Indore फुटपाथ अतिक्रमण का गंभीर मुद्दा सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा फुटपाथ को मौलिक अधिकार मानने के बावजूद शहर में फुटपाथों पर अवैध पार्किंग और अतिक्रमण का कब्जा है। नईदुनिया के ‘यह फुटपाथ हमारा है’ अभियान में जानिए विशेषज्ञों और अधिकारियों की राय।
Indore फुटपाथ अतिक्रमण: जनता को नहीं मिल रहा मौलिक अधिकार वाला फुटपाथ, अवैध पार्किंग और कब्जों से बढ़ी परेशानी
Indore। सुप्रीम कोर्ट ने सड़क किनारे बने फुटपाथ को आम नागरिकों का मौलिक अधिकार माना है। इसके बावजूद इंदौर सहित मालवा-निमाड़ अंचल के अधिकांश शहरों में पैदल चलने वालों के लिए बने फुटपाथ या तो अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुके हैं या फिर वहां अवैध पार्किंग का कब्जा है। नतीजतन नागरिकों को अपनी जान जोखिम में डालकर सड़क पर चलना पड़ता है।
इंदौर शहर में कई प्रमुख मार्गों पर फुटपाथों पर दुकानदारों द्वारा सामान रखा जा रहा है, जबकि कई स्थानों पर दोपहिया और चारपहिया वाहन खड़े कर दिए जाते हैं। इससे पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ का उपयोग लगभग असंभव हो गया है।
नईदुनिया ने इस गंभीर जनसमस्या को लेकर “यह फुटपाथ हमारा है” अभियान शुरू किया है। अभियान के माध्यम से जनता के फुटपाथ अधिकारों की आवाज उठाई जाएगी और जिम्मेदार विभागों से जवाब मांगा जाएगा कि आखिर वर्षों से फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त क्यों नहीं किया जा सका।
ट्रैफिक पुलिस और नगर निगम की जिम्मेदारी पर उठे सवाल
Indore फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त रखने की जिम्मेदारी ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय निकायों की होती है। लेकिन पिछले दो दशकों में दोनों विभाग इस दिशा में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पाए हैं।
शहर के कई व्यस्त बाजारों, मुख्य सड़कों और व्यावसायिक क्षेत्रों में फुटपाथों पर खुलेआम अतिक्रमण दिखाई देता है। कई स्थानों पर तो फुटपाथ पूरी तरह गायब हो चुके हैं।
सड़क पर चलने को मजबूर पैदल यात्री
फुटपाथ उपलब्ध नहीं होने के कारण नागरिक सड़क पर चलने को मजबूर हैं। इससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि पैदल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए फुटपाथों का अतिक्रमण मुक्त होना बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञ ने सुझाए कड़े कदम
एसजीएसआईटीएस के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर डॉ. संदीप नारुलकर ने कहा कि सड़क निर्माण के दौरान नियमानुसार फुटपाथ बनाना अनिवार्य होना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि फुटपाथ पर वाहन पार्क करने वालों और अतिक्रमण करने वालों पर भारी आर्थिक दंड लगाया जाए।
उनके अनुसार यदि फुटपाथ पर खड़े वाहनों और अतिक्रमणकारी सामान को जब्त किया जाए तो लोगों में कानून का डर पैदा होगा और फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त रखा जा सकेगा।
नियमित कार्रवाई की जरूरत
सेवानिवृत्त अतिरिक्त डीसीपी ट्रैफिक अरविंद तिवारी का कहना है कि फुटपाथ पैदल चलने वालों के लिए बनाए जाते हैं। दुकानदारों और वाहन चालकों द्वारा निजी स्वार्थ के कारण उनका उपयोग किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ट्रैफिक पुलिस वाहनों पर कार्रवाई करती है, लेकिन सड़क और फुटपाथ पर सामान रखकर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ नगर निगम को नियमित कार्रवाई करनी चाहिए। केवल अभियान चलाने के बजाय इसे सतत प्रक्रिया बनाना होगा।
सुप्रीम कोर्ट की भावना के अनुरूप हो व्यवस्था
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शहरों को वास्तव में स्मार्ट और सुरक्षित बनाना है तो पैदल यात्रियों के अधिकारों की रक्षा करना जरूरी होगा। फुटपाथ केवल कंक्रीट का ढांचा नहीं बल्कि नागरिकों की सुरक्षित आवाजाही का माध्यम हैं।
