इंदौर हनीट्रैप-2: गिरफ्तारी से पहले श्वेता जैन ने तैयार किया था ‘प्लान-B’, अहम रिकॉर्डिंग और कैमरे अब भी पुलिस की पहुंच से दूर
Indore Honeytrap-2 Case: पुलिस की जांच और कोर्ट में पेश चालान के आधार पर कई सवाल बरकरार, घर से पेन-स्पाई कैमरे और मेमोरी कार्ड मिलने की जानकारी; अन्य कथित पीड़ितों की पहचान अब तक सामने नहीं आई
इंदौर। मध्य प्रदेश के चर्चित हनीट्रैप मामलों में एक बार फिर श्वेता जैन का नाम सुर्खियों में है। इंदौर के कथित हनीट्रैप-2 मामले की जांच में कई ऐसी बातें सामने आई हैं, जिन्होंने पुलिस के सामने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में आरोपी श्वेता जैन को कथित तौर पर पहले से आशंका थी कि वह दोबारा पुलिस की गिरफ्त में आ सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए उसने कथित रूप से एक वैकल्पिक योजना यानी ‘प्लान-B’ तैयार कर रखा था, ताकि गिरफ्तारी होने की स्थिति में उसके खिलाफ महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत आसानी से पुलिस के हाथ न लग सकें।
पुलिस की जांच और कोर्ट में पेश किए गए चालान से जुड़ी जानकारी के अनुसार, मामले की कथित महत्वपूर्ण रिकॉर्डिंग और उन्हें बनाने में इस्तेमाल हुए कुछ उपकरणों तक पुलिस अब तक नहीं पहुंच सकी है। यही वजह है कि जांच में यह सवाल महत्वपूर्ण बना हुआ है कि इस कथित हनीट्रैप नेटवर्क में वास्तव में कितने लोगों को निशाना बनाया गया था।
पहले मामले जैसा ही कथित पैटर्न
जांच में श्वेता जैन पर आरोप है कि हनीट्रैप-2 में भी कथित तौर पर पुराने मामले से मिलता-जुलता तरीका अपनाया गया। हालांकि इस बार वह पहले से अधिक सतर्क बताई जा रही है।
पुलिस कार्रवाई की आशंका को ध्यान में रखते हुए डिजिटल रिकॉर्डिंग और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरते जाने का संदेह जताया गया है। जांच एजेंसियों के लिए ऐसी सामग्री बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि उससे कथित नेटवर्क और अन्य संभावित पीड़ितों के बारे में जानकारी सामने आ सकती है।
आखिर क्या था श्वेता का ‘प्लान-B’?
मामले में सामने आई जानकारी के अनुसार, श्वेता को अपनी गिरफ्तारी की आशंका थी। आरोप है कि इसी कारण उसने ऐसी तैयारी कर रखी थी जिससे पुलिस कार्रवाई होने पर उसके पास से ज्यादा आपत्तिजनक या महत्वपूर्ण डिजिटल सामग्री बरामद न हो।
इस कथित ‘प्लान-B’ का उद्देश्य क्या था और रिकॉर्डिंग या अन्य सामग्री वास्तव में कहां रखी गई, इन सवालों का स्पष्ट जवाब फिलहाल सामने नहीं आया है।
यह भी जांच का विषय है कि कथित रिकॉर्डिंग किसी दूसरे व्यक्ति के पास पहुंचाई गई थी, किसी अन्य स्थान पर रखी गई या उन्हें नष्ट कर दिया गया। इन संभावनाओं की आधिकारिक पुष्टि हुए बिना किसी एक निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
घर से मिले पेन-स्पाई कैमरे और मेमोरी कार्ड
कोर्ट में पेश चालान से जुड़ी जानकारी के मुताबिक पुलिस को श्वेता जैन के घर से पेन कैमरे, स्पाई कैमरे और मेमोरी कार्ड मिले हैं।
हालांकि इन उपकरणों में पुलिस को कथित हनीट्रैप से संबंधित वह बड़ी मात्रा में रिकॉर्डिंग नहीं मिली, जिसकी जांच में अपेक्षा की जा रही थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि कथित तौर पर लोगों की रिकॉर्डिंग की गई थी तो उसका डेटा आखिर कहां गया।
डिजिटल सबूतों की कमी इस मामले की पूरी कड़ी जोड़ने में पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।
सबसे अहम सबूत की तलाश जारी
हनीट्रैप जैसे मामलों में वीडियो, ऑडियो रिकॉर्डिंग, मोबाइल डेटा, मेमोरी कार्ड और कैमरे जांच के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकते हैं। इन्हीं से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि कथित तौर पर किसे निशाना बनाया गया और इसके पीछे क्या उद्देश्य था।
हनीट्रैप-2 में ऐसी अहम रिकॉर्डिंग और उससे जुड़े उपकरणों के नहीं मिलने के कारण कई सवाल अब भी अनसुलझे हैं।
जांच का सबसे महत्वपूर्ण पहलू अब कथित डिजिटल रिकॉर्डिंग तक पहुंचना माना जा रहा है। यदि ऐसी सामग्री बरामद होती है तो मामले में नए नाम या नई जानकारियां सामने आ सकती हैं। हालांकि जब तक पुलिस की ओर से इसकी पुष्टि नहीं होती, संभावित लोगों की पहचान को लेकर किसी तरह का अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।
अब तक केवल एक ठेकेदार का मामला आया सामने
श्वेता जैन और रेशू की गिरफ्तारी के बाद अब तक कथित हनीट्रैप का शिकार होने के संबंध में एक ठेकेदार का मामला ही प्रमुख रूप से सामने आया है।
इसके अलावा अन्य किसी कथित पीड़ित के पुलिस के सामने आने की जानकारी नहीं है। इसी कारण यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कथित नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा था।
अगर अन्य लोग भी निशाना बनाए गए थे तो उन्होंने शिकायत क्यों नहीं की, यह भी जांच से जुड़ा अहम सवाल है। ऐसे मामलों में सामाजिक प्रतिष्ठा, निजी जानकारी सार्वजनिक होने का डर और अन्य कारणों से पीड़ितों के सामने न आने की संभावना हो सकती है, लेकिन इस मामले में किसी व्यक्ति के संबंध में ऐसा दावा आधिकारिक पुष्टि के बिना नहीं किया जा सकता।
अन्य कथित रसूखदार लोगों की पहचान रहस्य
हनीट्रैप-2 की चर्चा के बीच सबसे बड़ा सवाल उन कथित प्रभावशाली लोगों की पहचान को लेकर है, जिन्हें निशाना बनाए जाने की बात कही जा रही है।
फिलहाल पुलिस जांच से ऐसी कोई पुष्ट सूची सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। इसलिए किसी अधिकारी, कारोबारी, राजनेता या अन्य व्यक्ति का नाम इस मामले से जोड़ना तथ्यों की पुष्टि होने से पहले उचित नहीं होगा।
डिजिटल सबूत खोल सकते हैं कई राज
यदि पुलिस कथित रिकॉर्डिंग या अन्य डिजिटल सामग्री तक पहुंचती है तो जांच को नई दिशा मिल सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि रिकॉर्डिंग कब और कहां बनाई गई, उसमें कौन लोग मौजूद थे और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था।
फिलहाल मामले में कई महत्वपूर्ण कड़ियां जुड़ना बाकी हैं। पुलिस के हाथ लगे कैमरे और मेमोरी कार्ड जांच का हिस्सा हैं, लेकिन कथित सबसे महत्वपूर्ण रिकॉर्डिंग का नहीं मिलना अब भी बड़ा सवाल बना हुआ है।
जांच पूरी होने पर साफ होगी पूरी तस्वीर
हनीट्रैप-2 मामले में श्वेता जैन और रेशू से जुड़ी जांच आगे बढ़ने के साथ नए तथ्य सामने आ सकते हैं। अभी तक उपलब्ध जानकारी मुख्य रूप से पुलिस जांच, बरामद सामग्री और कोर्ट में पेश चालान से जुड़े तथ्यों पर आधारित है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि कथित रिकॉर्डिंग कहां हैं और यदि अन्य लोग भी इस मामले में पीड़ित थे तो उनकी पहचान क्या है। इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने और ठोस डिजिटल साक्ष्य मिलने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
