भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर वॉशिंगटन में बातचीत, रूस का तेल बना बड़ी अड़चन
नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच इस सप्ताह वॉशिंगटन में व्यापार समझौते (Trade Deal) को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। यह बैठक 22 से 24 सितंबर 2025 तक चली। दोनों पक्षों ने बातचीत को “रचनात्मक” बताया, लेकिन यह स्पष्ट हो गया कि अमेरिका की एक प्रमुख मांग ने समझौते की राह में बड़ी बाधा पैदा कर दी है।
अमेरिका ने भारत से कहा कि वह रूस से तेल खरीदना बंद कर दे, लेकिन भारत ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। इसके कारण अमेरिका-भारत व्यापार समझौते की दिशा पर अनिश्चितता बरकरार है।
अमेरिका की मांग और भारत का रुख
अमेरिकी अधिकारियों ने भारत को स्पष्ट रूप से बताया कि रूस से तेल की खरीद को रोकना इस समझौते के लिए बेहद जरूरी है। अगर भारत इस दिशा में कदम उठाता है, तो अमेरिका भारत के टैरिफ घटाने और व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार है।
हालांकि, भारत ने इसे अस्वीकार कर दिया और कहा कि रूस से तेल खरीदना उसके लिए आवश्यक है। भारत ने अमेरिकी आग्रह को “अनुचित, अन्यायपूर्ण और अतार्किक” बताया।
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने भारत के कुछ सामानों पर टैरिफ दोगुना कर दिया था, जो अब 50 प्रतिशत हो गया है। ट्रंप ने इसे इसलिए किया क्योंकि भारत रूस को समर्थन दे रहा है। भारत ने इसे गंभीरता से अस्वीकार किया और कहा कि यह अन्यायपूर्ण और बिना तर्क के निर्णय है।
भारतीय टीम की पेशकशें
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में भारतीय टीम ने अमेरिका को कुछ रियायतें देने का प्रस्ताव रखा। इनमें प्रमुख बिंदु हैं:
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जीएम (Genetically Modified) मक्के के आयात पर प्रतिबंधों को कम करना।
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अमेरिकी रक्षा और ऊर्जा उत्पादों की अधिक खरीद।
गोयल ने कहा कि भारत आने वाले वर्षों में अमेरिका से और अधिक ऊर्जा उत्पाद खरीदने को तैयार है, ताकि व्यापार घाटा कम हो और अमेरिकी उत्पादों को भारतीय बाजार में बेहतर पहुंच मिले।
सूत्रों के अनुसार, भारत अमेरिका से लगभग 40 अरब डॉलर के उत्पाद खरीदने पर विचार कर रहा है। इसमें रक्षा उपकरण, तेल, सीमित मात्रा में जीएम मक्का और कुछ गैर-मुख्य डेयरी उत्पाद शामिल हैं।
व्यापार समझौते की अनिश्चितता
वार्ता रचनात्मक रही, लेकिन रूस से तेल खरीद का मुद्दा अभी भी सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि रूस से तेल की खरीद में कोई भी कमी तभी संभव है, जब अमेरिका भारत को ईरान और वेनेजुएला जैसे प्रतिबंधित देशों से तेल खरीदने की अनुमति देगा।
इसके अलावा, एच-1बी वीजा नियमों में हालिया बदलाव ने भी बातचीत को जटिल बना दिया। ये नियम भारतीय नागरिकों को असमान रूप से प्रभावित कर सकते हैं।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार घाटा 42.7 अरब डॉलर रहा।
निष्कर्ष
वॉशिंगटन में हुई बातचीत सकारात्मक और रचनात्मक रही, लेकिन कोई अंतिम समझौता अभी नहीं हो पाया।
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अमेरिका ने रूस से तेल खरीद रोकने की मांग की।
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भारत ने इसे स्वीकार नहीं किया।
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भारत ने अमेरिकी उत्पादों की अधिक खरीद और कुछ रियायतों की पेशकश की।
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रूस का तेल अभी भी सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है।
दोनों देशों के बीच विवादास्पद मुद्दों का समाधान निकाले बिना किसी ठोस व्यापार समझौते की संभावना फिलहाल नहीं दिखाई दे रही है। बातचीत जारी है और आगे के निर्णय पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
