Indore Crime Branch ने फर्जी गोल्ड इन्वेस्टमेंट घोटाले में दो आरोपियों को किया गिरफ्तार
Indore , 20 फरवरी 2026 – Indore Crime Branch ने फर्जी गोल्ड इन्वेस्टमेंट के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले दो फरार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शुभम शर्मा और पूजा शर्मा के रूप में हुई है, जो उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के निवासी हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने सोना-चांदी के आभूषणों के व्यापार में भारी मुनाफा दिलाने का झांसा देकर व्यापारी अंकित बजाज से लगभग 3 करोड़ 50 लाख रुपये निवेश कराए।
क्राइम ब्रांच ने बताया कि इस मामले में मोबाइल, बैंक दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य जब्त किए गए हैं। दोनों आरोपियों को फिलहाल पुलिस रिमांड पर रखा गया है और उनसे पूछताछ जारी है।
फर्जी निवेश का तरीका और ठगी की प्रक्रिया
पुलिस के अनुसार, आरोपी शुभम शर्मा और पूजा शर्मा ने अपनी कथित गोल्ड फर्म के माध्यम से निवेशकों को आकर्षित किया। उन्होंने सोने और चांदी के आभूषणों के व्यापार का दिखावा करके पीड़ित का विश्वास जीत लिया।
आरोपियों ने चरणबद्ध तरीके से पीड़ित व्यापारी अंकित बजाज से कुल 3 करोड़ 50 लाख रुपये निवेश करवाए। शुरुआत में उन्होंने मुनाफा मिलने का भरोसा दिलाया, लेकिन कुछ समय बाद न तो कोई मुनाफा दिया गया और न ही निवेश की गई मूल राशि वापस की गई। पीड़ित ने जब खुद को ठगा हुआ महसूस किया, तब उसने इंदौर क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई।
एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने बताया कि शिकायत में आरोपियों की फर्म और उनके कार्यों के पूरे विवरण शामिल थे। शिकायत के आधार पर क्राइम ब्रांच ने आर्थिक अपराधों की विशेष टीम को सक्रिय किया और मामले की जांच तेज कर दी।
तकनीकी और साइबर जांच से हुई पहचान
पुलिस ने बताया कि आरोपियों की पहचान तकनीकी साक्ष्यों और साइबर विश्लेषण के माध्यम से की गई। आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक पासबुक और चेकबुक से जुड़े दस्तावेज जब्त किए गए हैं। इन दस्तावेजों और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस को स्पष्ट हुआ कि यह घोटाला पूर्व नियोजित और संगठित था।
प्रारंभिक जांच में यह संकेत भी मिले हैं कि आरोपियों ने अन्य लोगों के साथ भी इसी तरह की ठगी की हो सकती है। पुलिस वर्तमान में आरोपियों के बैंक खातों, लेनदेन और दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है।
कानूनी प्रावधान और मामला
इंदौर क्राइम ब्रांच ने आरोपियों के खिलाफ अपराध क्रमांक 01/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (IPC) की धारा 318(4), 316(5) और 61(2) के तहत मामला दर्ज किया है। इन धाराओं के तहत अपराधियों पर धोखाधड़ी, आर्थिक अपराध और साजिश के आरोप शामिल हैं।
पुलिस ने कहा कि आरोपियों से पूछताछ के दौरान उन्होंने ठगी करने की पूरी योजना और अवैध लाभ अर्जित करने का उद्देश्य स्वीकार किया। रिमांड पर पूछताछ से उम्मीद है कि अन्य संभावित पीड़ितों और घोटाले के और पहलुओं का पता चल सके।
निवेशकों और व्यापारियों के लिए चेतावनी
एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने आम जनता और व्यापारियों से अपील की है कि वे सुनिश्चित स्रोत और प्रमाणिक कंपनियों में ही निवेश करें। उन्होंने कहा कि उच्च लाभ का झांसा देने वाले निवेश अक्सर धोखाधड़ी का रूप ले सकते हैं।
इस मामले में क्राइम ब्रांच की तेजी और तकनीकी साक्ष्यों पर आधारित कार्रवाई अन्य निवेशकों और व्यापारियों के लिए सतर्क रहने की चेतावनी भी है।
क्राइम ब्रांच की कार्रवाई और आगे की योजना
पुलिस ने इस मामले में त्वरित और संगठित कार्रवाई की। आरोपियों की गिरफ्तारी और उनके कब्जे से जब्त दस्तावेजों के आधार पर अब आगे की जांच शुरू कर दी गई है।
- बैंक खातों और लेनदेन की जांच – यह पता लगाने के लिए कि अन्य निवेशकों से भी रकम ली गई थी या नहीं।
- मोबाइल और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण – आरोपियों के नेटवर्क और अन्य संभावित अपराधियों की पहचान के लिए।
- पीड़ितों की संख्या का पता लगाना – ताकि पूरी ठगी के दायरे को स्पष्ट किया जा सके।
पुलिस को उम्मीद है कि जांच में और बड़े खुलासे होंगे और अन्य संभावित पीड़ितों तक मदद पहुंच सकेगी।
स्थानीय और सामाजिक प्रभाव
इस तरह के निवेश घोटाले न केवल व्यक्तिगत रूप से पीड़ितों को प्रभावित करते हैं, बल्कि व्यापारिक और सामाजिक विश्वास को भी चोट पहुँचाते हैं। इंदौर क्राइम ब्रांच की सक्रिय कार्रवाई से यह संदेश जाता है कि आर्थिक अपराधों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी और आम जनता को सुरक्षित निवेश का भरोसा दिया जाएगा।
निष्कर्ष
Indore क्राइम ब्रांच की इस कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि फर्जी निवेश और धोखाधड़ी के मामलों में त्वरित और तकनीकी कार्रवाई आवश्यक है। शुभम शर्मा और पूजा शर्मा की गिरफ्तारी से न केवल एक बड़ा आर्थिक घोटाला उजागर हुआ, बल्कि अन्य निवेशकों को सतर्क रहने की चेतावनी भी दी गई।
पुलिस का कहना है कि अब जांच का मुख्य उद्देश्य सभी जुड़े लोगों और संभावित पीड़ितों तक पहुंचना है और सुनिश्चित करना है कि आरोपियों को उनके अपराधों के लिए कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़े।
यह मामला आर्थिक अपराधों के प्रति सतर्कता और कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता को दोबारा उजागर करता है।
