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इंदौर में दूषित भूजल पर बड़ा विवाद: CGWB रिपोर्ट के बाद Umang Singhar ने सरकार को घेरा, मुख्यमंत्री से तत्काल कार्रवाई की मांग

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Published On: 22 June 2026
इंदौर में दूषित भूजल पर बड़ा विवाद: CGWB रिपोर्ट के बाद Umang Singhar ने सरकार को घेरा, मुख्यमंत्री से तत्काल कार्रवाई की मांग

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इंदौर में दूषित भूजल पर बड़ा विवाद: CGWB रिपोर्ट के बाद Umang Singhar ने सरकार को घेरा, मुख्यमंत्री से तत्काल कार्रवाई की मांग

मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में एक बार फिर दूषित भूजल (Groundwater Contamination) का मुद्दा गंभीर बहस का विषय बन गया है। केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) की एक रिपोर्ट के हवाले से विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष Umang Singhar  ने राज्य सरकार पर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस मामले को जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर संकट बताते हुए मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप और ठोस कार्रवाई की मांग की है।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब कुछ समय पहले ही इंदौर में दूषित पेयजल के कारण स्वास्थ्य संकट की स्थिति बन चुकी थी। अब एक बार फिर नई रिपोर्ट ने शहर की जल गुणवत्ता और प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

CGWB रिपोर्ट में क्या सामने आया?

केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) की रिपोर्ट में इंदौर के कई क्षेत्रों के भूजल में प्रदूषण के संकेत मिलने की बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार, शहर के कुछ हिस्सों से लिए गए जल नमूनों में सीवरेज मिश्रण के प्रभाव पाए गए हैं।

रिपोर्ट में विशेष रूप से भागीरथपुरा और महावीर नगर सहित कुछ इलाकों का उल्लेख किया गया है, जहां जल नमूनों में फीकल कोलीफॉर्म (Faecal Coliform) बैक्टीरिया की उपस्थिति दर्ज की गई है। यह बैक्टीरिया मलजनित प्रदूषण का स्पष्ट संकेत माना जाता है और यह पानी को पीने योग्य नहीं रहने देता।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे बैक्टीरिया की मौजूदगी से जलजनित बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। इनमें डायरिया, टाइफाइड, हैजा और अन्य गंभीर संक्रमण शामिल हैं, जो बड़े पैमाने पर लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।

Umang Singhar का सरकार पर तीखा हमला

उमंग सिंघार ने CGWB रिपोर्ट का हवाला देते हुए राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इंदौर, जिसे देश का सबसे स्वच्छ शहर बताया जाता है, वहीं भूजल की ऐसी स्थिति सामने आना चिंताजनक है और यह विकास मॉडल की वास्तविकता को उजागर करता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और संबंधित विभागों की लापरवाही के कारण नागरिकों को दूषित पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। सिंघार के अनुसार, यह केवल तकनीकी समस्या नहीं बल्कि सीधा जनस्वास्थ्य से जुड़ा हुआ गंभीर मुद्दा है।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार शहर की उपलब्धियों और स्वच्छता रैंकिंग के प्रचार में अधिक ध्यान देती है, जबकि जमीनी स्तर पर बुनियादी सुविधाओं की स्थिति कमजोर बनी हुई है।

मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले में तुरंत संज्ञान लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह केवल जल प्रदूषण का मुद्दा नहीं, बल्कि लाखों नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ा गंभीर प्रश्न है।

उन्होंने सरकार से मांग की है कि:

  • प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत सुरक्षित पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए
  • पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए
  • जिम्मेदार विभागों और अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए
  • भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए स्थायी समाधान लागू किया जाए

सिंघार ने यह भी कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

नर्मदा जल आपूर्ति नेटवर्क पर भी सवाल

CGWB रिपोर्ट में नर्मदा जल आपूर्ति प्रणाली को लेकर भी संभावित खतरे की आशंका जताई गई है। यह पहलू इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इंदौर की प्रमुख पेयजल आपूर्ति व्यवस्था नर्मदा परियोजना पर ही आधारित है।

इस चेतावनी के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या शहर की जल आपूर्ति प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित है या इसमें किसी स्तर पर तकनीकी और रखरखाव की खामियां मौजूद हैं।

इस स्थिति ने न केवल प्रशासन बल्कि जल प्रबंधन प्रणाली की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

यह पहली बार नहीं है जब इंदौर में दूषित जल को लेकर चिंता जताई गई है। इससे पहले भी भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के कारण बड़े पैमाने पर बीमारियों के फैलने की घटनाएं सामने आई थीं।

उस समय भी स्थानीय स्तर पर प्रशासन की भूमिका और जल आपूर्ति व्यवस्था पर सवाल उठे थे। अब नई रिपोर्ट के बाद यह मुद्दा एक बार फिर से चर्चा में आ गया है और शहर की स्वच्छता छवि तथा जमीनी हकीकत के बीच अंतर को लेकर बहस तेज हो गई है।

प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल

इस पूरे मामले ने नगर निगम, जल संसाधन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आलोचकों का कहना है कि यदि समय रहते नियमित जांच और सुधारात्मक कदम उठाए गए होते, तो इस तरह की स्थिति से बचा जा सकता था।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस रिपोर्ट के बाद क्या कदम उठाती है और क्या प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाता है या नहीं।

जनस्वास्थ्य का गंभीर मुद्दा

विशेषज्ञों का मानना है कि भूजल प्रदूषण केवल पर्यावरणीय समस्या नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा है। यदि समय रहते इसे नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह बड़े पैमाने पर बीमारियों और स्वास्थ्य संकट को जन्म दे सकता है।

इसी कारण इस मुद्दे को लेकर चिंता और बढ़ गई है और राजनीतिक हलकों में भी यह विषय तेजी से चर्चा में आ गया है।

निष्कर्ष

इंदौर में भूजल प्रदूषण को लेकर सामने आई CGWB रिपोर्ट ने एक बार फिर शहर की जल सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उमंग सिंघार द्वारा उठाए गए मुद्दों के बाद सरकार पर दबाव बढ़ गया है कि वह इस स्थिति पर तत्काल और ठोस कार्रवाई करे।

अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इस रिपोर्ट को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या वास्तव में प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाते हैं या नहीं।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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