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Indore में एक और बावड़ी पर खतरा: जल संरक्षण दावों के बीच सड़क चौड़ीकरण से उठे सवाल

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Published On: 29 May 2026
Indore

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Indore में एक और बावड़ी पर खतरा: जल संरक्षण दावों के बीच सड़क चौड़ीकरण से उठे सवाल

Indore शहर में एक बार फिर ऐतिहासिक और प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राज्य सरकार के जलगंगा संवर्धन अभियान के तहत जहां कुओं, बावड़ियों और तालाबों के संरक्षण के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शहर में एक और प्राचीन बावड़ी के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। जिंसी क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण परियोजना के चलते इस बावड़ी का हिस्सा प्रभावित हो रहा है, जिसे लेकर विवाद गहराता जा रहा है।

सड़क चौड़ीकरण में आ रही बावड़ी

नगर निगम द्वारा मास्टर प्लान के तहत इंदौर में कई प्रमुख सड़कों के चौड़ीकरण का कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में जिंसी चौराहा से लक्ष्मीबाई प्रतिमा तिराहे तक सड़क विस्तार कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।

इसी क्षेत्र में स्थित काली मस्जिद के सामने एक प्राचीन बावड़ी का हिस्सा सड़क निर्माण की जद में आ गया है। बताया जा रहा है कि यह बावड़ी करीब 70 साल पुरानी है और पहले स्थानीय लोगों के लिए पानी का प्रमुख स्रोत हुआ करती थी।

अब सड़क चौड़ीकरण के लिए इसी बावड़ी के हिस्से को बाधक मानकर उसे बंद करने की तैयारी की जा रही है।

सीमेंट स्लैब डालने की योजना

सूत्रों के अनुसार नगर निगम की योजना है कि इस बावड़ी के ऊपर सीमेंट की पक्की स्लैब डालकर इसे ढक दिया जाए, जिससे सड़क निर्माण में कोई बाधा न आए।

वर्तमान में बावड़ी के ऊपर सुरक्षा के लिए ग्रीन नेट लगाया गया है। इसके पास एक प्याऊ और शनि देव मंदिर भी स्थित है, जो इस क्षेत्र के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को और बढ़ाता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कदम ऐतिहासिक धरोहर और जल संरक्षण दोनों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।

जल संरक्षण अभियान बनाम जमीनी हकीकत

राज्य सरकार लगातार प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए अभियान चला रही है। निर्देश दिए गए हैं कि सभी शहरों में कुओं, बावड़ियों और तालाबों को संरक्षित किया जाए और उनकी जल धारण क्षमता बढ़ाई जाए।

नगर निगम भी शहर में जल संरक्षण अभियान चलाने का दावा करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इससे अलग दिखाई देती है।

एक ओर जहां पुराने जल स्रोतों को बचाने की बात हो रही है, वहीं दूसरी ओर विकास परियोजनाओं के नाम पर इन्हें ढकने या समाप्त करने की प्रक्रिया सामने आ रही है।

पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं

यह पहली बार नहीं है जब इंदौर में किसी बावड़ी या कुएं को विकास कार्यों के नाम पर प्रभावित किया गया हो।

रानी सराय बावड़ी मामला

हाल ही में मेट्रो परियोजना के काम के दौरान रानी सराय क्षेत्र में स्थित एक ऐतिहासिक बावड़ी को मलबा भरकर बंद कर दिया गया था। इस फैसले का स्थानीय लोगों ने विरोध भी किया था, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ सका।

प्राचीन कुएं का बंद होना

डीआरपी लाइन क्षेत्र में स्थित एक पुराने कुएं को भी पहले मलबा भरकर बंद कर दिया गया था। बाद में विरोध के बाद मलबा हटाया गया, लेकिन अंततः उसे भी स्लैब डालकर स्थायी रूप से बंद कर दिया गया।

पटेल नगर हादसे की याद

विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे निर्माण कार्यों में सावधानी बेहद जरूरी है।

30 मार्च 2023 को पटेल नगर में एक बावड़ी पर डाली गई स्लैब रामनवमी के दिन धंस गई थी, जिसमें 36 लोगों की मौत हो गई थी। यह घटना आज भी शहर में एक बड़े हादसे के रूप में याद की जाती है।

इसके बावजूद जिंसी क्षेत्र की बावड़ी पर भी इसी तरह की संरचना तैयार किए जाने की योजना को लेकर चिंता जताई जा रही है।

स्थानीय लोगों की चिंता

क्षेत्र के निवासियों का कहना है कि यह बावड़ी केवल एक जल स्रोत नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर भी है। इसे ढक देना या बंद करना आने वाली पीढ़ियों के लिए गलत संदेश होगा।

लोगों का यह भी कहना है कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन उन्हें प्राकृतिक संसाधनों और ऐतिहासिक संरचनाओं को नुकसान पहुंचाए बिना किया जाना चाहिए।

निष्कर्ष

इंदौर में एक ओर जहां जल संरक्षण और स्मार्ट सिटी विकास के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्राचीन बावड़ियों और कुओं के अस्तित्व पर संकट गहराता जा रहा है। जिंसी क्षेत्र की यह बावड़ी अब विकास और संरक्षण के बीच एक बहस का केंद्र बन गई है। आने वाले दिनों में प्रशासन इस मुद्दे पर क्या निर्णय लेता है, इस पर पूरे शहर की नजर टिकी हुई है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि ऐसी ऐतिहासिक संरचनाओं का संरक्षण न केवल सांस्कृतिक धरोहर के लिए जरूरी है बल्कि जल संकट के समाधान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार अगर इन बावड़ियों की समय पर मरम्मत और पुनरुद्धार किया जाए तो भूजल स्तर को सुधारने में भी मदद मिल सकती है और शहर की पुरानी जल परंपरा को फिर से जीवित किया जा सकता है। प्रशासनिक स्तर पर इस मामले में जल्द निर्णय लेने की आवश्यकता बताई जा रही है ताकि विकास और विरासत संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित हो सके स्थायी समाधान पर जोर दिया जा रहा है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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