Indore में बस पास महंगा होने पर छात्रों का विरोध, महापौर पास योजना बंद होने से बढ़ी परेशानी
Indore में सिटी बस पास की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी को लेकर छात्रों और आम यात्रियों में नाराजगी बढ़ गई है। पहले जिस पास को कम कीमत में आसानी से रिचार्ज किया जा सकता था, अब उसकी कीमत कई गुना बढ़ चुकी है, जिससे खासकर छात्रों का बजट प्रभावित हो रहा है। महापौर पास योजना बंद होने के बाद यह बदलाव सामने आया है, जिसके चलते लोग लगातार विरोध कर रहे हैं।
छात्रों में नाराजगी, तीन गुना बढ़े दाम
Indore सिटी बसों में रोजाना सफर करने वाले छात्रों का कहना है कि पहले उन्हें जो पास लगभग 200 रुपये में मिल जाता था, अब उसकी कीमत बढ़कर करीब 600 रुपये हो गई है। कई छात्रों के अनुसार, पहले यह पास तीन महीने तक चल जाता था, लेकिन अब इतनी ही राशि सिर्फ एक महीने के लिए पर्याप्त है।
Indore के विभिन्न कॉलेजों में पढ़ने वाले बाहरी जिलों के छात्रों ने बताया कि वे हॉस्टल या किराए के कमरे में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं और रोजाना बस से कॉलेज आना-जाना करते हैं। ऐसे में बढ़ी हुई कीमत उनके मासिक खर्च को काफी बढ़ा रही है।
छात्राओं ने जताई चिंता
सिवनी की रहने वाली छात्रा सलोनी, जो होलकर साइंस कॉलेज में पढ़ाई कर रही है, ने बताया कि वह तेजाजी नगर इलाके में रहती हैं और रोजाना सिटी बस से सफर करती हैं। उनके अनुसार पहले बस पास की कीमत बहुत कम थी और आसानी से मैनेज हो जाती थी, लेकिन अब तीन गुना बढ़ोतरी ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
उन्होंने कहा कि पहले 600 रुपये में तीन महीने का काम हो जाता था, लेकिन अब यही राशि सिर्फ एक महीने के लिए खर्च करनी पड़ रही है। इससे उनका बजट बिगड़ रहा है और पढ़ाई पर भी असर पड़ सकता है।
इसी तरह एक अन्य छात्रा वीणा, जो सिवनी जिले से आकर इंदौर में पढ़ाई कर रही है, ने बताया कि कई बार बस पास की प्रक्रिया भी प्रभावित रही और अब कीमत बढ़ने से समस्या और गंभीर हो गई है। उनका कहना है कि बस पास को पहले की तरह सस्ता किया जाना चाहिए।
रोजाना सफर करने वाले छात्रों की परेशानी
पालदा इलाके के छात्र लक्ष्य ने बताया कि वह कोचिंग के लिए भंवरकुआं तक सिटी बस से आते-जाते हैं। उनके अनुसार कीमतें तीन गुना बढ़ने से सफर महंगा हो गया है और अब उन्हें दूसरे विकल्पों पर भी विचार करना पड़ सकता है।
छात्रों का कहना है कि बसों का इंतजार भी लंबा होता है, ऐसे में पहले से महंगे पास के साथ यह सफर और कठिन हो गया है। कई छात्रों ने तो पास रिचार्ज करना ही बंद कर दिया है।
व्यापारियों पर भी असर
सिर्फ छात्र ही नहीं, बल्कि छोटे व्यापारियों पर भी इसका असर पड़ रहा है। एक हार्डवेयर व्यापारी चंदू शिंदे ने बताया कि उन्हें पूरे शहर में काम के सिलसिले में घूमना पड़ता है और वे सिटी बस पर निर्भर रहते हैं। लेकिन अब बढ़ी हुई कीमतों से उनका खर्च बढ़ जाएगा। उनका कहना है कि पास की कीमतों में कमी होनी चाहिए ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।
नगर निगम मुख्यालय पर प्रदर्शन
बढ़ी हुई कीमतों के विरोध में गुरुवार को बड़ी संख्या में छात्रों ने नगर निगम इंदौर मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने पास की कीमतों को कम करने की मांग की और प्रशासन को ज्ञापन भी सौंपा।
छात्रों का कहना था कि यह फैसला सीधे तौर पर उनके शिक्षा बजट को प्रभावित कर रहा है। कई छात्रों ने कहा कि वे पहले से ही आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं और अब यह बढ़ोतरी उनकी मुश्किलें और बढ़ा रही है।
प्रशासन का पक्ष
AICTSL के सीईओ अर्थ जैन ने बताया कि महापौर पास योजना बंद हो चुकी है, क्योंकि कंपनी नगर निगम से हटकर परिवहन विभाग के अंतर्गत आ गई है। पहले जो पास 800 रुपये का था, वह महापौर योजना के कारण 200 रुपये में उपलब्ध था।
उन्होंने बताया कि योजना बंद होने के बाद अब स्टैंडर्ड प्राइसिंग लागू की गई है। सामान्य पास 1200 रुपये का और स्पेशल पास 600 रुपये का रखा गया है। छात्रों, सीनियर सिटीजन और दिव्यांगों के लिए स्पेशल पास श्रेणी में सुविधा दी गई है।
सब्सिडी का दावा
प्रशासन के अनुसार, AICTSL द्वारा लगभग 50% सब्सिडी दी जा रही है ताकि यात्रियों पर अधिक बोझ न पड़े। उनका कहना है कि अगर सब्सिडी नहीं होती तो कीमतें और अधिक हो सकती थीं। साथ ही बसों की संख्या और रूट बढ़ाने की योजना पर भी काम किया जा रहा है ताकि यात्रियों को राहत मिले।
आंदोलन की चेतावनी
छात्र संगठन जयस के जिला अध्यक्ष पवन अहिरवार ने चेतावनी दी है कि यदि बस पास की कीमतें कम नहीं की गईं तो बड़ा आंदोलन और घेराव किया जाएगा। छात्रों का कहना है कि यह मुद्दा सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि शिक्षा से भी जुड़ा है।
निष्कर्ष
Indore में बस पास की कीमतों में हुई बढ़ोतरी ने छात्रों और आम यात्रियों दोनों को प्रभावित किया है। महापौर पास योजना के बंद होने के बाद जहां प्रशासन इसे प्रशासनिक बदलाव बता रहा है, वहीं छात्र इसे अपने बजट पर सीधा हमला मान रहे हैं। अब सभी की नजर इस पर है कि प्रशासन इस मुद्दे का समाधान कैसे निकालता है।
