सिहोर (मध्य प्रदेश) — आस्था के नाम पर हुई भारी लापरवाही ने कांवड़ यात्रा को मातम में बदल दिया। 40 से ज्यादा लोग लापता हैं, कई बीमार अस्पतालों में तड़प रहे हैं, और सात मृतकों को पंडित प्रदीप मिश्रा ने “बीमार” बताकर अपनी जिम्मेदारी से किनारा कर लिया।
प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने के बजाय अधिकारियों ने “ज्यादा शोर” मचाने का बहाना बनाकर आठ डीजे वाहन जब्त कर अपनी खानापूर्ति पूरी कर ली। पिछले हादसों से सबक लेने के बजाय अफसरों ने बिना जांच-पड़ताल के अनुमतियों पर मुहर लगाई, और अब “अनुमान से ज्यादा भीड़” का हवाला देकर हाथ खड़े कर दिए।
जिला अस्पताल के बिस्तरों पर बीमार कांवड़िए इलाज का इंतजार कर रहे हैं, जबकि कई परिवार अपने लापता प्रियजनों की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं। आयोजकों के बेशर्म रवैये और प्रशासनिक लापरवाही ने इस धार्मिक आयोजन को एक भयावह त्रासदी में बदल दिया है।
सिहोर – कांवड़ यात्रा में लापरवाही के चौंकाने वाले पहलू उजागर
कुबेरेश्वर धाम में कांवड़ यात्रा के दौरान हुई सात मौतों और 40 से ज्यादा लोगों के लापता होने के बाद अब इस आयोजन की खामियां सामने आ रही हैं।
पंडित प्रदीप मिश्रा ने यात्रा की अनुमति तो सिहोर प्रशासन से ली, लेकिन अनुमानित भीड़ का आंकड़ा तक नहीं बताया। भीड़ नियंत्रण के लिए आयोजकों ने कोई ठोस व्यवस्था नहीं की और पूरा भार प्रशासन पर डाल दिया।
धाम में रहने, ठहरने और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव रहा। श्रद्धालुओं को पीने का पानी तक नहीं मिला। भीड़ जुटाने के लिए इस बार भी “अभिमंत्रित रुद्राक्ष” वितरण का प्रचार किया गया, जिसके लालच में लोग उमड़ पड़े। प्रशासन ने इस पर रोक लगाने की जरूरत नहीं समझी।
भीड़ नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग दिनों में अलग-अलग राज्यों के श्रद्धालुओं को बुलाने का विकल्प मौजूद था, लेकिन हर कथा में प्रचार किया गया कि “एक जोड़ी कपड़े में आइए, धाम पर सभी इंतजाम मिलेंगे।” नतीजा—लोगों को पानी जैसी बुनियादी जरूरत भी पूरी नहीं हुई।
सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया
कांवड़ यात्रा की लापरवाही को लेकर लोग सोशल मीडिया पर जमकर सवाल उठा रहे हैं—
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“आयोजन करेंगे मिश्रा जी, फेमस होंगे मिश्रा जी, करोड़ों कमाएंगे मिश्रा जी… और इंतजाम करे सरकार।”
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“अगर एक छोटी सी कांवड़ यात्रा नहीं संभल रही, तो सिंहस्थ कैसे संभालेगी सरकार? करोड़ों श्रद्धालुओं की जान दांव पर होगी।”
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“पैसा आपका, जान आपकी, सड़क आपकी… आम इंसान किस्मत के मारे आपके पास आकर जान देने आए थे।”
