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Indore Bhagirathpura Water Crisis : सड़ी लाश और नलों में शौचालय जैसा दूषित पानी, प्रशासन की लापरवाही उजागर

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Published On: 31 December 2025
Indore Bhagirathpura Water Crisis: Rotten Corpses and Sewage-Like Contaminated Water Shake City, Authorities Face Severe Criticism
— Indore Bhagirathpura Water Crisis: Rotten Corpses and Sewage-Like Contaminated Water Shake City, Authorities Face Severe Criticism

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इंदौर Bhagirathpura जल संकट: सड़ी लाश और दूषित नलों की त्रासदी

इंदौर का Bhagirathpura क्षेत्र इस समय एक गंभीर स्वास्थ्य और जल संकट का सामना कर रहा है। यहाँ के लोगों को वर्षों से पेयजल की समस्या झेलनी पड़ रही है, लेकिन हाल ही में हुए कांड ने इसे चरम पर पहुँचाया है। सुभाष चौक की पानी टंकी में सड़ी लाश मिलने के बावजूद उसी पानी की सप्लाई लोगों तक होती रही, और अब नर्मदा की मुख्य पाइपलाइन में पुलिस चौकी के शौचालय का पानी मिलकर घर-घर पहुंच रहा है।

इस घटना के कारण अब तक आठ परिवारों में मौत का मातम छाया है और हजारों लोग बीमार हो चुके हैं। यह सिर्फ प्रशासन की लापरवाही नहीं, बल्कि सीधे-सीधे अमानवीय अपराध की श्रेणी में आता है।

ट्रिपल इंजन सरकार और हकीकत की खाई

बीते कई वर्षों से नगर निगम पर भाजपा का शासन है, जिसे ‘ट्रिपल इंजन सरकार’ कहकर प्रचारित किया जाता है। मगर हकीकत यह है कि मध्यप्रदेश की औद्योगिक राजधानी इंदौर आज भी अपने नागरिकों को सुरक्षित पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा नहीं दे पा रही। वही शहर, जिसे जनता ने आठ बार देश में स्वच्छता में नंबर वन बनाया, अब लोगों को शौचालय का पानी पीने को मजबूर कर रहा है।

अवॉर्ड लेने के समय नेता और अफसर मंच पर मुस्कुराते हैं, लेकिन जिम्मेदारी निभाने की बारी पर आरोप-प्रत्यारोप का खेल शुरू हो जाता है। नगर निगम में महापौर से लेकर अधिकांश पार्षद भाजपा के हैं, जिले की सभी नौ विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है और प्रदेश व केंद्र दोनों सरकारें भी उसी पार्टी के नेतृत्व में हैं—फिर भी कोई जवाबदेही सामने नहीं आती।

ताकतवर मंत्री और प्रशासन की विफलता

यह हादसा उस क्षेत्र में हुआ है, जहाँ के विधायक प्रदेश के काबीना मंत्री कैलाश विजयवर्गीय हैं, जो नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के मुखिया भी हैं। इसका मतलब है कि इंदौर सहित पूरे प्रदेश के नगरीय निकाय सीधे उनके अधीन आते हैं।

इस गंभीर घटना के बावजूद प्रशासन और मंत्री तक जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं दिखे। यह सवाल उठता है कि जब राजधानी के सबसे चर्चित शहर में ऐसी त्रासदी हो रही है, तब जिम्मेदारी किसकी बनती है?

इंदौर की जनता, जो टैक्स भरने, रोजमर्रा की रिश्वतखोरी झेलने और ऐसी त्रासदियों के बावजूद बड़े जन आंदोलन के लिए नहीं उतरती, अपनी सहनशीलता के लिए काबिल-ए-तारीफ है। दूसरी ओर विपक्ष गुटबाजी में फंसा हुआ है और जनता की आवाज बनने में असफल नजर आता है।

मौतों के आंकड़े और सच्चाई छुपाने की कोशिशें

Bhagirathpura में दूषित पानी के कारण एक हफ्ते में आठ मौतें हुई हैं, जबकि सरकारी आंकड़ों में केवल तीन मौतों की पुष्टि की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 70 वर्षीय नंदलाल, 60 वर्षीय उर्मिला और 65 वर्षीय तारा कोरी की मौत डायरिया से हुई।

स्थानीय लोग दावा कर रहे हैं कि मरने वालों की संख्या इससे कहीं अधिक है। ऐसे हादसों के बाद सरकारी मशीनरी अक्सर आंकड़े दबाने और सच्चाई नरम करने की कोशिश करती रही है। यह बार-बार उजागर करता है कि जनता और प्रशासन के बीच कितनी बड़ी खाई है।

स्वास्थ्य सेवाओं और राहत प्रयास

इस घटना के तुरंत बाद कलेक्टर शिवम वर्मा और नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने स्वास्थ्य शिविरों का निरीक्षण किया और अस्पताल में भर्ती मरीजों से हालचाल जाना।

  • डोर-टू-डोर सर्वे: 30 से अधिक टीमों ने घर-घर जाकर संक्रमित और बीमार लोगों की पहचान की।
  • शुद्ध पेयजल की व्यवस्था: प्रभावित क्षेत्र में टैंकरों से साफ पानी पहुंचाया गया।
  • नि:शुल्क उपचार: स्वास्थ्य शिविरों में दवाइयां और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था की गई।

इसके अलावा मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नगर निगम के जोनल अधिकारी और पीएचई के प्रभारी को तत्काल निलंबित कर दिया। मृतक परिवारों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और घायलों का मुफ्त इलाज सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया।

संवेदनहीनता और जनता का गुस्सा

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा आक्रोश नेताओं और जनप्रतिनिधियों की संवेदनहीन छवियों को लेकर है। महापौर की सोशल मीडिया टीम ने ‘मन व्यथित’ होने की पोस्ट डाली, लेकिन उसी दौरान चाय-बिस्किट, दावत और सफाईकर्मियों के साथ पोहा पार्टी की तस्वीरें वायरल हुईं।

क्षेत्रीय पार्षद कमल वाघेला की झूला झूलते तस्वीरें सामने आईं और उन्होंने अफसरों पर टेंडर समय पर न जारी करने का आरोप लगाया। जल समिति के प्रभारी और अन्य जिम्मेदार लोग भी समारोहों और दावतों में व्यस्त दिखे। सवाल साफ है—जब लोग अस्पतालों में तड़प रहे थे और घरों में मौत का सन्नाटा था, तब शहर के कर्णधार किस दुनिया में थे?

इंदौर आज सिर्फ दूषित पानी की त्रासदी नहीं, बल्कि एक संवेदनहीन और गैर-जवाबदेह व्यवस्था की मार झेल रहा है।

निष्कर्ष

भागीरथपुरा जल संकट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सिर्फ प्रशासनिक योजनाएं और बड़े-बड़े वादे किसी शहर की सुरक्षा के लिए पर्याप्त नहीं हैं। नागरिकों की जान और स्वास्थ्य सर्वोपरि होना चाहिए, लेकिन इंदौर में इसका सही पालन नहीं हुआ। सरकार और जिम्मेदार अधिकारी जनता की आवाज को नजरअंदाज कर रहे हैं।

भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए त्वरित कार्यवाही, समय पर निरीक्षण, शुद्ध पेयजल की निरंतर सप्लाई और जिम्मेदार अधिकारियों के प्रति कड़ी जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। जनता की सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं की रक्षा प्रशासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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