Javra में जैन दिवाकर भवन पर धर्मसभा, संतों ने बताया सद्मार्ग पर चलने का संदेश
Javra (निप्र)। जैन दिवाकर भवन में आयोजित धर्मसभा के दौरान संतों ने प्रवचनों में जीवन, कर्म और गुरु भक्ति के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। संतों ने कहा कि संतों की प्रेरणा और उनके बताए सद्मार्ग पर चलने से व्यक्ति जीवन में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करता है। संतों के वचन भगवान महावीर की वाणी का सार हैं, और सत्य मार्ग पर चलकर ही जीवन सफल होता है।
गुरु के मार्ग पर चलना ही सच्चा धर्म: प्रवर्तक विजय मुनि जी
प्रवचन के दौरान प्रवर्तक श्री विजय मुनि जी म.सा. ने कहा कि मनुष्य अपने कर्मों का ही फल प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि जीवन में गुरु के सम्मान और उनके बताए मार्ग पर चलकर ही व्यक्ति वास्तविक महानता को प्राप्त कर सकता है।
उन्होंने गुरु कस्तुर पावन धाम का उल्लेख करते हुए कहा कि यह स्थान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगा। यह धाम गुरु भक्ति और साधना का प्रतीक है, जिसे श्रद्धालुओं ने मिलकर तैयार किया है।
कठोर अनुशासन से जीवन का सार समझ आता है: उपाध्याय गौतम मुनि जी
उपाध्याय डॉ. गौतम मुनि जी म.सा. ने धर्मसभा में कहा कि जो व्यक्ति गुरु रत्नों के अनुशासन को अपने जीवन में अपनाता है, वह जीवन का वास्तविक अर्थ समझ लेता है। उन्होंने कहा कि कठोर अनुशासन ही धर्म की प्रभावना का आधार है।
उन्होंने कहा कि गुरु कस्तुर का जीवन करुणा, ज्ञान और साधना का प्रतीक है, जो सभी को प्रेरणा देता है कि हर प्राणी के प्रति करुणा भाव रखना चाहिए। गुरु के आशीर्वाद से ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव है।
जीवन को व्यर्थ न गंवाएं: उपप्रवर्तक चंद्रेश मुनि जी
उपप्रवर्तक श्री चंद्रेश मुनि जी म.सा. ने कहा कि जावरा श्री संघ का प्रत्येक व्यक्ति यदि संकल्प कर ले तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। उन्होंने कहा कि वस्तुओं का उपयोग जीवन में होना चाहिए, उन्हें केवल संग्रहित नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मनुष्य का जीवन अनमोल है और इसे निंदा, द्वेष या व्यर्थ विचारों में नहीं गंवाना चाहिए। जीवन को सकारात्मक दिशा में लगाना ही सच्चा धर्म है।
निरंतर आत्मविकास का संदेश: अनुष्ठान आराधिका डॉ. कुमुदलता जी
अनुष्ठान आराधिका डॉ. कुमुदलता जी म.सा. ने कहा कि जीवन में निरंतर कुछ नया करते रहना चाहिए ताकि स्वयं के साथ समाज का भी विकास हो सके। उन्होंने मानव जीवन को दुर्लभ बताते हुए इसके सदुपयोग पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि हम उस गुरु परंपरा से जुड़े हैं जिसने त्याग, तपस्या और साधना के माध्यम से जीवन को सार्थक बनाया।

गुरु भक्ति और आत्मचिंतन पर जोर
डा. महाप्रज्ञा जी म.सा. ने कहा कि जावरा उनकी पाट गादी का क्षेत्र है और यहां की मिट्टी से उनका गहरा जुड़ाव है। उन्होंने कहा कि प्रवचन सुनना तभी सार्थक है जब जीवन में परिवर्तन आए।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आत्मचिंतन करने का आग्रह किया कि संतों की वाणी से प्राप्त आशीर्वाद ही वास्तविक संपत्ति है।
आगामी प्रवचन और धार्मिक कार्यक्रम
पूर्व महामंत्री श्री संघ द्वय संदीप रांका, सुभाष टुकड़ियां और अभय सुराणा ने जानकारी देते हुए बताया कि 15 मई शुक्रवार को प्रातः 8:45 बजे से महावीर स्कूल, अरिहंत कॉलोनी, पहाड़िया रोड पर मंगलमय प्रवचन आयोजित किए जाएंगे।
प्रवचन के पश्चात उपस्थित धर्मानुरागी श्रावक-श्राविकाओं के लिए नवकारसी का आयोजन गुरुभक्तों द्वारा किया जाएगा।
साध्वी मंडल के लिए नवकार महामंत्र जाप
उपाध्याय डॉ. गौतम मुनि जी म.सा. के आव्हान पर साध्वी मंडल द्वारा अहमदाबाद में उपचाररत महासती अरुण प्रभा जी म.सा. के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना हेतु नवकार महामंत्र का जाप किया गया।
श्रद्धालुओं ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की मंगल कामना की।
बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति
धर्मसभा में श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के पूर्व अध्यक्ष द्वय बसंतीलाल चपड़ोद, पारसमल बरडिया एवं पुखराजमल कोच्चटा सहित समाज के अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। सभी श्रद्धालुओं ने संतों के प्रवचनों का श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया और गुरु भक्ति तथा सद्मार्ग पर चलने के संदेश को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का संचालन पूर्व महामंत्री सुजानमल कोच्चटा द्वारा किया गया, जिन्होंने पूरे आयोजन को सुव्यवस्थित एवं सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संचालन के दौरान उन्होंने संतों के विचारों को सरल और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया, जिससे श्रद्धालुओं में गहरी प्रेरणा का संचार हुआ।
धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं की उपस्थिति रही, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण हो गया। भजन, प्रवचन और गुरु वाणी के बीच श्रद्धालुओं ने गहन श्रद्धा के साथ सहभागिता की। अंत में सभी ने धर्म, सेवा और संयम के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
