Indore डेली कॉलेज विवाद: ओल्ड डेलियंस को डिबेट की खुली चुनौती, बोर्ड प्रेसिडेंट बोले– किसी भी मंच पर कर लें चर्चा; जून में होंगे चुनाव
Indore स्थित प्रतिष्ठित डेली कॉलेज में चुनावी प्रक्रिया और संविधान संशोधन को लेकर चल रहा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इसी बीच बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के प्रेसिडेंट विक्रम सिंह पवार ने विरोध कर रहे ओल्ड डेलियंस (पूर्व छात्र समूह) को खुले तौर पर बहस की चुनौती दी है। उन्होंने कहा है कि वे किसी भी मंच पर चर्चा के लिए तैयार हैं, ताकि सभी आरोपों और अनियमितताओं की सच्चाई सामने आ सके।
किसी भी प्लेटफॉर्म पर बात करने को तैयार” – विक्रम सिंह पवार
Indore विक्रम सिंह पवार ने कहा कि संस्था के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को तथ्यों के आधार पर परखा जाना चाहिए। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे ओल्ड डेलियंस से अपील की कि वे खुलकर सामने आएं और किसी भी सार्वजनिक मंच पर बहस करें।
उनका कहना है कि यदि किसी को संविधान संशोधन या चुनावी प्रक्रिया पर संदेह है, तो उसका समाधान बातचीत और तथ्यों के आधार पर किया जाना चाहिए, न कि विरोध-प्रदर्शन से।
संविधान संशोधन को बताया पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया
पवार ने डेली कॉलेज के संविधान संशोधन को लेकर उठाए जा रहे सवालों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया कानूनी सलाह के आधार पर और निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी की गई है।
उन्होंने बताया कि संशोधन से पहले 15 दिन का अनिवार्य नोटिस पीरियड दिया गया था और इसके बाद एजीएम (वार्षिक आम बैठक) में तीन-चौथाई बहुमत से इसे पारित किया गया। फिलहाल इसे सरकारी मंजूरी के लिए भेजा गया है।
विवाद को बेवजह तूल दिया जा रहा है”
बोर्ड प्रेसिडेंट ने कहा कि ओल्ड डेलियंस एसोसिएशन और डेली कॉलेज दो अलग-अलग स्वतंत्र संस्थाएं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य ‘डबल इलेक्शन सिस्टम’ को खत्म कर एकल चुनाव प्रणाली लागू करना है, जिससे पारदर्शिता बढ़े।
उन्होंने यह भी कहा कि ओल्ड डेलियंस के वोटिंग अधिकार समाप्त नहीं किए जा रहे हैं, बल्कि संरचना को बेहतर बनाया जा रहा है ताकि चुने हुए प्रतिनिधि सीधे बोर्ड में शामिल हो सकें।
शैक्षणिक उपलब्धियों पर ध्यान देने की अपील
विक्रम सिंह पवार ने कहा कि मौजूदा विवादों के कारण संस्था की शैक्षणिक उपलब्धियों को नजरअंदाज किया जा रहा है, जो सही नहीं है।
उन्होंने बताया कि हाल ही में दो छात्राओं ने 99.4% अंक हासिल किए हैं, जबकि 50% से अधिक छात्रों ने 90% से ज्यादा अंक प्राप्त किए हैं। इसके अलावा कैम्ब्रिज परीक्षा में चार टॉपर्स का प्रदर्शन भी उल्लेखनीय रहा है।
उन्होंने कहा कि संस्था की उपलब्धियों की बजाय चुनावी विवादों को अधिक तूल दिया जा रहा है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
हर तीन साल में जुड़े नए सदस्य, संरचना में बदलाव
नए संशोधनों के तहत संगठनात्मक ढांचे में भी बदलाव प्रस्तावित हैं। पवार के अनुसार, हर तीन साल में नए सदस्य जोड़े जाएंगे, जिससे संगठन में निरंतरता और नई सोच बनी रहेगी।
उन्होंने कहा कि ओल्ड डेलियंस और कॉलेज कमेटी के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और दोनों संस्थाएं एक-दूसरे की पूरक बनकर कार्य करेंगी।
दूसरे गुट ने की संदीप पारेख को हटाने की मांग
इधर, ओल्ड डेलियंस के एक अन्य गुट ने संदीप पारेख को बोर्ड से हटाने की मांग उठाई है। उनका आरोप है कि हाल ही में डेली कॉलेज परिसर में हुई घटना ने संस्था की गरिमा और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
उनका कहना है कि एक बैठक के लिए केवल सीमित प्रतिनिधियों को अनुमति दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग परिसर में पहुंच गए, जिससे अनुशासन भंग हुआ।
प्रशासन को भेजी गई शिकायत
गुट ने दावा किया है कि करीब 400 ओल्ड डेलियंस के हस्ताक्षर के साथ एक शिकायत तैयार की गई है, जिसमें संदीप पारेख को तत्काल प्रभाव से बोर्ड से हटाने की मांग की गई है। यह शिकायत मुख्यमंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों को भी भेजी जा रही है।
जून में होंगे चुनाव, बढ़ा राजनीतिक माहौल
पूरे विवाद के बीच यह भी स्पष्ट किया गया है कि डेली कॉलेज के चुनाव जून में प्रस्तावित हैं। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच मतभेद और बढ़ते नजर आ रहे हैं।
निष्कर्ष
Indore का यह शैक्षणिक संस्थान अब प्रशासनिक और चुनावी विवादों के केंद्र में है। एक तरफ बोर्ड प्रबंधन पारदर्शिता और कानूनी प्रक्रिया की बात कर रहा है, तो दूसरी तरफ ओल्ड डेलियंस समूह सवाल उठा रहा है। अब सभी की नजर जून में होने वाले चुनाव और आगे की कार्रवाई पर टिकी है, जो इस विवाद की दिशा तय करेगी।
