Indore : धोबी घाट मुहर्रम मेले को लेकर महापौर और निगमायुक्त आमने-सामने, अनुमति जारी होकर फिर हुई निरस्त
Indore में इस बार धोबी घाट पर आयोजित होने वाले मुहर्रम मेले को लेकर नगर निगम प्रशासन के भीतर बड़ा विवाद सामने आया है। मेले की अनुमति को लेकर महापौर और निगमायुक्त के बीच मतभेद इतना बढ़ गया कि मामला महापौर परिषद (MIC) तक पहुंच गया। पहले अनुमति देने से इनकार किया गया, फिर निगमायुक्त ने अनुमति जारी की और अंत में महापौर परिषद ने उसे निरस्त कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम ने शहर की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
महापौर का अनुमति देने से इनकार
कुछ दिन पहले Indore के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने धोबी घाट पर मुहर्रम मेले की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया था। उनका कहना था कि यह भूमि नगर निगम के स्वामित्व में है और इस पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को लेकर पहले से कुछ कानूनी सीमाएं तय हैं।
महापौर ने यह भी बताया कि जिला न्यायालय ने सितंबर 2024 के अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि धोबी घाट की केवल 0.02 एकड़ भूमि पर ही ताजिए ठंडा करने की अनुमति दी जा सकती है, जबकि बाकी भूमि नगर निगम की संपत्ति है। इसी आधार पर इस बार मेले की अनुमति देने से इंकार किया गया था।
निगमायुक्त द्वारा अनुमति जारी
महापौर के निर्णय के बावजूद गुरुवार दोपहर निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने अचानक मेले की अनुमति जारी कर दी। यह अनुमति इंदौर जिला वक्फ कमेटी के नाम से जारी की गई थी, जिसके अध्यक्ष मो. अब्दुल हमीद नियारगर हैं।
इस निर्णय के बाद नगर निगम में प्रशासनिक असहमति खुलकर सामने आ गई। बताया जा रहा है कि इस अनुमति के जारी होने से पहले महापौर शहर से बाहर थे, जिसके कारण तत्काल संवाद नहीं हो पाया।
महापौर की नाराजगी और MIC बैठक
जैसे ही महापौर पुष्यमित्र भार्गव को अनुमति जारी होने की जानकारी मिली, उन्होंने इस पर कड़ी नाराजगी जताई। इसके बाद उन्होंने तुरंत वर्चुअल माध्यम से महापौर परिषद (MIC) की बैठक बुला ली।
इस बैठक में निगमायुक्त क्षितिज सिंघल भी शामिल हुए। बैठक के दौरान इस मुद्दे पर लंबी चर्चा हुई और अंततः यह निर्णय लिया गया कि निगमायुक्त द्वारा जारी की गई अनुमति को निरस्त किया जाए।
MIC का फैसला: अनुमति रद्द, केवल ताजिए की अनुमति
महापौर परिषद की बैठक में यह तय किया गया कि धोबी घाट पर केवल ताजिए ठंडा करने की अनुमति दी जाएगी, लेकिन तीन दिवसीय मुहर्रम मेले को लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
यह भी सामने आया कि पिछले वर्ष मेले की अनुमति कुछ शर्तों के साथ दी गई थी, लेकिन आयोजकों द्वारा उन शर्तों का पालन नहीं किया गया था। इसके अलावा, निगम में जमा की जाने वाली निर्धारित राशि भी समय पर जमा नहीं की गई थी।
इन्हीं कारणों को आधार बनाते हुए इस बार मेले की अनुमति को पूरी तरह से निरस्त करने का निर्णय लिया गया।
पिछले वर्षों की परंपरा और विवाद
धोबी घाट पर मुहर्रम का मेला वर्षों से आयोजित होता रहा है। यह स्थान स्थानीय समुदाय के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। हर साल यहां बड़ी संख्या में लोग ताजिए ठंडा करने और मेले में शामिल होने आते हैं।
हालांकि, हाल के वर्षों में इस आयोजन को लेकर प्रशासन और आयोजकों के बीच कई बार विवाद की स्थिति बनी है। भूमि स्वामित्व, अनुमति प्रक्रिया और नियमों के पालन को लेकर लगातार असहमति देखने को मिली है।
कानूनी स्थिति और भूमि विवाद
इस मामले में सबसे अहम बिंदु भूमि उपयोग को लेकर है। जिला न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि धोबी घाट की केवल सीमित भूमि का ही उपयोग धार्मिक गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। बाकी भूमि नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में आती है।
महापौर का कहना है कि जब न्यायालय का स्पष्ट आदेश मौजूद है, तो पूरे क्षेत्र में मेले की अनुमति देना उचित नहीं है। इसी कारण इस बार सख्त रुख अपनाया गया।
आयोजकों की प्रतिक्रिया
Indore जिला वक्फ कमेटी के अध्यक्ष रेहान शेख ने बताया कि उन्होंने मेले की तैयारी पहले ही शुरू कर दी थी। उनके अनुसार, MIC के अंतिम निर्णय की जानकारी उन्हें समय पर नहीं मिली थी, जिससे असमंजस की स्थिति बनी रही।
आयोजकों का कहना है कि हर साल की तरह इस बार भी परंपरा के अनुसार मेला आयोजित करने की योजना थी, लेकिन प्रशासनिक निर्णयों के कारण स्थिति अनिश्चित हो गई।
प्रशासनिक टकराव पर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम प्रशासन के भीतर तालमेल की कमी को उजागर कर दिया है। एक ओर महापौर द्वारा अनुमति न देने का निर्णय लिया गया, वहीं दूसरी ओर निगमायुक्त द्वारा अनुमति जारी कर दी गई। इसके बाद MIC द्वारा उसे निरस्त कर दिया गया।
इस तरह के विरोधाभासी निर्णयों ने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, बल्कि आयोजन से जुड़े लोगों में भी भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है।
निष्कर्ष
Indore के धोबी घाट मुहर्रम मेले को लेकर उत्पन्न यह विवाद प्रशासनिक समन्वय की कमी को दर्शाता है। फिलहाल MIC के निर्णय के बाद मेले की अनुमति निरस्त कर दी गई है और केवल ताजिए ठंडा करने की अनुमति दी गई है। हालांकि, इस पूरे प्रकरण ने आने वाले समय में ऐसे आयोजनों के लिए स्पष्ट और एकीकृत नीति की आवश्यकता को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है।
