इंदौर में 2 इंच बारिश से शहर पानी-पानी, महापौर भोपाल में विकास गाथा सुनाते रहे
इंदौर। शनिवार को महज डेढ़ घंटे की तेज बारिश ने स्मार्ट सिटी कहलाने वाले इंदौर की सच्चाई उजागर कर दी। करीब 2 इंच बरसात ने पूरे शहर को ठप कर दिया। गलियां और मुख्य सड़कें नदी जैसी नजर आईं। कई जगहों पर गाड़ियां पानी में बह गईं और बाइकें बंद हो गईं। ट्रैफिक जाम ने हालात और बिगाड़ दिए, जिससे लोग घंटों परेशान रहे।
शहरवासी अपने महापौर ‘मित्र’ पुष्यमित्र भार्गव को तलाशते रहे लेकिन वे शहर में नज़र नहीं आए। बाद में सोशल मीडिया से पता चला कि भार्गव भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को इंदौर की “विकास गाथा” सुना रहे थे।
“इंदौर में डेढ़ घंटे की बारिश से सड़कों पर बाढ़ जैसे हालात बन गए। गाड़ियां डूब गईं, ट्रैफिक जाम से लोग परेशान रहे। महापौर पुष्यमित्र भार्गव भोपाल में मुख्यमंत्री को इंदौर की विकास गाथा सुना रहे थे, जबकि शहर जलभराव से जूझ रहा था। तीन साल बाद भी निकासी व्यवस्था न सुधरने पर जनता ने सवाल उठाए।”
तीन साल बाद भी नहीं सुधरे हालात
लोगों का कहना है कि पहले साल समझा जा सकता था कि नए महापौर को कामकाज सीखने में समय लगेगा, लेकिन अब तीन साल बीत जाने के बाद भी नालों की सफाई, जलनिकासी और ड्रेनेज सिस्टम दुरुस्त नहीं हुए। हालात यह रहे कि पॉश कॉलोनियों में भी लोग घरों से पानी निकालते नजर आए।
निचले इलाकों के साथ नए क्षेत्र भी डूबे
इस बार जलभराव सिर्फ पुराने निचले इलाकों तक सीमित नहीं रहा। कई ऐसी जगहें भी पानी में डूब गईं जहां पहले कभी बाढ़ जैसे हालात नहीं बने थे। कर्बला पुल, पलसीकर, महू नाका और कलेक्टर ऑफिस रोड जैसे इलाकों में पानी इतना जमा हुआ कि नई बनी ऊंची पुलिया के दोनों ओर भी नदी जैसा बहाव देखने को मिला।
जनता का तंज – विकास सिर्फ कागजों पर
लोगों ने सवाल उठाया कि क्या महापौर राजनीति से दूरी बना रहे हैं या विधानसभा चुनाव की तैयारी में व्यस्त हैं? जनता का तंज है कि अगर शहर की समस्याएं जस की तस रहीं, तो सिर्फ “भाजपा का निशान” अगली बार जीत की गारंटी नहीं होगा।
दरअसल, शहर का विकास कागजों और भाषणों तक सीमित दिख रहा है। वास्तविकता यह है कि थोड़ी सी बारिश में भी इंदौर डूब जाता है। आम लोग सवाल कर रहे हैं – क्या हमें बारिश न होने की दुआ करनी चाहिए या विकास देखने की उम्मीद रखनी चाहिए?

