Indore में बाल विवाह की कोशिश नाकाम: 13 साल की लड़की की 42 वर्षीय व्यक्ति से शादी रुकवाई गई
Indore जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक नाबालिग लड़की की शादी एक 42 वर्षीय व्यक्ति से कराई जाने की तैयारी चल रही थी। यह मामला बाल विवाह से जुड़ा हुआ है, जिसे महिला एवं बाल विकास विभाग की सतर्कता के चलते समय रहते रोक दिया गया। विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर पूरी प्रक्रिया को रुकवा दिया और मामले की जांच शुरू कर दी है।
हेल्पलाइन से मिली सूचना पर हुई कार्रवाई
पूरा मामला Indore जिले के राऊ क्षेत्र के रंगवासा गांव का है। महिला एवं बाल विकास विभाग को चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर के जरिए सूचना मिली थी कि गांव में एक नाबालिग लड़की की शादी कराई जा रही है। सूचना मिलते ही विभाग की टीम तुरंत सक्रिय हुई और स्थानीय प्रशासन के साथ मौके पर पहुंच गई।
जांच के दौरान टीम को पता चला कि शादी की तैयारी पूरी तरह से की जा चुकी थी और अगले ही दिन विवाह की रस्में आयोजित होने वाली थीं। हालांकि, अधिकारियों की समय पर कार्रवाई ने इस बाल विवाह को होने से रोक दिया।
उम्र छिपाने के लिए फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल
जांच के दौरान एक और गंभीर खुलासा हुआ कि लड़की की उम्र छिपाने के लिए परिवार ने फर्जी अंकसूची (मार्कशीट) का इस्तेमाल किया था। जब प्रशासन ने दस्तावेजों की जांच की, तो पाया गया कि संबंधित स्कूल ने वह अंकसूची जारी ही नहीं की थी।
जिला शिक्षा अधिकारी से सत्यापन कराने पर यह स्पष्ट हो गया कि दस्तावेज पूरी तरह से फर्जी था। इसके बाद अधिकारियों ने कड़ाई से जांच आगे बढ़ाई।
बालिका की असली उम्र 13 वर्ष निकली
विभागीय जांच में सामने आया कि जिस लड़की की शादी कराई जा रही थी, उसकी वास्तविक उम्र मात्र 13 वर्ष है। वहीं, जिस लड़के की शादी के लिए यह रिश्ता तय किया गया था, उसकी उम्र लगभग 19 वर्ष बताई गई है।
हालांकि, सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि लड़की की शादी किसी 19 वर्षीय युवक से नहीं, बल्कि 42 वर्षीय व्यक्ति से कराई जा रही थी। यह स्थिति बाल विवाह के गंभीर उल्लंघन को दर्शाती है।
बेटी लो, बेटी दो’ परंपरा के नाम पर तय हुआ रिश्ता
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह मामला पारंपरिक ‘बेटी लो, बेटी दो’ जैसी सामाजिक प्रथा से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। इसी प्रथा के तहत 13 वर्षीय लड़की का रिश्ता एक 42 वर्षीय व्यक्ति से तय किया गया था।
सूत्रों के मुताबिक, परिवार में दादा ने अपने 19 वर्षीय पोते की शादी के बदले में यह रिश्ता तय किया था। यह शादी उज्जैन स्थित एक समाज धर्मशाला में आयोजित की जानी थी, जहां सभी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं।
प्रशासन की सतर्कता से टला बड़ा मामला
जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग की त्वरित कार्रवाई के कारण यह बाल विवाह समय रहते रोक दिया गया। यदि टीम समय पर नहीं पहुंचती, तो यह अवैध विवाह संपन्न हो सकता था।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नाबालिग की शादी कराना कानूनन अपराध है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही परिवार के सदस्यों से पूछताछ की जा रही है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
बाल विवाह के खिलाफ लगातार अभियान जारी
महिला एवं बाल विकास विभाग लगातार प्रदेश में बाल विवाह रोकने के लिए जागरूकता अभियान चला रहा है। विभाग का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी कई जगहों पर पुरानी परंपराओं के कारण बाल विवाह की घटनाएं सामने आती हैं, जिन्हें रोकने के लिए समाज का सहयोग जरूरी है।
निष्कर्ष
Indore का यह मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि बाल विवाह जैसी कुप्रथाएं अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। हालांकि, प्रशासन की सक्रियता और हेल्पलाइन सिस्टम की वजह से एक बड़ी अनहोनी को रोका जा सका। यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी भी है कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा और कानून का पालन सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।
