भारत-चीन के बीच सीधी उड़ानों की बहाली: इंडिगो की नई दिल्ली-ग्वांगझोउ और दिल्ली-हनोई फ्लाइट
नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच लंबे समय बाद फिर से सीधी अंतरराष्ट्रीय उड़ान (Direct International Flights) शुरू होने जा रही हैं। इंडिगो एयरलाइंस ने 10 नवंबर 2025 से दिल्ली और ग्वांगझोउ के बीच रोजाना सीधी उड़ान शुरू करने की घोषणा की है। इस नई सेवा से न केवल यात्री सुविधाओं में वृद्धि होगी, बल्कि व्यापार और पर्यटन कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी।
विदेश मंत्रालय और चीनी दूतावास दोनों ने इस बात की पुष्टि की है कि भारत और चीन के बीच हवाई संपर्क फिर से बहाल किया जा रहा है। कोविड-19 महामारी (COVID-19 Pandemic) और डोकलाम विवाद (Doklam Dispute) के कारण पिछले कुछ वर्षों तक भारत-चीन के बीच सीधी उड़ानें बंद रही थीं। अब इन नए उड़ानों के माध्यम से दोनों देशों के बीच यात्रा और व्यापारिक संबंधों में सुधार की उम्मीद है।
इंडिगो की नई दिल्ली-ग्वांगझोउ उड़ान: मुख्य जानकारी
नई दिल्ली-ग्वांगझोउ फ्लाइट इंडिगो के एयरबस A320 विमान द्वारा संचालित होगी। एयरलाइन के अनुसार, दिल्ली से उड़ान रात 9:45 बजे प्रस्थान करेगी और ग्वांगझोउ में सुबह 4:40 बजे पहुंचेगी। वहीं, ग्वांगझोउ से वापसी उड़ान सुबह 5:50 बजे प्रस्थान कर सुबह 10:10 बजे दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरेगी।
इस नई उड़ान सेवा से भारतीय और चीनी यात्री व्यापारिक मीटिंग, पर्यटन, शिक्षा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए आसानी से यात्रा कर सकेंगे। इंडिगो ने टिकट बुकिंग की सुविधा अपनी आधिकारिक वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर उपलब्ध कराई है।
इंडिगो के ग्लोबल सेल्स हेड विनय मल्होत्रा ने कहा कि दिल्ली-ग्वांगझोउ मार्ग की शुरुआत से भारत और चीन के बीच व्यापार और पर्यटन कनेक्टिविटी में सुधार होगा और दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान के नए अवसर खुलेंगे।
कोविड-19 और उड़ानों पर प्रभाव
कोविड-19 महामारी (COVID-19 Pandemic) के दौरान भारत और चीन के बीच सीधी उड़ानों को बंद कर दिया गया था। इसके अलावा, डोकलाम विवाद के समय भी दोनों देशों के बीच हवाई संपर्क प्रभावित हुआ। अब महामारी और कूटनीतिक समझौतों के बाद उड़ानें फिर से शुरू हो रही हैं।
इंडिगो एयरलाइंस इस पहल के जरिए भारत-चीन कनेक्टिविटी बहाल करने वाली प्रमुख एयरलाइन में से एक बन गई है। इससे न केवल यात्रियों के लिए यात्रा का विकल्प बढ़ेगा, बल्कि व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध भी मजबूत होंगे।
कोलकाता-ग्वांगझोउ मार्ग की हालिया शुरुआत
इंडिगो ने इससे पहले 26 अक्टूबर 2025 से कोलकाता और ग्वांगझोउ के बीच भी सीधी उड़ान शुरू की थी। इससे भारतीय यात्री दक्षिण-पूर्व एशिया की ओर यात्रा के लिए आसानी से विकल्प पा सकते हैं। अब इंडिगो दिल्ली और कोलकाता दोनों शहरों से ग्वांगझोउ को जोड़ रही है, जिससे व्यापार और पर्यटन कनेक्टिविटी और बढ़ेगी।
दिल्ली-हनोई फ्लाइट: दक्षिण-पूर्व एशिया का नया मार्ग
इंडिगो ने यह भी घोषणा की है कि 20 दिसंबर 2025 से दिल्ली और हनोई (Vietnam) के बीच रोजाना सीधी अंतरराष्ट्रीय उड़ान शुरू होगी। यह फ्लाइट भी एयरबस A320 विमान द्वारा संचालित होगी। इस मार्ग से नई दिल्ली को दक्षिण-पूर्व एशिया के प्रमुख व्यावसायिक और सांस्कृतिक केंद्रों से जोड़ने में मदद मिलेगी।
इंडिगो पहले से ही कोलकाता-हनोई और हो ची मिन्ह सिटी के बीच 14 साप्ताहिक उड़ानें चला रही है। दिल्ली-हनोई मार्ग की शुरुआत से यह कनेक्टिविटी और भी मजबूत होगी। भारतीय व्यापारी, छात्र और पर्यटक अब कम समय और कम खर्च में इन देशों की यात्रा कर सकते हैं।
व्यवसाय और पर्यटन पर प्रभाव
नई दिल्ली-ग्वांगझोउ और नई दिल्ली-हनोई उड़ानें भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच व्यापार और पर्यटन कनेक्टिविटी को नया आयाम देंगी। चीन और वियतनाम दक्षिण-पूर्व एशिया के महत्वपूर्ण व्यावसायिक केंद्र हैं।
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भारतीय कंपनियां अब आसानी से व्यापारिक मीटिंग और माल-सेवा के आयात-निर्यात में भाग ले सकेंगी।
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पर्यटन क्षेत्र को भी फायदा होगा। भारतीय और चीनी पर्यटक अब तेजी से और सस्ते में एक दूसरे के देश की यात्रा कर पाएंगे।
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यह सांस्कृतिक आदान-प्रदान और मित्रता को भी बढ़ावा देगा।
भविष्य की संभावनाएं
विदेश मंत्रालय और इंडिगो के अधिकारी मानते हैं कि नई उड़ान सेवाओं से भारत-चीन और भारत-दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच कनेक्टिविटी में सुधार होगा। आने वाले समय में और नए मार्गों की घोषणा की संभावना है, जिससे भारतीय यात्रियों और व्यापारियों को अंतरराष्ट्रीय यात्रा में आसानी होगी।
निष्कर्ष
10 नवंबर 2025 से नई दिल्ली-ग्वांगझोउ सीधी उड़ानें और 20 दिसंबर 2025 से नई दिल्ली-हनोई फ्लाइट शुरू होने जा रही है। कोविड-19 महामारी और डोकलाम विवाद के बाद यह कदम भारत-चीन और भारत-दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच व्यापार, पर्यटन और सांस्कृतिक कनेक्टिविटी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा।
इंडिगो की यह पहल यात्रियों को रोजाना अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए आसान विकल्प देती है और भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया के व्यापारिक और सांस्कृतिक केंद्रों से जोड़ती है।
