Cough Syrup पर नए नियम: अब बिना डॉक्टर की पर्ची नहीं मिलेंगी सिरप दवाएं, सरकार ने बढ़ाई सख्ती
देश में दवाओं की बिक्री और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार ने एक बड़ा और अहम कदम उठाया है। अब Cough Syrup समेत सभी प्रकार की सिरप आधारित दवाएं बिना डॉक्टर की वैध पर्ची के नहीं खरीदी जा सकेंगी। इस फैसले के बाद दवा बिक्री नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है, जिसका सीधा असर आम लोगों और मेडिकल स्टोर्स दोनों पर पड़ेगा।
यह निर्णय केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा ‘ड्रग्स रूल्स, 1945’ में संशोधन के तहत लिया गया है। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य दवाओं की गुणवत्ता पर सख्त निगरानी रखना और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
क्या है नया नियम?
नए नियमों के अनुसार अब कफ सिरप और अन्य सिरप आधारित दवाओं को उन दवाओं की सूची से हटा दिया गया है, जिन्हें पहले कुछ शर्तों के तहत बिना डॉक्टर की पर्ची के भी बेचा जा सकता था।
अब स्थिति यह होगी कि:
- कफ सिरप खरीदने के लिए डॉक्टर की वैध प्रिस्क्रिप्शन अनिवार्य होगी
- मेडिकल स्टोर बिना पर्ची के सिरप नहीं दे सकेंगे
- ओवर-द-काउंटर (OTC) बिक्री पूरी तरह बंद होगी
सरकार का कहना है कि इससे दवाओं के गलत इस्तेमाल और नकली दवाओं के खतरे पर नियंत्रण मिलेगा।
यह फैसला क्यों लिया गया?
यह कदम ऐसे समय में आया है जब पिछले कुछ वर्षों में कफ सिरप की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर कई गंभीर मामले सामने आ चुके हैं। इन घटनाओं ने दवा नियंत्रण प्रणाली पर बड़े सवाल खड़े किए हैं।
सबसे बड़ा मामला मध्य प्रदेश में अक्टूबर 2025 में सामने आया था, जब कथित रूप से दूषित कफ सिरप पीने से 26 बच्चों की मौत हो गई थी। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था और दवा निर्माण से लेकर वितरण तक की पूरी प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए थे।
इसके अलावा, कुछ भारतीय कफ सिरप से जुड़े विवाद अफ्रीकी देशों और उज्बेकिस्तान में भी सामने आए, जिसके बाद भारत सरकार ने दवा कंपनियों पर निगरानी और कड़ी कर दी थी।
ड्रग्स रूल्स, 1945 में बड़ा संशोधन
सरकारी अधिसूचना के अनुसार 9 जून 2026 को ‘ड्रग्स रूल्स, 1945’ की अनुसूची-K (Schedule K) में संशोधन किया गया है।
पहले इस सूची में कुछ दवाओं को विशेष परिस्थितियों में बिना पर्ची बिक्री की छूट थी, लेकिन अब सिरप आधारित दवाओं को इस सूची से पूरी तरह हटा दिया गया है।
इसका मतलब है कि अब:
- सिरप दवाएं OTC श्रेणी में नहीं रहेंगी
- इनकी बिक्री केवल डॉक्टर की सलाह पर ही संभव होगी
- फार्मेसियों को नियमों का सख्ती से पालन करना होगा
ग्रामीण क्षेत्रों में भी लागू होंगे नियम
नए नियम केवल शहरों तक सीमित नहीं होंगे, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी इन्हें सख्ती से लागू किया जाएगा। पहले 1000 से कम आबादी वाले गांवों में कुछ छूट के तहत कफ सिरप की बिक्री संभव थी, लेकिन अब यह छूट खत्म कर दी गई है।
अब सभी क्षेत्रों में:
- केवल लाइसेंस प्राप्त मेडिकल स्टोर से ही बिक्री होगी
- डॉक्टर की पर्ची अनिवार्य होगी
- बिना प्रिस्क्रिप्शन बिक्री पर कार्रवाई हो सकती है
सरकार का मानना है कि इससे नकली और मिलावटी दवाओं के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
दवा कंपनियों पर बढ़ेगी जिम्मेदारी
नए नियमों के बाद दवा निर्माण कंपनियों पर भी सख्ती बढ़ जाएगी। अब उन्हें गुणवत्ता नियंत्रण, उत्पादन मानकों और लाइसेंसिंग नियमों का और अधिक सख्ती से पालन करना होगा।
सरकार पहले ही गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (GMP) मानकों को सख्त कर चुकी है। इसके साथ ही कई कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा चुकी है, जो गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं कर रही थीं।
सरकार ने पहले भी उठाए हैं कई कदम
पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार ने दवा सुरक्षा को लेकर कई अहम कदम उठाए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- कफ सिरप के निर्यात से पहले गुणवत्ता परीक्षण अनिवार्य करना
- दवा निर्माण इकाइयों के लिए संशोधित GMP मानक लागू करना
- खराब गुणवत्ता वाली कंपनियों के लाइसेंस निलंबित करना
- केंद्र और राज्य ड्रग कंट्रोल विभागों के संयुक्त निरीक्षण बढ़ाना
- दवा वितरण प्रणाली की निगरानी को मजबूत करना
इन कदमों का उद्देश्य दवाओं की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना रहा है।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
नए नियम लागू होने के बाद आम लोगों को अब छोटी-मोटी खांसी या सर्दी-जुकाम के लिए भी डॉक्टर से परामर्श लेना होगा।
अब:
- कफ सिरप सीधे मेडिकल स्टोर से नहीं मिल सकेगा
- पहले डॉक्टर से सलाह लेनी होगी
- पर्ची के आधार पर ही दवा मिलेगी
सरकार का मानना है कि इससे दवाओं के अनावश्यक और गलत उपयोग पर रोक लगेगी।
विशेषज्ञों की राय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार सिरप आधारित दवाओं में कई रसायन, फ्लेवरिंग एजेंट और तरल बेस का उपयोग होता है। निर्माण या भंडारण में थोड़ी सी लापरवाही भी गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती है।
इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह कदम दवा सुरक्षा को मजबूत करने और मरीजों को सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय है।
निष्कर्ष
कफ सिरप पर लगाए गए नए नियम भारत की दवा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव माने जा रहे हैं। इससे जहां दवाओं के गलत इस्तेमाल और नकली दवाओं पर रोक लगने की उम्मीद है, वहीं आम लोगों को अब इलाज के लिए डॉक्टर पर निर्भर रहना होगा।
सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है—दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और मरीजों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना।
