बाल संस्कार शिक्षण शिविर का शुभारंभ 22 मार्च से किया गया है। इस शिविर का उद्देश्य बच्चों और युवाओं में आध्यात्मिक संस्कारों का विकास करना, उन्हें जीवन जीने की कला सिखाना और नैतिक मूल्यों से जोड़ना है। आठ दिवसीय इस शिविर में 6 से 20 वर्ष तक की आयु के 550 से अधिक बच्चे एवं युवा भाग ले रहे हैं।
उन्होंने बताया कि शिविर में आयु वर्ग के अनुसार अलग-अलग कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। इन कक्षाओं के माध्यम से बच्चों को धर्म, संस्कृति, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और व्यक्तित्व विकास की शिक्षा दी जा रही है। साथ ही, लौकिक शिक्षा के माध्यम से उन्हें व्यवहारिक जीवन में आगे बढ़ने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। शिविर का लक्ष्य केवल धार्मिक ज्ञान देना नहीं, बल्कि बच्चों को एक जिम्मेदार और संस्कारित नागरिक बनाना भी है

इस शिविर की एक विशेषता यह है कि इसमें देशभर से आए 17 शास्त्री परीक्षा उत्तीर्ण विद्वान बच्चों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। इनमें पं. रितेश शास्त्री (सनावद), पं. अशोक मांगुलकर (राघौगढ़), पं. सौरभ शास्त्री और पं. गौरव शास्त्री सहित कई विद्वान शामिल हैं, जो अपने अनुभव और ज्ञान से बच्चों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। इनके निर्देशन में बच्चे न केवल धार्मिक सिद्धांतों को समझ रहे हैं, बल्कि आत्मसंयम, अनुशासन और सकारात्मक सोच भी विकसित कर रहे हैं।
शिविर में बड़ों के लिए भी विशेष कक्षाओं का आयोजन किया गया है। प्रौढ़ कक्षा एवं कपल शिविर का संचालन पं. अमन शास्त्री द्वारा किया जा रहा है। इन कक्षाओं में परिवारों को संस्कारयुक्त जीवन जीने की प्रेरणा दी जा रही है, जिससे पारिवारिक वातावरण में भी धार्मिकता और नैतिकता का समावेश हो सके।
Indore कार्यक्रम के प्रमुख संयोजक एवं ट्रस्ट अध्यक्ष विजय बड़जात्या, पं. तेजकुमार गंगवाल और महामंत्री सुशील काला ने बताया कि शिविर प्रतिदिन प्रातः 6:30 बजे से दोपहर 11:45 बजे तक संचालित किया जाएगा। इस दौरान बच्चों के लिए प्रार्थना, ध्यान, शास्त्र अध्ययन और विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। शिविर में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को निःशुल्क किट, धार्मिक पुस्तकें, दूध, चाय-नाश्ता और भोजन की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।
शिविर का शुभारंभ सुरेशजी–सुशीलाजी जैन परिवार द्वारा ध्वजारोहण के साथ हुआ, जबकि जिनेषजी–रूपमजी जैन एवं कैलाशचंदजी वेद परिवार द्वारा विधिवत उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर डॉ. कमल पंचोली ने बच्चों को निःशुल्क धार्मिक पुस्तकें एवं स्टेशनरी वितरित की, जिससे बच्चों में अध्ययन के प्रति रुचि और अधिक बढ़ी।
दूर-दराज से आने वाले बच्चों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए वेदांश स्कूल और आई.एम.आई. कॉलेज द्वारा बसों की व्यवस्था की गई है। इस सुव्यवस्थित प्रबंधन के कारण बड़ी संख्या में बच्चे नियमित रूप से शिविर में भाग ले पा रहे हैं।
इस आयोजन के सफल संचालन में विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों का महत्वपूर्ण योगदान मिल रहा है। अखिल भारतीय दिगंबर जैन युवा फेडरेशन, मुमुक्षु महिला मंडल, यंग जैन प्रोफेशनल्स और दिगंबर जैन सोशल ग्रुप जीनियस का विशेष सहयोग प्राप्त हो रहा है।
उल्लेखनीय है यह संपूर्ण शिविर श्री दिगंबर जैन कुंदकुंद परमागम ट्रस्ट द्वारा साधर्मियों के सहयोग से पूर्णतः निःशुल्क आयोजित किया जा रहा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों में अच्छे संस्कार, अनुशासन, नैतिकता और आध्यात्मिकता का विकास करना है, ताकि वे भविष्य में एक सशक्त और मूल्यनिष्ठ समाज के निर्माण में योगदान दे सकें।
इस प्रकार जैनत्व बाल संस्कार शिविर एक प्रेरणादायक पहल बनकर सामने आया है, जहां बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ जीवन मूल्यों का समुचित मार्गदर्शन मिल रहा है।
