Indore में उद्योगपति से 1.90 करोड़ की धोखाधड़ी, 7.45 करोड़ के मकान सौदे में बड़ा फ्रॉड
Indore में रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़ा एक बड़ा धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जिसमें शहर के ऑटोमोबाइल उद्योगपति दिलीप वाधवानी से 1.90 करोड़ रुपये की ठगी का आरोप लगाया गया है। यह पूरा मामला 7.45 करोड़ रुपये की एक प्रॉपर्टी डील से जुड़ा है, जिसने अब कानूनी विवाद का रूप ले लिया है।
पलासिया थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर तीन लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामला सामने आने के बाद शहर के कारोबारी जगत में भी इस घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
प्रॉपर्टी ब्रोकर के जरिए शुरू हुई बातचीत
जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब प्रॉपर्टी ब्रोकर अर्जुन सोनी के माध्यम से उद्योगपति दिलीप वाधवानी की मुलाकात पुनीत खंडेलवाल, उनकी पत्नी श्रद्धा खंडेलवाल और उनके पिता बालकृष्ण खंडेलवाल से हुई।
तीनों आरोपियों ने इंदौर के साकेत नगर स्थित अपने तीन मंजिला बंगले को बेचने की इच्छा जताई। शुरुआती बातचीत में संपत्ति की स्थिति, कीमत और कानूनी दस्तावेजों को लेकर चर्चा हुई। आरोपियों ने भरोसा दिलाया कि मकान पूरी तरह वैध है और किसी भी तरह की कानूनी अड़चन नहीं है।
इसके बाद दोनों पक्षों के बीच सौदे को लेकर सहमति बनी और कीमत 7.45 करोड़ रुपये तय की गई।
20 फरवरी 2026 को हुआ एग्रीमेंट
सौदे को अंतिम रूप देने के लिए 20 फरवरी 2026 को एक लिखित इकरारनामा तैयार कराया गया। इस समझौते में यह तय किया गया था कि भुगतान चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा और रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी होने पर अंतिम हस्तांतरण किया जाएगा।
इसी समझौते के बाद शिकायतकर्ता ने आरोपियों पर भरोसा जताते हुए शुरुआती भुगतान किया।
1.90 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन
पीड़ित दिलीप वाधवानी का कहना है कि उन्होंने आरोपियों के बैंक खातों में लगभग 1.90 करोड़ रुपये आरटीजीएस के माध्यम से ट्रांसफर किए। यह राशि सौदे के एडवांस और शुरुआती भुगतान के रूप में दी गई थी।
आरोप है कि भुगतान के समय यह आश्वासन दिया गया था कि मकान पर चल रहा बैंक लोन जल्द चुका दिया जाएगा और इसके बाद रजिस्ट्री की प्रक्रिया बिना किसी देरी के पूरी कर दी जाएगी।
वादा पूरा नहीं हुआ, बढ़ने लगा शक
समय बीतने के साथ जब रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी तो शिकायतकर्ता को संदेह होने लगा। आरोप है कि बार-बार संपर्क करने के बावजूद आरोपी टालमटोल करते रहे और स्पष्ट जवाब देने से बचते रहे।
कुछ समय बाद यह भी सामने आया कि मकान से जुड़े बैंक लोन का भुगतान नहीं किया गया है, जिससे पूरा सौदा अधर में लटक गया।
अन्य खरीदारों से संपर्क का आरोप
जांच के दौरान यह भी आरोप सामने आया है कि सौदा तय होने के बाद भी आरोपियों ने मकान को लेकर अन्य संभावित खरीदारों से बातचीत शुरू कर दी थी। बताया जा रहा है कि वे अधिक कीमत पर संपत्ति बेचने की कोशिश कर रहे थे।
इस वजह से मूल सौदे को जानबूझकर लटकाया गया और शिकायतकर्ता को गुमराह किया गया।
शिकायत के बाद मामला दर्ज
जब पीड़ित को पूरी स्थिति स्पष्ट हुई तो उन्होंने सभी दस्तावेजों और बैंक ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड के साथ पलासिया थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने प्राथमिक जांच के बाद तीनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर लिया है।
पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है, जिसमें बैंक ट्रांजेक्शन, एग्रीमेंट और संपत्ति के कानूनी दस्तावेजों की जांच शामिल है।
पुलिस जांच में जुटी टीम
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहन जांच की जा रही है। आरोपियों से पूछताछ के लिए उन्हें नोटिस जारी किया जा सकता है। इसके अलावा प्रॉपर्टी ब्रोकर की भूमिका की भी जांच की जा रही है कि सौदे में उसकी क्या भूमिका रही।
रियल एस्टेट में बढ़ते फ्रॉड पर सवाल
यह मामला एक बार फिर इंदौर में रियल एस्टेट सेक्टर में बढ़ते धोखाधड़ी के मामलों की ओर इशारा करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना रजिस्ट्री और पूरी कानूनी जांच के बड़े वित्तीय लेनदेन करना जोखिम भरा हो सकता है।
निष्कर्ष
इंदौर का यह मामला न केवल एक वित्तीय धोखाधड़ी का उदाहरण है, बल्कि यह भी दिखाता है कि रियल एस्टेट सौदों में सावधानी और कानूनी प्रक्रिया का पालन कितना जरूरी है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और आगे की कार्रवाई जारी है।
