नई दिल्ली / मॉस्को।
भारत अपनी वायु रक्षा क्षमताओं को अगले स्तर पर ले जाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार, भारत रूस से अतिरिक्त S-400 Triumf वायु रक्षा प्रणालियाँ खरीदने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। रक्षा और कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि यह मुद्दा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की संभावित दिसंबर यात्रा के दौरान भारत-रूस वार्ता में प्रमुख रूप से उठ सकता है।
यह चर्चा ऐसे समय में हो रही है जब भारत ने हाल ही में अपने ऑपरेशन ‘सिंदूर’ में S-400 की प्रभावशाली भूमिका देखी, जिसने इस प्रणाली की वास्तविक युद्ध क्षमता और आवश्यकता दोनों को रेखांकित किया।
2018 का समझौता और मौजूदा स्थिति
भारत ने 2018 में लगभग 5.5 बिलियन डॉलर का सौदा करते हुए रूस से पाँच S-400 रेजीमेंट खरीदने पर सहमति दी थी। इनमें से तीन रेजीमेंट भारत को प्राप्त हो चुकी हैं, जबकि बाकी दो की डिलीवरी रूस-यूक्रेन युद्ध और उत्पादन शेड्यूल में बदलाव के चलते 2026–27 तक टल गई है।
क्यों अहम है S-400 प्रणाली?
S-400 एक अत्याधुनिक surface-to-air missile defense system है, जो 400 किलोमीटर तक की दूरी पर लड़ाकू विमान, क्रूज़ मिसाइल और ड्रोन को मार गिराने की क्षमता रखता है।
यह प्रणाली मल्टी-लेयर डिफेंस कवरेज देती है और एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक व नष्ट कर सकती है — यही कारण है कि इसे दुनिया की सबसे उन्नत एयर डिफेंस प्रणाली माना जाता है।
रणनीतिक संकेत और चुनौतियाँ
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत अतिरिक्त S-400 यूनिट्स खरीदता है, तो यह कदम देश की एयर-डिफेंस की गहराई और रेंज दोनों को मजबूत करेगा।
हालाँकि, रूस-यूक्रेन युद्ध, वैश्विक सप्लाई चेन दबाव, और अमेरिकी CAATSA प्रतिबंधों की चेतावनियाँ भारत की रणनीतिक संतुलन नीति की परीक्षा भी लेंगी।
निष्कर्ष:
यदि नई डील पर मुहर लगती है, तो भारत की वायु सुरक्षा “अगले दशक की सबसे मजबूत परत” बन सकती है। यह न केवल रक्षा-रणनीति में बड़ा संकेत होगा बल्कि भारत-रूस संबंधों की मजबूती का प्रतीक भी बनेगा।

