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150 KM रेंज वाला Pinaka रॉकेट तैयार: DRDO और टाटा-L&T का संयुक्त प्रयास

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Published On: 9 January 2026
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— 150 किमी तक मार करने वाला Pinaka रॉकेट तैयार, सेना ने दिए बड़े ऑर्डर

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पाकिस्तान–चीन के लिए खतरे की घंटी! भारत अपने स्वदेशी Pinaka रॉकेट सिस्टम की बढ़ाने जा रहा है रेंज, सेना ने जारी किए बड़े ऑर्डर

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने अपनी सैन्य तैयारियों और स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को और तेज़ी से मजबूत करना शुरू कर दिया है। बीते कुछ महीनों में भारतीय सेना ने स्वदेशी रक्षा कंपनियों के साथ कई बड़े करार किए हैं, जिनका मकसद आधुनिक युद्ध की जरूरतों के अनुसार हथियार प्रणालियों को उन्नत करना है। इसी कड़ी में अब भारतीय सेना अपने बेहद अहम और भरोसेमंद पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम (Pinaka MLRS) को बड़े पैमाने पर अपग्रेड करने जा रही है। सेना ने इस परियोजना के लिए देश की प्रमुख निजी रक्षा कंपनियों टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और लार्सन एंड टुब्रो (L&T) को ऑर्डर जारी किए हैं। ये दोनों कंपनियां पहले से ही Pinaka सिस्टम के निर्माण और सप्लाई से जुड़ी रही हैं और अब इसके आधुनिकीकरण और लाइफसाइकिल मैनेजमेंट की जिम्मेदारी भी संभालेंगी।

Pinaka रॉकेट सिस्टम: दुश्मन के लिए बड़ी चुनौती

Pinaka मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर भारतीय सेना की तोपखाने ताकत का एक अहम स्तंभ बन चुका है। यह सिस्टम दुश्मन के ठिकानों पर दूर से सटीक और भीषण हमला करने में सक्षम है। सीमावर्ती इलाकों में तेजी से तैनाती और एक साथ कई रॉकेट दागने की क्षमता इसे आधुनिक युद्ध में बेहद प्रभावी बनाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, पिनाका का उन्नत संस्करण पाकिस्तान और चीन दोनों के लिए एक रणनीतिक चुनौती साबित हो सकता है, खासकर तब जब इसकी मारक क्षमता और रेंज को और बढ़ाया जा रहा है।

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Pinaka रॉकेट की लंबी दूरी क्षमता ने सीमाओं पर बढ़ाया दबदबा

टाटा और L&T को मिला बड़ा जिम्मा

सेना द्वारा जारी इस नए कॉन्ट्रैक्ट के तहत टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और L&T, भारतीय सेना के EME (Electrical and Mechanical Engineers) कोर और बेस वर्कशॉप्स के साथ मिलकर काम करेंगी। इस साझेदारी के अंतर्गत:

  • Pinaka सिस्टम के प्रमुख और महत्वपूर्ण पुर्जों को अपग्रेड किया जाएगा

  • पुराने और तकनीकी रूप से अप्रचलित हिस्सों को बदला जाएगा

  • सिस्टम के रखरखाव के लिए लगातार तकनीकी सहायता दी जाएगी

  • लॉन्चर और बैटरी कमांड पोस्ट का ओवरहाल किया जाएगा

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पिनाका रेजीमेंट की ऑपरेशनल तैयारी हर समय उच्च स्तर पर बनी रहे।

चरणबद्ध तरीके से होगा ओवरहाल

इस कॉन्ट्रैक्ट के पहले चरण में 510 आर्मी बेस वर्कशॉप (ABW) के सहयोग से Pinaka लॉन्चर और बैटरी कमांड पोस्ट का एक पायलट ओवरहाल किया जाएगा। इस प्रक्रिया से मिले अनुभव और तकनीकी निष्कर्षों के आधार पर आगे के चरणों में सेना के बाकी सभी Pinaka सिस्टम्स का ओवरहाल किया जाएगा। L&T के एक प्रवक्ता ने इस साझेदारी को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह पहली बार है जब कोई घरेलू निजी OEM और भारतीय सेना मिलकर फ्रंटलाइन तोपखाने प्रणालियों के रखरखाव और लाइफसाइकिल सपोर्ट के लिए इस स्तर पर काम कर रहे हैं। यह मॉडल भविष्य में अन्य रक्षा प्लेटफॉर्म्स के लिए भी एक ब्लूप्रिंट के रूप में काम करेगा।

टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स की बड़ी भूमिका

टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स ने भी इस कॉन्ट्रैक्ट की आधिकारिक पुष्टि की है। कंपनी के अनुसार, पिनाका लॉन्चर के निर्माण में पहले से ही लगभग 80 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। अब तक बड़ी संख्या में पिनाका MLRS सिस्टम भारतीय सेना को सौंपे जा चुके हैं, जो विभिन्न मोर्चों पर ऑपरेशनल रूप से तैनात हैं।

टाटा के प्रवक्ता ने कहा कि इस परियोजना से कंपनी के लैंड कॉम्बैट सिस्टम्स पोर्टफोलियो को और मजबूती मिलेगी और भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को नई गति मिलेगी।

पिनाका की रेंज बढ़ाने पर बड़ा फोकस

भारतीय सेना और DRDO मिलकर पिनाका की मारक क्षमता और रेंज को लगातार बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। मौजूदा समय में:

  • 75 किलोमीटर रेंज वाले पिनाका वेरिएंट का सफल परीक्षण हो चुका है

  • भविष्य में इसके बड़े पैमाने पर ऑर्डर मिलने की संभावना है

  • 150 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक मार करने वाले उन्नत वेरिएंट पर भी काम चल रहा है

अगर यह लक्ष्य हासिल हो जाता है, तो पिनाका सिस्टम भारत की तोपखाना शक्ति को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा देगा और सीमाओं पर सेना की रणनीतिक बढ़त और मजबूत हो जाएगी।

क्या है Pinaka कार्यक्रम?

Pinaka कार्यक्रम को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है। इस कार्यक्रम के तहत सरकारी और निजी क्षेत्र की कंपनियों की भागीदारी से अत्याधुनिक रॉकेट सिस्टम तैयार किए जा रहे हैं। यह रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ पहल की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक माना जा रहा है। पिछले साल भारत सरकार ने पिनाका रॉकेट सिस्टम के लिए अब तक का सबसे बड़ा घरेलू रक्षा कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था, जिसकी कुल कीमत 10,000 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई थी।

गोला-बारूद की जरूरत भी होगी पूरी

सेना की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पिनाका के लिए गोला-बारूद भी पूरी तरह भारत में ही बनाया जाएगा। अगले एक दशक में सेना की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए:

  • म्यूनिशन इंडिया लिमिटेड

  • इकोनॉमिक एक्सप्लोसिव्स लिमिटेड (EEL)

को पिनाका के गोला-बारूद निर्माण की जिम्मेदारी दी गई है। इन दोनों कंपनियों को DRDO द्वारा तकनीक ट्रांसफर की जा चुकी है, जिससे स्वदेशी उत्पादन और तेज होगा।

पाकिस्तान और चीन के लिए क्यों बढ़ेगी चिंता?

विशेषज्ञों का मानना है कि पिनाका की बढ़ती रेंज और सटीकता पाकिस्तान और चीन दोनों के लिए रणनीतिक संतुलन को चुनौती देने वाली साबित हो सकती है। सीमावर्ती क्षेत्रों में पिनाका की तैनाती से भारत को:

  • दुश्मन के ठिकानों पर दूर से हमला करने की क्षमता

  • तेज प्रतिक्रिया और भारी फायरपावर

  • पारंपरिक और सीमित युद्ध में बढ़त

मिलेगी।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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