Indore में दूषित पानी से मौत के बाद कांग्रेस का हल्ला: विधायक निवास घेराव, भाजपा सरकार पर हमला
Indore , नर्मदापुरम। Indore के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने के कारण मौत के मामले ने पूरे प्रदेश में हलचल मचा दी है। आज कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर नर्मदापुरम में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देश पर नर्मदापुरम कांग्रेस कमेटी ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं नर्मदापुरम विधायक सीतासरन शर्मा के इटारसी स्थित निवास का घेराव किया।
हालांकि, पुलिस ने कांग्रेसियों को विधायक निवास से कुछ दूरी पर ही रोक दिया। सुरक्षा के लिए पुलिस ने बेरिकेट्स लगाकर कांग्रेसियों को आगे बढ़ने से रोका। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बेरिकेट्स पर चढ़कर विधायक निवास तक पहुँचने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक लिया। इस दौरान कांग्रेसियों ने मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष शिवाकांत पांडेय ने बताया कि इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से आज 17वीं मौत दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि केवल तीन अधिकारियों के ट्रांसफर और सस्पेंड कर देने से सरकार ने अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं की है। पांडेय ने कहा, “प्रदेश अध्यक्ष के निर्देशानुसार सरकार को नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का इस्तीफा लेना चाहिए और महापौर पुष्यमित्र भार्गव को तत्काल बर्खास्त करना चाहिए।”
कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं की तो आगामी 11 जनवरी को प्रदेश स्तर पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। शिवाकांत पांडेय ने कहा कि कांग्रेस का आंदोलन केवल प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे प्रदेश में जन आंदोलन के रूप में सरकार को घेरा जाएगा।
कांग्रेस ने कहा कि इंदौर में पानी की गुणवत्ता जांच और वितरण व्यवस्था पूरी तरह विफल हो चुकी है। लोगों को साफ पानी नहीं मिल रहा, और प्रशासन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि भाजपा सरकार केवल आधिकारिक कार्रवाई और दिखावे के लिए कार्रवाई कर रही है, जबकि जमीन पर हालात वही बने हुए हैं।
विधायक निवास पर घेराव और पुलिस कार्रवाई
आज के प्रदर्शन में कांग्रेसियों ने पहले इटारसी विधायक निवास के बाहर जमा होकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बेरिकेट्स पर चढ़कर आगे बढ़ने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। पुलिस ने बताया कि सुरक्षा कारणों से यह कदम उठाया गया। इस दौरान प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहने की कोशिश की गई, लेकिन कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बनी रही।
कांग्रेस के नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन लोगों के अधिकारों की रक्षा और मौत के मामलों की गंभीर जांच सुनिश्चित करने के लिए किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं की और केवल दिखावे के लिए अधिकारियों के ट्रांसफर और सस्पेंडमेंट जैसी मामूली कार्रवाई की।

भागीरथपुरा में स्थिति गंभीर
Indore के भागीरथपुरा क्षेत्र में पानी की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कई महीनों से उन्हें साफ पानी नहीं मिल रहा। इलाके में पानी का रंग और गंध संदिग्ध है, जिससे कई लोग बीमार हो चुके हैं। पिछले कुछ हफ्तों में पानी की वजह से कई लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
Congress ने कहा कि यह समस्या सिर्फ इंदौर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश में नगरीय प्रशासन की विफलता के कारण जल संकट गहराता जा रहा है। कांग्रेस नेताओं ने भाजपा सरकार पर जनता के स्वास्थ्य और जीवन के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया।
सरकार की ओर से की गई कार्रवाई पर सवाल
Congress का कहना है कि केवल तीन अधिकारियों के ट्रांसफर और सस्पेंडमेंट से मामले का समाधान नहीं होगा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने स्पष्ट किया कि मंत्री और महापौर को तत्काल बर्खास्त करना आवश्यक है। उनका कहना है कि जनता के जीवन से जुड़े मुद्दों पर सरकार की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
Congress ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने 11 जनवरी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो प्रदेश स्तर पर व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा। यह आंदोलन केवल प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लोगों के अधिकारों और जीवन की सुरक्षा के लिए सड़कों पर जन आंदोलन के रूप में तब्दील होगा।
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निष्कर्ष
Indore में दूषित पानी पीने से हुई मौतों का मामला सिर्फ एक स्थानीय समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरे मध्यप्रदेश के नगरीय प्रशासन की विफलता को उजागर करता है। Congress ने इस मामले को गंभीरता से उठाते हुए जनता और प्रशासन दोनों पर दबाव बनाया है। आगामी 11 जनवरी को होने वाला आंदोलन इस मुद्दे को और व्यापक राजनीतिक रूप दे सकता है।
इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि जनता और विपक्ष के दबाव के बिना प्रशासन की प्रतिक्रिया अधूरी और अपूर्ण है। भविष्य में सरकार की संवेदनशीलता और कार्रवाई इस विवाद का निर्धारण करेगी।
