Indore में फर्जी मार्कशीट से 30 साल तक पुलिस की नौकरी, ASI कौशलेंद्र सिंह चौहान पर FIR; जांच में नहीं मिला 10वीं का रिकॉर्ड
Indore Fake Marksheet Case: इंदौर में पुलिस विभाग से जुड़ा फर्जी दस्तावेज का मामला सामने आया है। पुलिस रेडियो प्रशिक्षण स्कूल में पदस्थ सहायक उपनिरीक्षक (ASI) कौशलेंद्र सिंह चौहान पर आरोप है कि उन्होंने कथित तौर पर फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज के आधार पर पुलिस विभाग में नौकरी हासिल की और करीब तीन दशक तक सेवा में बने रहे। शिकायत के बाद हुई जांच में उनकी 10वीं की मार्कशीट का रिकॉर्ड माध्यमिक शिक्षा मंडल में नहीं मिला। जांच रिपोर्ट के आधार पर अब मल्हारगंज थाने में धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में FIR दर्ज की गई है।
शिकायत के बाद खुला करीब 30 साल पुराना मामला
जानकारी के अनुसार, पुलिस रेडियो प्रशिक्षण स्कूल, इंदौर में पदस्थ ASI कौशलेंद्र सिंह चौहान के खिलाफ कुछ समय पहले शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत में उनकी शैक्षणिक योग्यता और नौकरी के लिए प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों को लेकर सवाल उठाए गए थे। मामला सामने आने के बाद विभाग ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कराई।
जांच आगे बढ़ने पर अधिकारियों ने उनके शैक्षणिक रिकॉर्ड की पड़ताल की। इसी दौरान 10वीं कक्षा की मार्कशीट को लेकर महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया। जांच में संबंधित रिकॉर्ड माध्यमिक शिक्षा मंडल में उपलब्ध नहीं पाया गया। इसके बाद उनके द्वारा नौकरी के समय प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों की वैधता पर सवाल खड़े हो गए।
अनुकंपा नियुक्ति से जुड़ा है मामला
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, कौशलेंद्र सिंह चौहान को पुलिस विभाग में अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। अनुकंपा नियुक्ति के दौरान उम्मीदवार को अपनी पात्रता साबित करने के लिए शैक्षणिक प्रमाण-पत्र समेत आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं।
आरोप है कि चौहान ने नियुक्ति प्राप्त करने के लिए कथित तौर पर फर्जी शैक्षणिक रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया। हालांकि, इस पूरे मामले में अंतिम स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
जांच अधिकारियों ने यह पता लगाने का प्रयास किया कि नियुक्ति के समय कौन-कौन से दस्तावेज विभाग के सामने प्रस्तुत किए गए थे और उनकी सत्यता किस स्तर पर जांची गई थी। लगभग 30 वर्षों तक सेवा में रहने के बाद मामला सामने आने से विभागीय सत्यापन प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं।
माध्यमिक शिक्षा मंडल में नहीं मिला रिकॉर्ड
जांच का सबसे अहम बिंदु 10वीं की मार्कशीट से जुड़ा बताया जा रहा है। अधिकारियों ने संबंधित शैक्षणिक रिकॉर्ड की पुष्टि के लिए माध्यमिक शिक्षा मंडल से जानकारी प्राप्त की। जांच में कथित तौर पर चौहान की 10वीं की मार्कशीट का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।
रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के बाद जांच टीम ने इसे गंभीरता से लिया। इसके आधार पर तैयार की गई जांच रिपोर्ट पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी गई। रिपोर्ट के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
पहले किया गया था निलंबित
शिकायत सामने आने के बाद कौशलेंद्र सिंह चौहान को विभाग की ओर से निलंबित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। निलंबन के बाद उनके खिलाफ विभागीय स्तर पर जांच जारी रही। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट के आधार पर आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने की कार्रवाई की गई।
पुलिस रेडियो प्रशिक्षण स्कूल में पदस्थ अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई से विभाग में भी हलचल है। मामला केवल एक कर्मचारी की नियुक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है कि नौकरी के समय प्रस्तुत किए गए शैक्षणिक दस्तावेजों का सत्यापन किस तरह किया गया था।
मल्हारगंज थाने में दर्ज हुई FIR
जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस अधीक्षक (रेडियो) चंद्रशेखर चंद्रावत ने मल्हारगंज थाने को पत्र भेजकर मामला दर्ज करने के निर्देश दिए। इसके बाद गुरुवार को ASI कौशलेंद्र सिंह चौहान के खिलाफ धोखाधड़ी और अन्य संबंधित धाराओं में FIR दर्ज की गई।
अब पुलिस मामले की विस्तृत जांच करेगी। इसमें यह पता लगाया जाएगा कि कथित फर्जी मार्कशीट कहां से तैयार हुई, इसे नौकरी के लिए किस तरह इस्तेमाल किया गया और नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान इसकी जांच क्यों नहीं हो सकी।
30 साल तक विभाग को नहीं लगी भनक
इस मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस शैक्षणिक दस्तावेज के आधार पर नियुक्ति का आरोप है, उसकी कथित फर्जीवाड़े की जानकारी लगभग 30 वर्षों तक सामने नहीं आई। इतने लंबे समय तक पुलिस विभाग में सेवा करने के बाद शिकायत के माध्यम से मामला सामने आया।
अब जांच एजेंसियों के सामने यह भी चुनौती होगी कि नियुक्ति के समय रिकॉर्ड की जांच करने वाले अधिकारियों की भूमिका क्या थी और क्या उस समय दस्तावेजों का सत्यापन किया गया था।
आगे हो सकती है और कार्रवाई
FIR दर्ज होने के बाद पुलिस दस्तावेजों की जांच, संबंधित विभागों से रिकॉर्ड प्राप्त करने और नियुक्ति से जुड़े पुराने दस्तावेजों को खंगालने की कार्रवाई कर सकती है। पुलिस यह भी जांचेगी कि मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।
फिलहाल ASI कौशलेंद्र सिंह चौहान के खिलाफ लगाए गए आरोप जांच के दायरे में हैं। FIR दर्ज होना आरोपों की पुष्टि नहीं माना जाता। मामले में पुलिस की जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्रस्तुत दस्तावेज वास्तव में फर्जी थे और नियुक्ति किस आधार पर हासिल की गई थी।
