Indore में फर्जी IAS अफसर गिरफ्तार: किराए के मकान पर लगाई ‘जिला कलेक्टर’ की नेमप्लेट, होटल में बिल देने के लिए बताया PA आएगा
अहमदाबाद का रहने वाला है आरोपी, पूछताछ में नहीं दे सका IAS अधिकारी होने का कोई प्रमाण; घर की तलाशी में मिली फर्जी पहचान से जुड़ी सामग्री
Indore , मध्य प्रदेश। इंदौर में पुलिस ने एक ऐसे युवक को गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर खुद को IAS अधिकारी और इंदौर का जिला कलेक्टर बताकर लोगों के सामने अपनी फर्जी पहचान बना रहा था। आरोपी ने अपनी पहचान को विश्वसनीय दिखाने के लिए किराए के मकान के बाहर बाकायदा ‘IAS राज सोनी, जिला कलेक्टर’ लिखी नेमप्लेट लगा रखी थी।
पुलिस के अनुसार आरोपी की पहचान हिमांशु पांचाल (28) के रूप में हुई है। वह मूल रूप से गुजरात के अहमदाबाद स्थित साबरमती का रहने वाला है। बताया जा रहा है कि वह करीब एक महीने पहले इंदौर आया था और ओमैक्स सिटी-1 स्थित शुभ आंगन प्रीमियम कॉलोनी के मकान नंबर 1565-A में किराए पर रह रहा था।
होटल में खाना खाने के बाद खुला मामला
मामला उस समय सामने आया जब आरोपी इंदौर के एक होटल में खाना खाने पहुंचा। खाना खाने के बाद जब होटल प्रबंधन ने बिल का भुगतान करने को कहा तो उसने तत्काल पैसे उपलब्ध नहीं होने की बात कही।
इसके बाद आरोपी ने होटल की सर्विस बुक में ‘राज सोनी’ नाम दर्ज किया। उसने होटल कर्मचारियों से कथित तौर पर कहा कि उसका PA करीब दो घंटे में पहुंच जाएगा और वही होटल का बिल चुका देगा।
आरोपी के व्यवहार और उसके दावे पर होटल प्रबंधन को संदेह हुआ। इसके बाद मामले की सूचना पुलिस को दी गई।
पूछताछ में IAS होने का प्रमाण नहीं दे सका
सूचना मिलने के बाद पुलिस ने युवक से पूछताछ शुरू की। पूछताछ के दौरान उसने खुद को IAS अधिकारी और इंदौर का जिला कलेक्टर बताया।
पुलिस ने जब उससे उसकी पोस्टिंग, पद और अधिकारी के रूप में पहचान से संबंधित जानकारी मांगी तो वह संतोषजनक प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद पुलिस ने उसके दावों की जांच शुरू की।
जांच आगे बढ़ने पर उसकी वास्तविक पहचान हिमांशु पांचाल के रूप में सामने आई। पुलिस को संदेह है कि उसने लोगों के बीच प्रभाव बनाने के लिए IAS अधिकारी और जिला कलेक्टर होने की फर्जी पहचान तैयार की थी।
घर के बाहर लगी थी ‘IAS राज सोनी’ की नेमप्लेट
पुलिस जब आरोपी के किराए के मकान पर पहुंची तो वहां उसकी कथित फर्जी पहचान से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए।
मकान के बाहर काले रंग की एक नेमप्लेट लगी थी, जिस पर ‘IAS राज सोनी, जिला कलेक्टर’ लिखा हुआ था। इससे यह संकेत मिला कि आरोपी केवल मौखिक रूप से ही खुद को अधिकारी नहीं बताता था, बल्कि अपनी पहचान को आधिकारिक दिखाने के लिए घर के बाहर भी इसका प्रदर्शन कर रहा था।
पुलिस के अनुसार आरोपी ने यह नेमप्लेट करीब 15 दिन पहले लगाई थी।
घर के अंदर भी बनाई थी अधिकारी जैसी छवि
पुलिस को मकान के अंदर भी ऐसा सामान मिला, जिससे आरोपी द्वारा अधिकारी जैसी छवि बनाए जाने की बात सामने आई।
कमरे में ‘सत्यमेव जयते’ लिखा हुआ फोटो फ्रेम भी रखा था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने यह पूरी व्यवस्था किस उद्देश्य से तैयार की थी और क्या उसने इसका इस्तेमाल किसी व्यक्ति या संस्था पर प्रभाव डालने के लिए किया।
पहले IT कंपनी में कर चुका है काम
पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार हिमांशु पांचाल पहले अहमदाबाद की एक IT कंपनी में नौकरी कर चुका है। करीब एक महीने पहले वह इंदौर आया था और यहां किराए के मकान में रह रहा था।
पुलिस के मुताबिक आरोपी के परिवार में उसकी मां हैं। इंदौर आने के बाद उसने किस तरह की गतिविधियां कीं और किन लोगों से संपर्क किया, इसकी भी जानकारी जुटाई जा रही है।
लसूड़िया थाना पुलिस ने दर्ज किया केस
होटल प्रबंधन की शिकायत और शुरुआती जांच के आधार पर लसूड़िया थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है।
आरोपी के खिलाफ BNS की धारा 204 के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस अब मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच कर रही है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि फर्जी IAS अधिकारी की पहचान बनाने के पीछे आरोपी का वास्तविक उद्देश्य क्या था।
गुजरात में भी दर्ज है धोखाधड़ी का मामला
पुलिस के अनुसार हिमांशु पांचाल के खिलाफ गुजरात में भी धोखाधड़ी से संबंधित एक मामला दर्ज है।
बताया गया है कि गुजरात के गांधीनगर जिले के अडालज थाने में उसके खिलाफ 23 मई 2026 को मामला दर्ज किया गया था। इस मामले का FIR नंबर 441/2026 बताया गया है।
अब इंदौर पुलिस गुजरात में दर्ज मामले से जुड़े तथ्यों की भी जानकारी जुटा रही है, ताकि आरोपी की पिछली गतिविधियों और उसके कथित फर्जीवाड़े के पैटर्न को समझा जा सके।
फर्जी IAS बनकर क्या हासिल करना चाहता था आरोपी?
पुलिस की जांच का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि हिमांशु ने खुद को IAS अधिकारी और जिला कलेक्टर बताने की जरूरत क्यों महसूस की।
पुलिस यह पता लगा रही है कि क्या उसने इस फर्जी पहचान का इस्तेमाल केवल लोगों पर प्रभाव जमाने के लिए किया या इसके जरिए किसी प्रकार का आर्थिक या अन्य लाभ हासिल करने की कोशिश भी की।
जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपी ने इंदौर में किन-किन लोगों से संपर्क किया और उसने खुद को अधिकारी बताकर किसी व्यक्ति, कारोबारी या संस्था को प्रभावित किया या नहीं।
सोशल और डिजिटल गतिविधियों की भी हो सकती है जांच
मामले की जांच के दौरान पुलिस आरोपी के मोबाइल फोन, डिजिटल गतिविधियों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की भी जांच कर सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि उसने अपनी फर्जी पहचान को तैयार करने और लोगों के सामने प्रस्तुत करने के लिए किन साधनों का इस्तेमाल किया।
यदि जांच में यह सामने आता है कि आरोपी ने फर्जी IAS पहचान के आधार पर किसी से धोखाधड़ी की या आर्थिक लाभ लेने का प्रयास किया, तो मामले में आगे और धाराएं जुड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
पुलिस जुटा रही है पूरी जानकारी
फिलहाल आरोपी पुलिस हिरासत में है और उससे पूछताछ जारी है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इंदौर में रहने के दौरान उसने किन-किन लोगों से संपर्क किया और ‘राज सोनी’ नाम का इस्तेमाल कहां-कहां किया।
इसके अलावा पुलिस उसके गुजरात कनेक्शन और पहले दर्ज मामले की जानकारी भी जुटा रही है।
फर्जी IAS अधिकारी बनकर रहने का यह मामला सामने आने के बाद अब जांच का फोकस आरोपी की पूरी गतिविधियों और उसके कथित फर्जी नेटवर्क का पता लगाने पर है। पुलिस की विस्तृत जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि उसने इस फर्जी पहचान से वास्तव में क्या हासिल करने की कोशिश की थी।
