Indore के रेस्त्रां में टैक्स चोरी का खुलासा: आयकर विभाग ने जारी की चेतावनी
Indore: आयकर विभाग की सख्ती और तकनीकी जांच के चलते इंदौर के ढाबा और रेस्त्रां अब टैक्स चोरी की चपेट में हैं। हाल ही में किए गए एक राष्ट्रीय स्तर के सर्वे में इंदौर के नानकसर ढाबा और कुछ अन्य रेस्त्रां में ‘पेटपूजा’ नामक सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर बिक्री और बिलों में हेरफेर करने के सबूत सामने आए हैं। आयकर विभाग ने इन रेस्त्रां संचालकों को 31 मार्च तक रिटर्न अपडेट करने का निर्देश दिया है, अन्यथा उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
देशव्यापी जांच में Indore भी शामिल
आयकर विभाग ने 8 मार्च को देशभर में रेस्त्रां और ढाबों के बिल व रिटर्न का सत्यापन करने के लिए व्यापक सर्वे शुरू किया। 22 राज्यों के 62 शहरों में आयकर की टीमें विभिन्न रेस्त्रां में पहुंचीं और उनके वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की। Indore के नानकसर ढाबा, कृपा रेस्त्रां और भोपाल के मिलन रेस्त्रां इस सर्वे के दायरे में आए। जांच में सामने आया कि इन रेस्त्रां ने खास प्रकार के सॉफ्टवेयर ‘पेटपूजा’ का इस्तेमाल कर टैक्स चोरी की।
आयकर विभाग के अनुसार, सिर्फ Indore और भोपाल के तीन से चार रेस्त्रां की जांच में ही दस करोड़ रुपये की बिक्री पर प्रारंभिक टैक्स चोरी पकड़ी गई। विभाग ने तुरंत नोटिस जारी कर सभी रेस्त्रां संचालकों को 31 मार्च तक संशोधित रिटर्न जमा करने के निर्देश दिए।
‘पेटपूजा सॉफ्टवेयर’ से हो रही थी हेरफेर
विशेषज्ञों के अनुसार, पेटपूजा सॉफ्टवेयर बिलिंग और बिक्री रिकॉर्ड में हेरफेर करने की सुविधा देता है। ग्राहक को कंप्यूटर प्रिंटेड बिल दिया जाता है, लेकिन संचालक अपनी सुविधा अनुसार रिकॉर्ड को एडिट कर सकते थे। इस सॉफ्टवेयर में ऐसी सेटिंग होती है जिससे मासिक बिक्री को मनमाने आंकड़ों के अनुसार एडजस्ट किया जा सकता था।
सॉफ्टवेयर बिलों के पुराने रिकॉर्ड में भी बदलाव कर देता था। आयकर विभाग ने पिछले साल नवंबर में हैदराबाद की एक लोकप्रिय बिरयानी चेन पर छापे में इसी तरह की हेरफेरी पकड़ी थी। इसके बाद एआई आधारित निगरानी प्रणाली के माध्यम से देशभर में ऐसे लगभग एक लाख रेस्त्रां और फूड आउटलेट्स पर नजर रखी जा रही है।
एआई आधारित निगरानी और डेटा संग्रह
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने एआई तकनीक का इस्तेमाल कर 1.5 लाख से अधिक रेस्त्रां और फूड आउटलेट्स का डेटा इकट्ठा किया। इस तकनीक से यह पता लगाया गया कि कौन से आउटलेट्स अपने बिक्री रिकॉर्ड में बदलाव कर रहे हैं। सीए स्वप्निल जैन के अनुसार, आयकर विभाग ने सभी रेस्त्रां संचालकों को चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि वे 31 मार्च तक संशोधित रिटर्न दाखिल करें और छुपाई गई आय को घोषित करें।
31 मार्च तक रिटर्न अपडेट करने की चेतावनी
आयकर विभाग ने साफ तौर पर कहा है कि 31 मार्च तक यदि रेस्त्रां संचालक अपनी रिटर्न अपडेट नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें ब्याज, जुर्माना और कानूनी कार्रवाई शामिल हो सकती है। इस कदम का उद्देश्य रेस्त्रां संचालकों को अपनी आय और बिक्री के रिकॉर्ड में पारदर्शिता लाने के लिए प्रेरित करना है।
टैक्स चोरी के बड़े पैमाने पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार, पेटपूजा जैसे सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके टैक्स चोरी करना देशभर में व्यापक पैमाने पर हो रहा है। छोटे ढाबों से लेकर बड़े रेस्त्रां चेन तक इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। यह न केवल सरकारी राजस्व को प्रभावित करता है, बल्कि व्यापारिक प्रतिस्पर्धा में भी असमानता पैदा करता है।
उद्योग और ग्राहकों पर प्रभाव
आयकर विभाग की इस कार्रवाई से रेस्त्रां और ढाबों के कारोबार में अस्थायी परेशानी हो सकती है। कई व्यवसायिक मालिक अब अपनी वित्तीय रिकॉर्ड को सुधारने और संशोधित रिटर्न दाखिल करने में व्यस्त हैं। वहीं, ग्राहकों को बिलिंग में पारदर्शिता मिलने से लंबे समय में भरोसा बढ़ेगा।
भविष्य में और सख्ती
सीबीडीटी ने संकेत दिया है कि आने वाले महीनों में पेटपूजा जैसे सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करने वाले अन्य आउटलेट्स पर भी निगरानी बढ़ाई जाएगी। इस तकनीक के माध्यम से ऐसे सभी व्यवसायों को ट्रैक किया जाएगा जो टैक्स चोरी कर रहे हैं।
इस कदम से यह स्पष्ट होता है कि आयकर विभाग न केवल बड़े शहरों बल्कि छोटे शहरों के रेस्त्रां और ढाबों में भी टैक्स चोरी को रोकने के लिए लगातार काम कर रहा है। इंदौर के नानकसर ढाबा जैसे मामले यह दिखाते हैं कि विभाग अब तकनीक और एआई आधारित निगरानी का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर जांच कर रहा है।
आयकर विभाग की इस कार्रवाई से रेस्त्रां उद्योग में पारदर्शिता बढ़ेगी और टैक्स चोरी के मामलों में कमी आएगी। साथ ही, यह कदम अन्य राज्यों में भी चेतावनी के रूप में काम करेगा।
