इंदौर में फर्जी डिग्री से शिक्षक नियुक्ति का मामला: करीब 50 शिक्षकों पर FIR की तैयारी, वेतन का हिसाब जुटा रहा विभाग
इंदौर। जिले के सांवेर विकासखंड में कथित फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर सरकारी शिक्षक की नौकरी हासिल करने का मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, करीब 50 शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की विभागीय प्रक्रिया शुरू की गई है। जिला शिक्षा अधिकारी ने संबंधित संकुल प्राचार्यों और विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कुछ रिपोर्टों में संबंधित शिक्षकों की संख्या 51 बताई गई है। फिलहाल एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश और उसकी तैयारी की जानकारी सामने आई है।
वर्ष 2006-07 की भर्ती से जुड़ा मामला
प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, मामला वर्ष 2006-07 की संविदा शाला शिक्षक भर्ती से संबंधित है। आरोप है कि नियुक्ति के समय कुछ अभ्यर्थियों ने D.Ed और B.Ed की ऐसी डिग्रियाँ तथा अंकसूचियाँ प्रस्तुत कीं, जिनकी प्रामाणिकता पर बाद में सवाल उठे।
इनमें से कई शिक्षक लगभग दो दशक से सरकारी विद्यालयों में कार्यरत बताए गए हैं। कुछ को इस दौरान पदोन्नति मिलने की जानकारी भी सामने आई है। दस्तावेजों में कथित गड़बड़ियों का मामला अब नियुक्ति और सेवा रिकॉर्ड की जांच तक पहुँच गया है।
शिकायत के बाद कराया गया सत्यापन
रिपोर्टों में जिला शिक्षा अधिकारी शौर्य मल्होत्रा के हवाले से बताया गया है कि वर्ष 2021 में शिकायत मिलने के बाद नियुक्ति के समय प्रस्तुत दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया। संबंधित संस्थाओं से प्राप्त जानकारी के आधार पर आगे जांच की गई।
माध्यमिक शिक्षा मंडल से सत्यापन संबंधी जानकारी जून 2022 से अप्रैल 2023 के बीच मिलने की बात कही गई है। इसके बाद चार प्राचार्यों की समिति गठित की गई, जिसने मई 2024 में अपनी रिपोर्ट विभाग को सौंपी। इस प्रक्रिया के दौरान कई शिक्षकों की अंकसूचियों में अनियमितताएँ सामने आने का दावा किया गया है।
अंकसूचियों और रोल नंबर में मिली गड़बड़ियाँ
जांच संबंधी प्रकाशित विवरण के अनुसार, कुछ अंकसूचियाँ संबंधित बोर्ड के रिकॉर्ड में जारी हुई नहीं मिलीं। कुछ मामलों में प्रस्तुत रोल नंबर किसी दूसरे परीक्षार्थी के नाम से संबंधित पाए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
ये तथ्य संबंधित दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर गंभीर सवाल उठाते हैं। हालांकि, प्रत्येक शिक्षक की भूमिका और उसके खिलाफ आरोपों का निर्धारण संबंधित रिकॉर्ड तथा आगे की कार्रवाई के आधार पर होगा। सभी मामलों को एक जैसी स्थिति में मानने के बजाय व्यक्तिगत दस्तावेजों का सत्यापन महत्वपूर्ण रहेगा।
करीब 100 करोड़ रुपये का आँकड़ा अनुमान
विभाग संबंधित शिक्षकों की नियुक्ति की तारीख, सेवा अवधि, पदोन्नति और प्राप्त वेतन का विवरण जुटा रहा है। कुछ रिपोर्टों में संभावित वसूली की राशि करीब 100 करोड़ रुपये तक पहुँचने का अनुमान बताया गया है।
इस आँकड़े को अभी अंतिम और सत्यापित सरकारी नुकसान नहीं माना जा सकता। कुल राशि प्रत्येक शिक्षक के सेवा तथा भुगतान रिकॉर्ड की गणना के बाद स्पष्ट होगी। कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति और वेतन भुगतान से जुड़े निष्कर्षों के अनुसार ही आगे की कार्रवाई तय होगी।
पुराने निर्देशों के बाद कार्रवाई में देरी पर सवाल
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जांच रिपोर्ट आने के बाद सितंबर 2024 में संबंधित संकुल प्राचार्यों को एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद प्रकरण दर्ज नहीं होने की बात सामने आई है। अब दोबारा कार्रवाई के निर्देश दिए जाने से पहले की देरी पर भी सवाल उठ रहे हैं।
अन्य शिक्षकों के रिकॉर्ड की भी जांच
प्रकाशित जानकारी के मुताबिक, लोकायुक्त ने कुल 74 शिक्षकों का रिकॉर्ड मांगा है। इनमें 51 शिक्षकों के दस्तावेजों में गड़बड़ी सामने आने और 23 अन्य के दस्तावेजों की जांच जारी होने की बात कही गई है। आगे एफआईआर की स्थिति, जांच के निष्कर्ष और वेतन की अंतिम गणना से मामले की तस्वीर स्पष्ट होगी।
