Indore Elevated Corridor: धीमी रफ्तार से बढ़ी परेशानी, LIG से नवलखा तक जाम में फंसे वाहन चालक
7.40 किमी लंबे एलीवेटेड कॉरिडोर की धीमी प्रगति से बढ़ा ट्रैफिक संकट
Indore Elevated Corridor: इंदौर में ट्रैफिक समस्या को कम करने के उद्देश्य से बनाया जा रहा LIG से नवलखा तक का एलीवेटेड कॉरिडोर अब आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बनता जा रहा है। करीब 7.40 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट का काम धीमी गति से चलने के कारण एबी रोड पर वाहन चालकों को रोजाना जाम का सामना करना पड़ रहा है।
करीब ढाई महीने पहले सड़क पर बैरिकेडिंग कर दी गई थी, लेकिन इसके बाद भी कई स्थानों पर निर्माण कार्य बेहद धीमा दिखाई दे रहा है। बारिश के मौसम में स्थिति और खराब हो गई है। पीक ऑवर्स के दौरान घंटों तक वाहन चालक जाम में फंसे रहते हैं और सड़क पर ट्रैफिक रेंगता नजर आता है।
बैरिकेडिंग से बढ़ी परेशानी, प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग
एलीवेटेड कॉरिडोर निर्माण के लिए किए गए बैरिकेड्स के कारण एबी रोड का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो गया है। स्थानीय लोगों और वाहन चालकों का कहना है कि जहां अभी निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है, वहां से बैरिकेडिंग हटाई जानी चाहिए ताकि ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर हो सके।
लोगों का सुझाव है कि निर्माण एजेंसी को चरणबद्ध तरीके से काम करना चाहिए। जहां काम चल रहा है, केवल वहीं बैरिकेडिंग रखी जाए और खाली हिस्सों को यातायात के लिए खोल दिया जाए।
सांसद ने कलेक्टर को लिखा पत्र
प्रोजेक्ट की धीमी रफ्तार को लेकर सांसद शंकर लालवानी ने भी चिंता जताई है। उन्होंने जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर मामले की समीक्षा करने और जिम्मेदार एजेंसियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
सांसद का कहना है कि लंबे समय से सड़क का बड़ा हिस्सा बंद रहने से आम जनता को परेशानी हो रही है। इससे लोगों का समय, ईंधन और पर्यावरण तीनों का नुकसान हो रहा है।
उन्होंने सुझाव दिया कि केवल निर्माण वाले हिस्सों में ही बैरिकेडिंग रखी जाए और काम की गति बढ़ाने के लिए संबंधित विभागों के साथ समीक्षा की जाए।
₹350 करोड़ की परियोजना, लेकिन काम अभी शुरुआती चरण में
इंदौर का यह एलीवेटेड कॉरिडोर करीब 350 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है।
परियोजना का लक्ष्य फरवरी 2028 तक निर्माण पूरा करना है। दावा किया जा रहा है कि कॉरिडोर बनने के बाद एबी रोड का करीब 60 प्रतिशत ट्रैफिक ऊपरी मार्ग पर शिफ्ट हो जाएगा, जिससे शहर के प्रमुख चौराहों पर जाम की समस्या कम होगी।
हालांकि वर्तमान स्थिति में निर्माण कार्य की धीमी गति लोगों की परेशानी बढ़ा रही है।
ढाई महीने में केवल शुरुआती फाउंडेशन कार्य
प्रोजेक्ट की वर्तमान स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार ढाई महीने पहले बैरिकेडिंग किए जाने के बावजूद अभी तक अधिकांश स्थानों पर केवल शुरुआती टेस्टिंग और फाउंडेशन से जुड़े काम ही हो पाए हैं।
वास्तविक निर्माण गति पकड़ नहीं पाया है, जबकि सड़क का बड़ा हिस्सा पहले से ही प्रभावित है।
इस वजह से लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य तेजी से नहीं बढ़ा तो आने वाले समय में ट्रैफिक समस्या और गंभीर हो सकती है।
बारिश के बाद एबी रोड पर बढ़ी मुश्किलें
मानसून के दौरान एबी रोड की स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई है। सड़क संकरी होने, जलभराव और निर्माण कार्य के कारण कई जगहों पर ट्रैफिक रुक जाता है।
खास तौर पर—
- एलआईजी क्षेत्र
- चंदन नगर
- पलासिया
- डीएनएस अस्पताल के आसपास
पीक टाइम में लंबा ट्रैफिक जाम देखने को मिल रहा है।
इन क्षेत्रों में अस्पताल, बाजार और धार्मिक स्थलों के कारण पहले से ही यातायात का दबाव अधिक रहता है। ऐसे में निर्माण कार्य के कारण समस्या और बढ़ गई है।
एलीवेटेड रोड बनने के बाद मिलेगी राहत की उम्मीद
प्रशासन और परियोजना से जुड़े अधिकारियों का दावा है कि एलीवेटेड कॉरिडोर बनने के बाद इंदौर के ट्रैफिक सिस्टम में बड़ा सुधार आएगा।
कॉरिडोर बनने के बाद—
- एबी रोड पर वाहनों का दबाव कम होगा।
- सात प्रमुख चौराहों पर जाम की समस्या घटेगी।
- यात्रा का समय कम होगा।
- शहर के अंदर आवागमन आसान होगा।
लेकिन इसके लिए निर्माण कार्य को तय समय सीमा में पूरा करना सबसे बड़ी चुनौती है।
चरणबद्ध निर्माण का सुझाव पहले भी दिया गया था
स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण शुरू करने से पहले चरणबद्ध योजना बनाई जानी चाहिए थी। यदि पूरी सड़क को एक साथ बाधित करने के बजाय अलग-अलग हिस्सों में काम किया जाता तो जनता को कम परेशानी होती।
लोगों का आरोप है कि पहले दिए गए सुझावों पर ध्यान नहीं दिया गया, जिसका खामियाजा अब वाहन चालकों को भुगतना पड़ रहा है।
परियोजना की फैक्ट फाइल
- प्रोजेक्ट: LIG से नवलखा एलीवेटेड कॉरिडोर
- कुल लंबाई: 7.40 किलोमीटर
- अनुमानित लागत: करीब 350 करोड़ रुपये
- निर्माण पूरा करने का लक्ष्य: फरवरी 2028
- अनुमानित लाभ: 60 प्रतिशत ट्रैफिक एलीवेटेड रोड पर शिफ्ट होने की उम्मीद
- वर्तमान स्थिति: धीमी गति से चल रहा निर्माण और ट्रैफिक दबाव में बढ़ोतरी
अब प्रशासन से लोगों को राहत की उम्मीद
एलीवेटेड कॉरिडोर इंदौर के भविष्य के ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए महत्वपूर्ण परियोजना है, लेकिन वर्तमान में निर्माण की धीमी गति लोगों के लिए परेशानी बन गई है।
अब वाहन चालकों और स्थानीय नागरिकों की नजर जिला प्रशासन के अगले कदम पर है। लोगों की मांग है कि निर्माण एजेंसी को तेजी से काम करने के निर्देश दिए जाएं और जहां जरूरी नहीं है वहां से बैरिकेडिंग हटाकर यातायात को राहत दी जाए।
यदि समय पर काम पूरा होता है तो यह परियोजना इंदौर के ट्रैफिक सिस्टम में बड़ा बदलाव ला सकती है।
