IndiGo की मुश्किलें बढ़ीं, मुनाफे में भारी गिरावट से निवेशकों को झटका
देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो (IndiGo) की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। IndiGo की पैरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर–दिसंबर) के नतीजे जारी किए, जिसमें कंपनी के कंसॉलिडेटेड मुनाफे में सालाना आधार पर 77.55 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई है। कमजोर नतीजों का सीधा असर शेयर बाजार में देखने को मिला और इंडिगो के शेयरों में जोरदार बिकवाली हुई।
दिसंबर तिमाही में 549.8 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ
इंटरग्लोब एविएशन ने तीसरी तिमाही में 549.8 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया है, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी का मुनाफा कहीं अधिक था। मुनाफे में इतनी बड़ी गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, इस दौरान कंपनी की कुल आय में बढ़ोतरी देखने को मिली, लेकिन बढ़ते खर्चों ने मुनाफे को बुरी तरह प्रभावित किया।
शेयर बाजार में इंडिगो के शेयर धड़ाम
तिमाही नतीजों के बाद शुक्रवार, 23 जनवरी को शेयर बाजार में IndiGo के शेयरों पर दबाव साफ नजर आया। बीएसई पर इंडिगो का शेयर पिछले बंद भाव 4,913.80 रुपये के मुकाबले गिरकर 4,840.10 रुपये पर खुला। शुरुआती कारोबार में यह करीब 4 फीसदी टूटकर 4,723.60 रुपये के इंट्रा-डे लो तक पहुंच गया। हालांकि, दिन के कारोबार में कुछ रिकवरी देखने को मिली, लेकिन शेयर लाल निशान में ही बना रहा।
मुनाफा गिरने की सबसे बड़ी वजह क्या रही?
IndiGo के मुनाफे में भारी गिरावट की सबसे बड़ी वजह नए लेबर कानूनों का लागू होना बताया जा रहा है। इन नए श्रम कानूनों के तहत कंपनियों को कर्मचारियों से जुड़े पुराने बकाया भुगतानों का एकमुश्त निपटान करना पड़ा है। इसमें ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट, ओवरटाइम और सोशल सिक्योरिटी से जुड़े कई लाभ शामिल हैं, जो पहले पूरी तरह लागू नहीं थे।
इन भुगतानों की वजह से इंडिगो पर एक साथ बड़ा वित्तीय बोझ पड़ा, जिससे कंपनी के खर्चों में जबरदस्त इजाफा हुआ।

सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव से बढ़ा खर्च
नए श्रम कानूनों के अनुसार कंपनियों को बेसिक सैलरी का अनुपात बढ़ाना पड़ा है। बेसिक सैलरी बढ़ने से PF, ग्रेच्युटी, पेंशन और ESIC जैसे खर्च भी ज्यादा रकम पर कैलकुलेट होने लगे। इसका सीधा असर इंडिगो की कुल वेतन लागत पर पड़ा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन सभी कारणों से कंपनी को करीब 969.3 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा, जिसने मुनाफे को बुरी तरह दबाव में डाल दिया।
ईंधन कीमतें और रुपये की कमजोरी भी बनी चिंता
लेबर लागत के अलावा एविएशन सेक्टर की पुरानी समस्या—ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव—भी इंडिगो के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। इसके साथ ही रुपये की कमजोरी से विमान लीज, मेंटेनेंस और अन्य विदेशी खर्च महंगे हो गए हैं।
निवेशकों को यह भी डर सता रहा है कि आने वाले समय में विमानों की कमी हो सकती है, जिससे इंडिगो को ज्यादा कीमत पर विमान लीज पर लेने पड़ सकते हैं। इससे परिचालन लागत और बढ़ने की आशंका है।
आय बढ़ी, लेकिन मुनाफा क्यों घटा?
दिलचस्प बात यह है कि मुनाफा घटने के बावजूद इंडिगो की कुल आय में वृद्धि दर्ज की गई है। इसका मतलब साफ है कि कंपनी का बिजनेस ग्रो कर रहा है, यात्रियों की संख्या बढ़ रही है और टिकट बिक्री मजबूत बनी हुई है। लेकिन बढ़ती लागत ने इस ग्रोथ का पूरा फायदा कंपनी को नहीं लेने दिया।

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
ब्रोकरेज फर्म एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज ने इंडिगो के शेयर पर अपनी ‘खरीद’ की रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने इसका टारगेट प्राइस 6,300 रुपये तय किया है। एमके ग्लोबल का मानना है कि आने वाले समय में इंडिगो के ऑपरेशनल परफॉर्मेंस में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिलेगा।
ब्रोकरेज का यह भी कहना है कि वित्त वर्ष 2027-28 तक कंपनी को टैक्स लॉस का फायदा मिलता रहेगा, जिससे भविष्य में मुनाफे पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।
किन जोखिमों पर नजर रखना जरूरी?
विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को कुछ अहम जोखिमों पर नजर बनाए रखनी चाहिए। इनमें रुपये की कमजोरी, ईंधन कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव, वैश्विक आर्थिक सुस्ती और एविएशन सेक्टर से जुड़ी परिचालन चुनौतियां शामिल हैं। इसके अलावा, नए लेबर कानूनों का दीर्घकालिक असर भी कंपनी की लागत संरचना पर बना रह सकता है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर IndiGo की मौजूदा तिमाही के नतीजे निवेशकों के लिए निराशाजनक रहे हैं। मुनाफे में भारी गिरावट ने शेयर पर दबाव बढ़ा दिया है। हालांकि, मजबूत आय, बढ़ती यात्री संख्या और लंबी अवधि की ग्रोथ संभावनाएं अब भी इंडिगो के पक्ष में जाती दिख रही हैं। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि कंपनी बढ़ती लागत को कैसे कंट्रोल करती है और क्या मुनाफे की रफ्तार फिर से पटरी पर लौट पाती है या नहीं।
