गोपनीय दस्तावेज दिखाकर 10 लाख रुपये मांगने का आरोप, यूट्यूब चैनल संचालक पर FIR
इंदौर। बैंक और आयकर से जुड़े कथित गोपनीय दस्तावेज दिखाकर 10 लाख रुपये मांगने की शिकायत पर इंदौर क्राइम ब्रांच ने भोपाल के एक यूट्यूब चैनल से जुड़े प्रवेश गौतम के खिलाफ FIR दर्ज की है। शिकायत में ब्लैकमेलिंग, धोखाधड़ी और डिजिटल दस्तावेज हासिल कर उन्हें सार्वजनिक करने के आरोप लगाए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, FIR 22 सितंबर को दर्ज हुई थी। पुलिस अब शिकायत में बताए गए वीडियो, दस्तावेजों और रकम मांगने के आरोप की जांच कर रही है।
दो लोगों ने की शिकायत
मामले में इंदौर निवासी विनय पिंगले और जितिन खंडेलवाल ने शिकायत की है। पिंगले इंदौर स्थित इनोवेटिव कैड सेंटर के प्रोपराइटर हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार, उनकी संस्था को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत तृतीय पक्ष गुणवत्ता निगरानी एजेंसी के रूप में काम मिला है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उनसे संबंधित बैंक और आयकर दस्तावेजों का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए किया गया। पुलिस के सामने एक सवाल यह भी है कि ये दस्तावेज किस तरह प्राप्त हुए और इन्हें देखने या इस्तेमाल करने की अनुमति किसके पास थी। जांच पूरी होने तक दस्तावेजों के स्रोत और उनके कथित दुरुपयोग पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
छह सितंबर के वीडियो का उल्लेख
शिकायत में छह सितंबर को एक यूट्यूब चैनल पर प्रसारित करीब सात मिनट 24 सेकंड के वीडियो का उल्लेख है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, वीडियो में खंडेलवाल परिवार और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप लगाए गए थे। पुलिस जांच में वीडियो की सामग्री, उसमें दिखाए गए दस्तावेज और शिकायत में बताई गई घटनाओं के क्रम को देखा जाएगा।
वीडियो में लगाए गए आरोप और शिकायतकर्ताओं की ओर से ब्लैकमेलिंग के आरोप, दोनों अलग-अलग दावे हैं। किसी वीडियो का प्रसारण अपने आप में उसमें कही गई बातों की पुष्टि नहीं करता। इसी तरह रकम मांगने का आरोप भी उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच का विषय है। पुलिस को यह स्पष्ट करना होगा कि कथित मांग कब, किस माध्यम से और किससे की गई थी।
FIR में कौन सी धाराएं?
प्राप्त विवरण के मुताबिक, क्राइम ब्रांच ने प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता की धारा 308(2) और 356(2) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 का उल्लेख किया है। शिकायत में रंगदारी, ब्लैकमेलिंग, धोखाधड़ी, चोरी और डिजिटल दस्तावेजों के कथित दुरुपयोग जैसे आरोप लगाए गए हैं। FIR दर्ज होने का अर्थ आरोप सिद्ध होना नहीं है; यह पुलिस जांच की शुरुआत है।
जांच में कथित तौर पर दिखाए गए बैंक और आयकर दस्तावेजों की प्रकृति भी महत्वपूर्ण होगी। पुलिस को यह पता लगाना होगा कि दस्तावेज वास्तविक हैं या नहीं, वे किसके पास सुरक्षित थे और यूट्यूब चैनल तक कैसे पहुंचे। डिजिटल सामग्री के मामले में मूल फाइल, उसे भेजने या अपलोड करने का रिकॉर्ड और संबंधित बातचीत से घटनाक्रम समझने में मदद मिल सकती है।
जांच के बाद स्पष्ट होगी स्थिति
फिलहाल उपलब्ध जानकारी शिकायत और FIR में दर्ज आरोपों पर आधारित है। प्रवेश गौतम का पक्ष इस विवरण में सामने नहीं आया है। पुलिस की जांच में शिकायतकर्ताओं के बयान, वीडियो और दस्तावेजों के साथ कथित धनराशि की मांग से जुड़े साक्ष्यों की पड़ताल होगी। इसके बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों के समर्थन में क्या तथ्य मिले हैं और मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाती है।
