भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट स्थापना दिवस: नागदा में अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस का भव्य आयोजन
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट स्थापना दिवस एवं अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस नागदा में भव्य रूप से मनाया गया। देशभर से पदाधिकारियों ने मानव अधिकार संरक्षण, जागरूकता और न्याय के प्रति संकल्प लिया।
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट स्थापना दिवस के अवसर पर नागदा (मध्यप्रदेश) में 10 दिसंबर को अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस अत्यंत भव्य, गरिमामय और ऐतिहासिक रूप से सम्पन्न हुआ। यह समारोह न केवल संगठन की पाँच वर्षीय प्रगति का प्रतीक था, बल्कि देशभर के पदाधिकारियों के एकजुट संकल्प का भी प्रदर्शन था। कार्यक्रम की पहचान मानव अधिकारों के प्रति जागरूकता, समानता, न्याय और मानवता के मूल्यों को आगे बढ़ाने वाले राष्ट्रीय मंच के रूप में हुई।
कार्यक्रम का शुभारंभ — भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट स्थापना दिवस की गरिमा
समारोह की शुरुआत माँ सरस्वती की वंदना और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। मानव अधिकारों के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने वाले इस आयोजन में राष्ट्रीय एकता और अनुशासन का संदेश पूरी शक्ति के साथ प्रकट हुआ। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जिसमें उपस्थित सभी लोगों ने मानवता और मानव अधिकार संरक्षण का संकल्प लिया।
मुख्य अतिथि श्री एम. एस. चंद्रावत का उद्बोधन
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट स्थापना दिवस के इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व प्रधान न्यायाधीश श्री एम. एस. चंद्रावत उपस्थित रहे। उन्होंने मानव अधिकारों की मूल भावना पर जोर देते हुए कहा—
“मानव अधिकार सरकार का दिया हुआ उपहार नहीं, बल्कि जन्म से प्राप्त अधिकार हैं। इनकी रक्षा हर नागरिक, समाज और प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी है।”
उनकी बातों ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी पदाधिकारियों और युवाओं को मानव अधिकारों की लड़ाई में और अधिक सक्रिय होने का संदेश दिया।
राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह यादव का प्रभावी संबोधन
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सुनील सिंह यादव ने भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट स्थापना दिवस को ‘मानव अधिकार चेतना विस्तार वर्ष’ की शुरुआत बताया। उन्होंने कहा—
“हमारा उद्देश्य देश के हर नागरिक को उसके मानव अधिकारों की जानकारी देना और पीड़ितों को न्याय दिलाना है। आने वाले वर्षों में संगठन हर जिले और हर पंचायत में मानव अधिकार जागरूकता अभियान चलाएगा।”
उन्होंने यह भी घोषित किया कि संगठन समाज के शोषितों, पीड़ितों, महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए राहत केंद्र स्थापित करेगा।
विशिष्ट अतिथि एवं पदाधिकारीगण की उपस्थिति
मंच पर उपस्थित प्रमुख पदाधिकारियों में—
प्रेमकुमार वैध (राष्ट्रीय संयोजक),
संतोष सिंह पवार (मध्यप्रदेश अध्यक्ष),
कृष्ण यादव (युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष),
शिवम तिवारी (राष्ट्रीय सचिव),
सुनील सेठिया, डॉ. हरीश शर्मा,
मनीष गुप्ता, जीवनलाल जैन चाय वाले,
युवराज सिंह राठौर, श्रीमती मधु शर्मा,
गोकुल पांचाल, समरथ पुरी गोस्वामी,
अज्जू जैन, विवेक तंवर,
श्रीमती सौंपा चटर्जी, श्रीमती अनीता दुबे,
श्रीमती साधना जैन एवं सुधारानी शर्मा सहित अनेक राज्यों के जिला अध्यक्ष शामिल थे।
देशभर के प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट स्थापना दिवस को राष्ट्रीय महत्व का आयोजन बना दिया।
कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएँ
देशभर के पदाधिकारियों की ऐतिहासिक भागीदारी
संगठन के पाँचवें स्थापना वर्ष में यह पहला अवसर रहा जब लगभग हर राज्य से अध्यक्ष एवं जिला प्रमुख सक्रिय रूप से शामिल हुए।
मानव अधिकार सुरक्षा पर विशेष व्याख्यान
मानव गरिमा, स्वतंत्रता, समानता और संवैधानिक अधिकारों पर गहन चर्चाएँ हुईं।
सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों पर संवाद
विशेष सत्र में बताया गया कि मानव अधिकार न केवल कानूनी अधिकार हैं, बल्कि एक सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की नींव हैं।
राहत और सहायता केंद्रों की घोषणा
पीड़ितों की सहायता के लिए संगठन द्वारा देशभर में केंद्र बनाने की घोषणा की गई।
युवा शक्ति को जोड़ने का संकल्प
नई पीढ़ी को मानव अधिकार जागरूकता मिशन से जोड़ने के लिए विशेष योजना प्रस्तुत की गई।
मानव अधिकार दिवस का उद्देश्य
अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस की मूलभावना पर वक्ताओं ने जोर देते हुए कहा कि—
हर नागरिक को सम्मान, न्याय और समान अवसर मिले।
महिलाएँ, बच्चे, बुजुर्ग एवं कमजोर वर्ग सुरक्षित हों।
किसी भी प्रकार के भेदभाव, हिंसा और शोषण के खिलाफ समाज खड़ा हो।
संविधान द्वारा प्राप्त अधिकारों का प्रचार-प्रसार हो।
समाज में मानवता सर्वोपरि और सह-अस्तित्व की भावना मजबूत हो।
मानव अधिकार: सिर्फ कानून नहीं, जीवन की गरिमा
वक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि मानव अधिकार केवल दस्तावेजों में लिखे हुए शब्द नहीं, बल्कि एक ऐसे समाज का आधार हैं जहाँ व्यक्ति भयमुक्त होकर गरिमा के साथ जीवन जी सके। भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट स्थापना दिवस के इस आयोजन ने इस संदेश को और अधिक मजबूत किया।
कार्यक्रम का समापन
समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। उपस्थित सभी लोगों ने हाथ उठाकर मानवता, न्याय, संवैधानिक मूल्यों और मानव अधिकारों की रक्षा का संकल्प लिया।
संगठन ने घोषणा की कि आने वाले वर्षों में वह गरीबों, पीड़ितों और असहायों के लिए और अधिक सशक्त तरीके से कार्य करेगा।
- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग: https://nhrc.nic.in
- संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार घोषणा पत्र: https://www.un.org/en/
रिपोर्ट: संवाददाता जीवनलाल जैन, नागदा
