शोक की घड़ी में सेवा का संकल्प, नेत्रदानी मुकेश देवड़ा के नेत्रदान से दो जीवन होंगे रोशन
खाचरौद । शोक की घड़ी में भी मानवता और सेवा का संकल्प निभाते हुए देवड़ा परिवार ने अनुकरणीय पहल की है। स्वर्गीय श्री मुकेश देवड़ा का शुक्रवार दोपहर लगभग 4 बजे हृदय गति रुक जाने से दुखद निधन हो गया। परिवार में इस अत्यंत कठिन और भावुक समय के बीच उनके परिजनों एवं सुपुत्री ने मानवीय संवेदना का परिचय देते हुए उनके नेत्रदान का पुनीत निर्णय लिया।
परिजनों की सहमति से नेत्रदान की प्रक्रिया गीता भवन न्यास समिति, डॉ. ददरवाल एवं उनकी टीम तथा जैन सोशल ग्रुप मैत्री, खाचरौद के सहयोग से सफलतापूर्वक संपन्न कराई गई। इस नेत्रदान के माध्यम से दो दृष्टिबाधित व्यक्तियों के जीवन में नई रोशनी आने की संभावना है।
शोक के बीच लिया प्रेरणादायी निर्णय
किसी अपने को खोने का दुःख शब्दों में व्यक्त करना आसान नहीं होता। ऐसे कठिन समय में भी देवड़ा परिवार द्वारा नेत्रदान का निर्णय लेना समाज के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण है।
परिवार ने अपने प्रियजन की स्मृति को सेवा और मानवता से जोड़ते हुए यह निर्णय लिया। नेत्रदान के माध्यम से स्वर्गीय मुकेश देवड़ा की आंखें किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में प्रकाश का माध्यम बन सकती हैं।
यह निर्णय इस बात का संदेश देता है कि मृत्यु के बाद भी मानव शरीर का एक अंग किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन में नई उम्मीद और उजाला ला सकता है।
जैन सोशल ग्रुप मैत्री के माध्यम से 21वां नेत्रदान
जैन सोशल ग्रुप मैत्री, खाचरौद के अध्यक्ष राजेंद्र नान्देचा ने बताया कि यह बड़नगर संस्था द्वारा संपन्न कराया गया 988वां नेत्रदान है। वहीं जैन सोशल ग्रुप मैत्री, खाचरौद के माध्यम से यह 21वां नेत्रदान संपन्न हुआ है।
उन्होंने कहा कि नेत्रदान को महादान कहा जाता है, क्योंकि इसके माध्यम से किसी व्यक्ति के जीवन में दृष्टि का उजाला लौटाने की संभावना बनती है। समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना और लोगों को इसके लिए प्रेरित करना सेवा कार्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के पुनीत कार्य समाज में सेवा, संवेदना और मानवता की भावना को मजबूत करते हैं।
सेवा संस्कारों से प्रेरित हुआ परिवार
देवड़ा परिवार लंबे समय से सामाजिक और सेवा गतिविधियों से जुड़ा रहा है। परिवार के सदस्य लायंस क्लब के माध्यम से नेत्र शिविर, रक्तदान शिविर सहित विभिन्न सामाजिक एवं सेवा कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेते रहे हैं।
सेवा कार्यों से जुड़े इन्हीं संस्कारों का प्रभाव परिवार के इस निर्णय में भी दिखाई दिया। अपने प्रियजन के निधन के बाद परिवार ने व्यक्तिगत दुःख से ऊपर उठकर समाज के हित में नेत्रदान का निर्णय लिया।
परिवार की यह पहल इस बात का उदाहरण है कि सेवा और मानवता के संस्कार कठिन परिस्थितियों में भी व्यक्ति को दूसरों के जीवन के बारे में सोचने की प्रेरणा देते हैं।
प्रक्रिया में सेवा सदस्यों का सहयोग
नेत्रदान की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में जैन सोशल ग्रुप मैत्री, खाचरौद के अध्यक्ष राजेंद्र नान्देचा सहित स्वप्निल सुराणा, विनय जैन, पुनीत पी. मेहता एवं प्रफुल दलाल उपस्थित रहे।
सभी ने आवश्यक समन्वय एवं सहयोग प्रदान करते हुए नेत्रदान की प्रक्रिया को संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
गीता भवन न्यास समिति, डॉ. ददरवाल एवं उनकी टीम के सहयोग से पूरी प्रक्रिया निर्धारित व्यवस्था के अनुसार संपन्न कराई गई।
नेत्रदान से समाज को मिला संदेश
देवड़ा परिवार के इस मानवीय निर्णय की सामाजिक एवं सेवा क्षेत्र से जुड़े लोगों ने सराहना की। उन्होंने कहा कि नेत्रदान वास्तव में महादान है। किसी व्यक्ति के निधन के बाद उसकी आंखें यदि किसी जरूरतमंद के जीवन में दृष्टि का माध्यम बन सकें, तो इससे बड़ी मानवीय सेवा कोई नहीं हो सकती।
नेत्रदान केवल दो आंखों का दान नहीं है, बल्कि यह किसी दूसरे व्यक्ति को दुनिया को देखने का अवसर देने की भावना है। इसलिए समाज में नेत्रदान को लेकर जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है।
आज भी कई लोग जानकारी के अभाव में नेत्रदान का निर्णय नहीं ले पाते। ऐसे में देवड़ा परिवार जैसी पहल अन्य परिवारों को भी प्रेरित कर सकती है।
सेवा की मिसाल बना देवड़ा परिवार
शोक की घड़ी में परिवार द्वारा लिया गया यह निर्णय समाज के सामने संवेदना और सेवा की अनूठी मिसाल प्रस्तुत करता है। स्वर्गीय मुकेश देवड़ा का जीवन सामाजिक गतिविधियों से जुड़े परिवार का हिस्सा रहा और उनके निधन के बाद भी उनकी आंखें किसी अन्य के जीवन में प्रकाश का माध्यम बन सकती हैं।
यह पहल उनके सेवा संस्कारों को आगे बढ़ाने वाली है। परिवार ने अपने व्यक्तिगत दुःख को मानव सेवा के संकल्प में बदलकर समाज को एक सकारात्मक संदेश दिया है।
ऐसे कार्य यह विश्वास मजबूत करते हैं कि मानवता केवल जीवनकाल तक सीमित नहीं है। मृत्यु के बाद भी किसी जरूरतमंद के जीवन में उपयोगी बनना संभव है।
स्वर्गीय मुकेश देवड़ा के नेत्रदान से दो दृष्टिबाधित व्यक्तियों के जीवन में रोशनी आने की संभावना है। यह उनके परिवार के लिए भी एक संतोष का विषय हो सकता है कि उनके प्रियजन का जीवन समाप्त होने के बाद भी उनकी आंखें किसी अन्य व्यक्ति के जीवन में नई उम्मीद का कारण बन सकती हैं।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को सद्गति प्रदान करें तथा शोकाकुल देवड़ा परिवार को इस असीम दुःख को सहन करने की शक्ति, धैर्य और संबल प्रदान करें।
नागदा से संवाददाता जीवनलाल जैन की रिपोर्ट।
