Indore के होलकर स्टेडियम में जीरो वेस्ट मॉडल की मिसाल, 30 हजार दर्शकों के बाद भी चमका परिसर
Indore । देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में लगातार पहचान बनाने वाले इंदौर ने एक बार फिर स्वच्छता के क्षेत्र में अपनी कार्यशैली का उदाहरण पेश किया। रविवार रात होलकर स्टेडियम में भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेले गए अंतरराष्ट्रीय टी-20 मुकाबले में करीब 30 हजार दर्शक पहुंचे। इतने बड़े आयोजन के बाद भी स्टेडियम परिसर और दर्शक दीर्घाओं की सफाई समय रहते पूरी कर ली गई। यह सब मध्य प्रदेश क्रिकेट संगठन (एमपीसीए) की ओर से अपनाए गए ‘जीरो वेस्ट’ मॉडल के तहत संभव हुआ।
जीरो वेस्ट थीम पर हुआ आयोजन
अंतरराष्ट्रीय मुकाबले के दौरान एमपीसीए के साथ सृष्टि फाउंडेशन ने स्वच्छता व्यवस्था संभाली। सृष्टि फाउंडेशन के श्रीगोपाल जगताप के अनुसार, जब मैदान पर खिलाड़ी चौके-छक्के लगा रहे थे, तब स्वच्छता कर्मी स्टेडियम परिसर में लगातार सफाई कर रहे थे। मैच की दोनों पारियों के बीच मिलने वाले ब्रेक के दौरान दर्शकों द्वारा खाए गए स्नैक्स और भोजन से निकलने वाले कचरे को तत्काल एकत्र किया गया। मैच समाप्त होते ही दर्शक दीर्घाओं की सफाई भी कर दी गई।
2700 किलो से अधिक कचरे का प्रबंधन
मैच के दौरान कचरे के निपटान के लिए ‘फोर-वे सेग्रीगेशन’ व्यवस्था अपनाई गई। इसके तहत कचरे को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर उसका उचित प्रबंधन किया गया। स्टेडियम से 300 किलो से अधिक गीला कचरा एकत्र हुआ, जिससे जैविक खाद तैयार की जाएगी। प्रक्रिया के शुरुआती चरण में कचरे में बायोकल्चर मिलाया गया।
वहीं, खाने के गत्ते, पेपर कप और प्लास्टिक की बोतलों सहित लगभग 2400 किलो सूखा कचरा भी एकत्र किया गया। इसे पुनर्चक्रण के लिए भेजा जा रहा है। कागज के गत्तों और कपों से लुगदी बनाकर नया कागज तैयार किया जाएगा, जबकि प्लास्टिक की बोतलों और शीतल पेय की कैन्स से दोबारा उपयोग होने वाले उत्पाद बनाए जाएंगे।
पुराने फ्लेक्स से बनेंगी एक हजार थैलियां
पर्यावरण संरक्षण की पहल के तहत स्टेडियम में विज्ञापन के लिए लगाए गए फ्लेक्स को भी सुरक्षित रखा गया। इनसे महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं करीब एक हजार उपयोगी थैलियां तैयार करेंगी। इसके बदले महिलाओं को भुगतान भी किया जाएगा। इस तरह आयोजन से निकले कचरे को संसाधन में बदलने के साथ रोजगार के अवसर पैदा करने की दिशा में भी कदम उठाया गया।
होलकर स्टेडियम में अपनाई गई यह व्यवस्था दिखाती है कि बड़े खेल आयोजनों में भी कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन, पुनर्चक्रण और समय पर सफाई संभव है। इंदौर का यह प्रयास अन्य शहरों के लिए भी एक उपयोगी उदाहरण बन सकता है।
