INDORE: कलेक्टर शिवम वर्मा का आदेश जानलेवा चायनीज धागा पूरी तरह प्रतिबंधित, उल्लंघन करने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई
INDORE जिले में मानव जीवन के साथ-साथ पशु और पक्षियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जिला प्रशासन ने पतंगबाजी में इस्तेमाल होने वाले चायनीज धागे पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया है। यह प्रतिबंध न केवल चायनीज धागे के उपयोग पर लागू होगा, बल्कि इसके भंडारण, बिक्री और परिवहन पर भी पूरी तरह रोक रहेगी। INDORE प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह प्रतिबंध 23 जनवरी 2026 तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान यदि कोई भी व्यक्ति या व्यापारी नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
INDORE प्रशासन का स्पष्ट संदेश: नियमों का पालन अनिवार्य
INDORE जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने आम नागरिकों, दुकानदारों, पतंग विक्रेताओं और थोक व्यापारियों से साफ शब्दों में कहा है कि वे इस प्रतिबंध का पूरी तरह पालन करें। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि आदेश की अवहेलना करने वालों को किसी भी तरह की राहत नहीं दी जाएगी। प्रतिबंध का उद्देश्य केवल नियम बनाना नहीं, बल्कि लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। प्रशासन का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में चायनीज धागे के कारण कई गंभीर घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें आम नागरिक, दोपहिया वाहन चालक, पशु और पक्षी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इन्हीं घटनाओं से सबक लेते हुए इस बार पहले से ही सख्त कदम उठाए गए हैं।
INDORE कलेक्टर द्वारा पहले ही जारी हो चुके हैं आदेश
इस संबंध में INDORE कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी शिवम वर्मा ने 25 नवंबर को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए थे। इन आदेशों के तहत जिले की संपूर्ण सीमा में चायनीज धागे का निर्माण, भंडारण, विक्रय और उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति इस आदेश का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले भी INDORE में ऐसे मामलों में कार्रवाई की जा चुकी है, जिसमें दुकानों से चायनीज धागा जब्त किया गया और संबंधित लोगों पर कानूनी प्रकरण दर्ज किए गए।

पक्षियों और राहगीरों के लिए बन रहा है जानलेवा खतरा
चायनीज धागा अत्यधिक मजबूत और धारदार होता है, जो इसे बेहद खतरनाक बनाता है। पतंगबाजी के दौरान यह धागा हवा में फैलकर पक्षियों के लिए जानलेवा साबित होता है। कई बार पक्षी उड़ते समय इस धागे में उलझ जाते हैं, जिससे उनके पंख कट जाते हैं या गले में फंसने से उनकी मौत हो जाती है। इतना ही नहीं, सड़क पर चलने वाले राहगीर और दोपहिया वाहन चालक भी इस धागे की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। कई मामलों में लोगों के गले, हाथ और चेहरे पर गहरे घाव आए हैं। प्रशासन का कहना है कि चायनीज धागे की अत्यधिक मजबूती और धार इसकी सबसे बड़ी समस्या है, जो सामान्य सूती धागे की तुलना में कहीं अधिक खतरनाक है।
पशु-पक्षियों के साथ-साथ स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव
INDORE प्रशासन के अनुसार, चायनीज धागे का दुष्प्रभाव केवल दुर्घटनाओं तक सीमित नहीं है। यह पशु-पक्षियों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर नकारात्मक असर डालता है। घायल पक्षियों का उपचार करना मुश्किल हो जाता है और कई बार वे स्थायी रूप से उड़ने में असमर्थ हो जाते हैं। इसके अलावा, आम लोगों के लिए भी यह धागा स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद खतरनाक है। अचानक संपर्क में आने पर यह त्वचा को गहराई तक काट सकता है, जिससे गंभीर चोट लगने की आशंका रहती है। यही कारण है कि INDORE प्रशासन ने इसे पतंगबाजी के लिए पूरी तरह अनुपयुक्त और खतरनाक माना है।
मकर संक्रांति के मद्देनजर लिया गया सख्त फैसला
मकर संक्रांति का पर्व नजदीक है और इस दौरान INDORE सहित पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने पर पतंगबाजी की जाती है। हर साल इस समय पतंगबाजी से जुड़ी दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने पहले से ही सख्त कदम उठाते हुए चायनीज धागे पर प्रतिबंध लागू किया है। प्रशासन का उद्देश्य है कि त्योहार के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना न हो और लोग सुरक्षित माहौल में पर्व का आनंद ले सकें। इसके लिए पुलिस और प्रशासन की टीमें बाजारों, दुकानों और गोदामों में नियमित रूप से जांच अभियान चलाएंगी। संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी और जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
नागरिकों से सहयोग की अपील
INDORE जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस प्रतिबंध को केवल कानूनी आदेश न समझें, बल्कि इसे सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में लें। पतंगबाजी का आनंद लेते समय सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल धागे का ही उपयोग करें। यदि कहीं भी चायनीज धागे की बिक्री या उपयोग की जानकारी मिलती है, तो इसकी सूचना तुरंत प्रशासन या पुलिस को दें। INDORE प्रशासन का कहना है कि जनसहयोग से ही इस प्रतिबंध को प्रभावी बनाया जा सकता है। यदि सभी लोग नियमों का पालन करेंगे, तो न केवल दुर्घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि पशु-पक्षियों की जान भी बचाई जा सकेगी।
