Indore फर्जी नामांतरण मामला: 354 संपत्तियों की जांच पूरी, दो कर्मचारी निलंबित और तीन की सेवा समाप्त
Indore । इंदौर नगर निगम के राजस्व विभाग में सामने आए फर्जी नामांतरण के मामले में तीन सदस्यीय जांच कमेटी ने अपनी जांच पूरी कर ली है। जांच में 354 संपत्तियों के नामांतरण में अनियमितता सामने आने के बाद नगर निगम ने दोषी पाए गए कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। मामले में नगर निगम के दो कर्मचारियों को निलंबित किया गया है, जबकि आउटसोर्स व्यवस्था के तहत कार्यरत तीन मस्टर कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि फर्जीवाड़े में नगर निगम के दो कर्मचारियों और आउटसोर्स कंपनी के तीन कर्मचारियों की भूमिका रही। इसके अलावा जांच में कुछ अन्य नाम भी सामने आए हैं, लेकिन फिलहाल उनकी भूमिका की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
दो कर्मचारियों को किया गया निलंबित
तीन सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने दोषी पाए गए कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए।
जोन 10, वार्ड 39 में पदस्थ बिल कलेक्टर रियाज अंसारी और नगर निगम मुख्यालय के राजस्व विभाग में कार्यरत संजय यादव को निलंबित कर दिया गया है।
दोनों कर्मचारियों पर फर्जी नामांतरण से जुड़े रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी और अनियमित प्रक्रिया में भूमिका निभाने का आरोप है। जांच रिपोर्ट के आधार पर नगर निगम ने इनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है।
तीन मस्टर कर्मचारियों की सेवा समाप्त
मामले में तीन मस्टर कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की गई है। नगर निगम ने सौरभ तिवारी, संतोष मालवीय और अजय सोलंकी की सेवाएं समाप्त कर दी हैं।
सौरभ तिवारी जोन 13 में बिल कलेक्टर के पद पर कार्यरत थे। वहीं संतोष मालवीय वर्तमान में रिमूवल विभाग में पदस्थ थे। तीसरे कर्मचारी अजय सोलंकी जोन 20 में बिल कलेक्टर के रूप में कार्यरत थे।
जांच कमेटी की रिपोर्ट में इन कर्मचारियों की भूमिका सामने आने के बाद नगर निगम ने सेवा समाप्ति का निर्णय लिया।
रिकॉर्ड में बड़े स्तर पर छेड़छाड़
जांच में नगर निगम के संपत्ति संबंधी रिकॉर्ड में बड़े स्तर पर छेड़छाड़ किए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना कई संपत्तियों के नामांतरण से संबंधित रिकॉर्ड में बदलाव किए गए।
नामांतरण किसी संपत्ति के स्वामित्व या अधिकार में बदलाव के बाद सरकारी रिकॉर्ड में उसे दर्ज करने की महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। ऐसे रिकॉर्ड में अनधिकृत बदलाव होने से संपत्ति विवाद पैदा हो सकते हैं और वास्तविक मालिकों के अधिकार भी प्रभावित हो सकते हैं।
354 संपत्तियों से जुड़े मामले ने नगर निगम के राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली और रिकॉर्ड की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
नगर निगम दर्ज कराएगा आपराधिक प्रकरण
मामले में विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ नगर निगम ने आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने का भी निर्णय लिया है। इसके लिए संबंधित अधिकारियों द्वारा आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
आपराधिक जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश होगी कि फर्जी नामांतरण किस तरीके से किए गए, इसमें किन लोगों की भूमिका थी और क्या इस प्रक्रिया से किसी व्यक्ति को आर्थिक या अन्य लाभ पहुंचाया गया।
यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
सहायक राजस्व अधिकारी को नोटिस
फर्जी नामांतरण मामले में नगर निगम ने एक सहायक राजस्व अधिकारी को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है। अधिकारी से मामले में उनकी भूमिका और निगरानी व्यवस्था को लेकर जवाब मांगा गया है।
नगर निगम अब अधिकारी के जवाब और उपलब्ध रिकॉर्ड का परीक्षण करेगा। इसके बाद आवश्यकता के अनुसार आगे की विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
कुछ अन्य नाम भी जांच के दायरे में
जांच के दौरान कुछ अन्य लोगों के नाम भी सामने आने की जानकारी मिली है। हालांकि, नगर निगम ने अभी इन लोगों की भूमिका की पुष्टि नहीं की है।
ऐसे में संबंधित रिकॉर्ड और दस्तावेजों की दोबारा जांच की जा सकती है। यदि आगे की जांच में किसी अन्य कर्मचारी या व्यक्ति की संलिप्तता प्रमाणित होती है, तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई संभव है।
संपत्ति रिकॉर्ड की सुरक्षा पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने नगर निगम के संपत्ति और राजस्व रिकॉर्ड की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। संपत्ति से जुड़े दस्तावेज बेहद संवेदनशील होते हैं। इनमें किसी भी तरह का गलत बदलाव भविष्य में कानूनी विवाद का कारण बन सकता है।
मामले के सामने आने के बाद नगर निगम की ओर से रिकॉर्ड सत्यापन, डिजिटल प्रक्रिया और अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत महसूस की जा रही है।
आगे क्या होगा?
अब इस मामले में विभागीय कार्रवाई के बाद आपराधिक जांच महत्वपूर्ण होगी। पुलिस या संबंधित जांच एजेंसी को यह पता लगाना होगा कि कथित फर्जीवाड़े की पूरी प्रक्रिया कैसे संचालित हुई और इसमें कितने लोग शामिल थे।
साथ ही 354 संपत्तियों के रिकॉर्ड की दोबारा जांच कर यह सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा कि वास्तविक संपत्ति मालिकों के अधिकार सुरक्षित रहें और गलत तरीके से किए गए किसी भी नामांतरण को नियमानुसार सुधारा जा सके।
फिलहाल नगर निगम ने पांच कर्मचारियों पर कार्रवाई कर दी है। वहीं, सहायक राजस्व अधिकारी से जवाब मांगा गया है और कुछ अन्य संदिग्ध नाम भी जांच के दायरे में हैं। ऐसे में इंदौर का 354 संपत्तियों वाला फर्जी नामांतरण मामला अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और आगे की जांच में और भी खुलासे हो सकते हैं।
